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सीबीआई
Updated Thu, 22 Jun 2017 01:07 AM IST
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एनजीटी की रोक के बावजूद धड़ल्ले से होता रहा खनन
सहारनपुर। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) की रोक के बावजूद जिले में वर्ष 2016 के बाद भी बड़े पैमाने पर खनन होता रहा। अवैध खनन की जांच करने के लिए सहारनपुर पहुंची सीबीआई टीम को अवैध खनन के संबंध में कई सुबूत भी अभी तक मिल चुके हैं। ऐेसे में अवैध खनन से जुड़े लोगों और अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति है।
एनजीटी ने वर्ष 2016 में जिले में खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। मगर उसके बावजूद जिला पंचायत विभाग खनन परिवहन पर रॉयल्टी वसूलता रहा। जिला पंचायत के द्वारा 2016 के बाद प्रति माह लाखों रुपये रॉयल्टी के रूप में वसूले गए। इसका सीधा मतलब है कि यदि रॉयल्टी वसूली गई है तो खनन भी हुआ होगा। इसके बाद डीएम एस कमाल ने अवैध खनन की बजाय रॉयल्टी वसूलने पर रोक लगा दी। तत्कालीन कमिश्नर ने डीएम के रॉयल्टी वसूलनी के रोक के आदेश को निरस्त करते हुए अवैध खनन रुकवाने के निर्देश दिए। इसके अलावा खनन पर पूरी तरह रोक के बाद भी स्टोन क्रशर चलते रहे थे। सीबीआई को स्टोन क्रशर के चलने और खनन सामग्री मुहैया होने के भी प्रमाण मिले हैं। वर्ष 2012 के बाद हुए अवैध खनन की जांच करने के लिए इन दिनों सीबीआई की टीम सहारनपुर में डेरा डाले हुए है, जो खनन क्षेत्र का भ्रमण करने के साथ ही स्टोन क्रशर मालिकों और खनन से जुड़े लोगों से गहन पूछताछ कर चुकी है। सीबीआई को अवैध खनन के संबंध में कई अहम सुबूत हाथ लगे हैं। इसे लेकर अवैध खनन से जुड़े लोगों और अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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सहारनपुर। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) की रोक के बावजूद जिले में वर्ष 2016 के बाद भी बड़े पैमाने पर खनन होता रहा। अवैध खनन की जांच करने के लिए सहारनपुर पहुंची सीबीआई टीम को अवैध खनन के संबंध में कई सुबूत भी अभी तक मिल चुके हैं। ऐेसे में अवैध खनन से जुड़े लोगों और अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति है।
एनजीटी ने वर्ष 2016 में जिले में खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। मगर उसके बावजूद जिला पंचायत विभाग खनन परिवहन पर रॉयल्टी वसूलता रहा। जिला पंचायत के द्वारा 2016 के बाद प्रति माह लाखों रुपये रॉयल्टी के रूप में वसूले गए। इसका सीधा मतलब है कि यदि रॉयल्टी वसूली गई है तो खनन भी हुआ होगा। इसके बाद डीएम एस कमाल ने अवैध खनन की बजाय रॉयल्टी वसूलने पर रोक लगा दी। तत्कालीन कमिश्नर ने डीएम के रॉयल्टी वसूलनी के रोक के आदेश को निरस्त करते हुए अवैध खनन रुकवाने के निर्देश दिए। इसके अलावा खनन पर पूरी तरह रोक के बाद भी स्टोन क्रशर चलते रहे थे। सीबीआई को स्टोन क्रशर के चलने और खनन सामग्री मुहैया होने के भी प्रमाण मिले हैं। वर्ष 2012 के बाद हुए अवैध खनन की जांच करने के लिए इन दिनों सीबीआई की टीम सहारनपुर में डेरा डाले हुए है, जो खनन क्षेत्र का भ्रमण करने के साथ ही स्टोन क्रशर मालिकों और खनन से जुड़े लोगों से गहन पूछताछ कर चुकी है। सीबीआई को अवैध खनन के संबंध में कई अहम सुबूत हाथ लगे हैं। इसे लेकर अवैध खनन से जुड़े लोगों और अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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