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बदले की आग में बदल दिया था आने-जाने का रास्ता
Updated Wed, 21 Jun 2017 12:24 AM IST
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खूनी रंजिश में बदल दिया था आने-जाने का रास्ता
सहारनपुर। सात नवंबर 2012 को दिनदहाड़े पिता-पुत्र की हत्या के बाद से इस घर की महिलाओं तक में काफी गुस्सा था। घर से चंद कदमों की दूरी पर स्थित मंदिर और उस तरफ के रास्ते को भी कभी इस घर की महिलाओं ने नहीं देेखा। पांच साल बाद पति और बेटे की हत्या के आरोपियों की मौत के बाद अब उस मंदिर पर वे महिलाएं पहुंचीं। पुलिस के सामने भी हत्याकांड को बदल करार देते हुए दिल को सुकून मिलने की बात की। उधर, पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि हत्याकांड से पहले पूरी योजना बनाई गई। आरोपियों को यह भी खबर थी कि उस परिवार के लोग सुबह ही कहीं बाहर जाएंगे। यही कारण है कि पहले उन पर हमला किया और इसके बाद गांव आकर ताऊ-भतीजे को मौत के घाट उतारा।
बड़गांव के लुकादड़ी में मंगलवार को दिन निकलते ही दोहरे हत्याकांड की पटकथा कई दिन पहले ही तैयार हो गई थी। तीन दिन पहले आरोपियों के घर पर शादी थी और इसी दौरान बदला लेने की योजना बनाई गई। शादी समारोह समाप्त होने के बाद मंगलवार को महावीर पक्ष के दो लोगों के कस्बे से बाहर जाने की खबर आरोपियों को मिल गई थी। यही कारण है कि पहले दुष्यंत और लोकेश की घेराबंदी चिराऊ में की गई। वहां गोली मारने के बाद उन्हें मरा हुआ समझकर यह सब गांव आए थे। इसके बाद महावीर और सुनील की हत्या की गई। ऐसे में साफ है कि यह पूरे परिवार का सफाया करने की फिराक में थे। यहां बता दें कि पांच साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड के आरोपी महावीर, सतवीर सहित अन्य लोग कुछ महीने पहले जमानत पर छूटकर आए थे। तभी से इनमें तनातनी और बढ़ गई थी। हत्याकांड में दो आरोपी विवेक और अजय भारतीय सेना में तैनात हैं। इसके अलावा दूसरे पक्ष का घायल लोकेश भी सेना में हैं।
पुलिस को भी नहीं लगी भनक
जातीय हिंसा के बाद गांवों में शांति समिति और अन्य कवायद का दावा करने वाली पुलिस भी इस वारदात से अनभिज्ञ रही। जबकि पुलिस अब खुद ही मान रही है कि इस हत्याकांड की साजिश कई दिन पहले रची जा चुकी थी और इसके लिए हमलावरों ने तैयारी भी की। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। हालांकि अब पुलिस गांव में फोर्स तैनात कर शांति व्यवस्था का दावा कर रही है। मगर, गांव के लोग खौफजदा हैं।
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मंगलवार को दोहरा हत्याकांड जमीन के विवाद में चल रही रंजिश में हुई। इसमें आरोपियों की धरपकड़ के लिए छह टीमें बनाई गई हैं। किसी भी तरह की वारदात की आशंका के मद्देनजर फोर्स गांव में तैनात है।
एस इमैनुअल, डीआईजी
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सहारनपुर। सात नवंबर 2012 को दिनदहाड़े पिता-पुत्र की हत्या के बाद से इस घर की महिलाओं तक में काफी गुस्सा था। घर से चंद कदमों की दूरी पर स्थित मंदिर और उस तरफ के रास्ते को भी कभी इस घर की महिलाओं ने नहीं देेखा। पांच साल बाद पति और बेटे की हत्या के आरोपियों की मौत के बाद अब उस मंदिर पर वे महिलाएं पहुंचीं। पुलिस के सामने भी हत्याकांड को बदल करार देते हुए दिल को सुकून मिलने की बात की। उधर, पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि हत्याकांड से पहले पूरी योजना बनाई गई। आरोपियों को यह भी खबर थी कि उस परिवार के लोग सुबह ही कहीं बाहर जाएंगे। यही कारण है कि पहले उन पर हमला किया और इसके बाद गांव आकर ताऊ-भतीजे को मौत के घाट उतारा।
बड़गांव के लुकादड़ी में मंगलवार को दिन निकलते ही दोहरे हत्याकांड की पटकथा कई दिन पहले ही तैयार हो गई थी। तीन दिन पहले आरोपियों के घर पर शादी थी और इसी दौरान बदला लेने की योजना बनाई गई। शादी समारोह समाप्त होने के बाद मंगलवार को महावीर पक्ष के दो लोगों के कस्बे से बाहर जाने की खबर आरोपियों को मिल गई थी। यही कारण है कि पहले दुष्यंत और लोकेश की घेराबंदी चिराऊ में की गई। वहां गोली मारने के बाद उन्हें मरा हुआ समझकर यह सब गांव आए थे। इसके बाद महावीर और सुनील की हत्या की गई। ऐसे में साफ है कि यह पूरे परिवार का सफाया करने की फिराक में थे। यहां बता दें कि पांच साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड के आरोपी महावीर, सतवीर सहित अन्य लोग कुछ महीने पहले जमानत पर छूटकर आए थे। तभी से इनमें तनातनी और बढ़ गई थी। हत्याकांड में दो आरोपी विवेक और अजय भारतीय सेना में तैनात हैं। इसके अलावा दूसरे पक्ष का घायल लोकेश भी सेना में हैं।
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पुलिस को भी नहीं लगी भनक
जातीय हिंसा के बाद गांवों में शांति समिति और अन्य कवायद का दावा करने वाली पुलिस भी इस वारदात से अनभिज्ञ रही। जबकि पुलिस अब खुद ही मान रही है कि इस हत्याकांड की साजिश कई दिन पहले रची जा चुकी थी और इसके लिए हमलावरों ने तैयारी भी की। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। हालांकि अब पुलिस गांव में फोर्स तैनात कर शांति व्यवस्था का दावा कर रही है। मगर, गांव के लोग खौफजदा हैं।
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मंगलवार को दोहरा हत्याकांड जमीन के विवाद में चल रही रंजिश में हुई। इसमें आरोपियों की धरपकड़ के लिए छह टीमें बनाई गई हैं। किसी भी तरह की वारदात की आशंका के मद्देनजर फोर्स गांव में तैनात है।
एस इमैनुअल, डीआईजी