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पुजारी की हत्या, मंदिर में लूट
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 04 Jul 2016 12:23 AM IST
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Police on the scene of the murder of the priest.
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के साढ़ौली कदीम में चक खिजरपुर गांव के निर्माणाधीन रविदास मंदिर के पुजारी का शव रविवार की तड़के मंदिर के पास ही उसी के खेत में पड़ा मिला।
मंदिर का दान पात्र भी गायब था, जो बाद में मृतक के गन्ने के खेत से खाली मिला। परिजनों ने पुलिस के समक्ष दान पात्र लूटने आए बदमाशों द्वारा विरोध करने पर हत्या किए जाने की आशंका व्यक्त की है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाकर घटना की जांच शुरू कर दी।
कोतवाली बेहट क्षेत्र के चकखिजरपुर गांव निवासी महंत ज्योतिराम उर्फ कलीराम (75) गांव के पास ही गंदेवड़-चिलकाना रोड पर अपनी जमीन में संत रविदास मंदिर का निर्माण करा रहे थे। पांच साल से दिन रात मंदिर में ही रहकर पूजा पाठ करते थे।
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सुबह उनका पौत्र अटल मंदिर की तरफ गया, तो बकौल अटल मंदिर का दान पात्र गायब था और ज्योतिराम भी वहां नहीं थे। मंदिर परिसर से धान की रोपाई के लिए तैयार किए गए खेत तक तीन चार लोगों के पैरों और किसी चीज को घसीटे जाने के निशान मिले।
इस पर अटल जैसे ही खेत की तरफ गया, तो पेड़ों के हाशिए में उसने ज्योतिराम को मृत हालत में पड़ा देखा। उसने इसकी सूचना गांव में दी, जिसके बाद अन्य परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। पुलिस को सूचना दी गई। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मौके पर पहुंचे।
उन्होंने आसपास खेतों में तलाशी कराई तो दान पात्र मृतक के ही गन्ने के खेत में पड़ा मिला, जो खाली था। उसका ताला टूटा हुआ था। मृतक की नाक से खून निकला था। परिजनों ने पुलिस के समक्ष दान पात्र लूटने आए बदमाशों द्वारा ज्योतिराम की हत्या किए जाने की आशंका जाहिर की।
मृतक ज्योतिराम ने 20 साल पहले पत्नी की मौत के बाद गृहस्थ जीवन छोड़कर सन्यास ले लिया था। उनकी गांव के पास ही गंदेवड़-चिलकाना रोड पर कृषि भूमि है, जिसके कुछ हिस्से में उन्होंने पांच साले संत रविदास मंदिर के निर्माण की नींव रखी थी।
पांच साल से लगातार वे चंदा मांगकर मंदिर का निर्माण करा रहे थे और दिन रात मंदिर में ही रहकर पूजा पाठ भी करते थे। परिजनों एवं ग्रामीणों की मानें तो किसी से कोई वास्ता नहीं रखते थे और मंदिर के सेवा कार्य में लगे रहते थे। मृतक के पुत्रों बीरबल, सोमचंद और श्यामलाल ने बताया कि उनकी किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी।
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मंदिर का दान पात्र भी गायब था, जो बाद में मृतक के गन्ने के खेत से खाली मिला। परिजनों ने पुलिस के समक्ष दान पात्र लूटने आए बदमाशों द्वारा विरोध करने पर हत्या किए जाने की आशंका व्यक्त की है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाकर घटना की जांच शुरू कर दी।
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कोतवाली बेहट क्षेत्र के चकखिजरपुर गांव निवासी महंत ज्योतिराम उर्फ कलीराम (75) गांव के पास ही गंदेवड़-चिलकाना रोड पर अपनी जमीन में संत रविदास मंदिर का निर्माण करा रहे थे। पांच साल से दिन रात मंदिर में ही रहकर पूजा पाठ करते थे।
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सुबह उनका पौत्र अटल मंदिर की तरफ गया, तो बकौल अटल मंदिर का दान पात्र गायब था और ज्योतिराम भी वहां नहीं थे। मंदिर परिसर से धान की रोपाई के लिए तैयार किए गए खेत तक तीन चार लोगों के पैरों और किसी चीज को घसीटे जाने के निशान मिले।
इस पर अटल जैसे ही खेत की तरफ गया, तो पेड़ों के हाशिए में उसने ज्योतिराम को मृत हालत में पड़ा देखा। उसने इसकी सूचना गांव में दी, जिसके बाद अन्य परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। पुलिस को सूचना दी गई। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मौके पर पहुंचे।
उन्होंने आसपास खेतों में तलाशी कराई तो दान पात्र मृतक के ही गन्ने के खेत में पड़ा मिला, जो खाली था। उसका ताला टूटा हुआ था। मृतक की नाक से खून निकला था। परिजनों ने पुलिस के समक्ष दान पात्र लूटने आए बदमाशों द्वारा ज्योतिराम की हत्या किए जाने की आशंका जाहिर की।
मृतक ज्योतिराम ने 20 साल पहले पत्नी की मौत के बाद गृहस्थ जीवन छोड़कर सन्यास ले लिया था। उनकी गांव के पास ही गंदेवड़-चिलकाना रोड पर कृषि भूमि है, जिसके कुछ हिस्से में उन्होंने पांच साले संत रविदास मंदिर के निर्माण की नींव रखी थी।
पांच साल से लगातार वे चंदा मांगकर मंदिर का निर्माण करा रहे थे और दिन रात मंदिर में ही रहकर पूजा पाठ भी करते थे। परिजनों एवं ग्रामीणों की मानें तो किसी से कोई वास्ता नहीं रखते थे और मंदिर के सेवा कार्य में लगे रहते थे। मृतक के पुत्रों बीरबल, सोमचंद और श्यामलाल ने बताया कि उनकी किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी।