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लुटाया जा रहा जनता के हक का पैसा
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:48 AM IST
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कंप्यूटर ऑपरेटर के नाम पर खर्च किए जा रहे प्रतिमाह सवा लाख रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम के लिपिकों को कंप्यूटर का ज्ञान न होने की वजह से नगर निगम ने उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर सहयोगी उपलब्ध कराए हुए हैं, जिनपर नगर निगम नियम के विरुद्घ जाकर प्रति माह सवा लाख रुपया अतिरिक्त खर्च कर रहा है, जो साल में करीब 15 लाख रुपये बैठता है। यानी जो पैसा जनता के हित में विकास कार्यों में लगना चाहिए, वही पैसा लिपिकों की सहूलियत के लिए खर्च किया जा रहा है।
किसी भी लिपिक को कंप्यूटर ऑपरेटर सहयोगी देने का कोई नियम नहीं है। पूर्व में लिपिक के लिए भर्ती होने वालों के लिए टाइपिंग का ज्ञान जरूरी होता था, मगर समय के साथ टाइपिंग मशीन की जगह कंप्यूटर ने ले ली। नगर निगम के तमाम कार्य ऑनलाइन हो चुके हैं। सूत्रों ने बताया कि नगर निगम में 16 लिपिक ऐसे हैं, जिन्हें कंप्यूटर ऑपरेट करना नहीं आता है। ऐसे में नगरायुक्त ने ऐसे सभी लिपिकों को कंप्यूटर सीखने के निर्देश देने की बजाय कंप्यूटर ऑपरेटर सहयोगी प्रदान किए हुए हैं। ऐसे में लिपिक वाचक बनकर सहयोगियों से कंपोजिंग कराते हैं। इन सहयोगियों पर प्रति माह एक लाख 20 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो साल में करीब 15 लाख बैठते हैं। इतने पैसे किसी भी मोहल्ले की सड़क, पुलिया या नाली निर्माण के लिए काफी हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि सातवें वेतन आयोग का लाभ लिपिक को तभी मिल सकता है, जब उसे कंप्यूटर आता हो। उधर, नगरायुक्त ने कहा कि वह मामले को दिखवाएंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम के लिपिकों को कंप्यूटर का ज्ञान न होने की वजह से नगर निगम ने उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर सहयोगी उपलब्ध कराए हुए हैं, जिनपर नगर निगम नियम के विरुद्घ जाकर प्रति माह सवा लाख रुपया अतिरिक्त खर्च कर रहा है, जो साल में करीब 15 लाख रुपये बैठता है। यानी जो पैसा जनता के हित में विकास कार्यों में लगना चाहिए, वही पैसा लिपिकों की सहूलियत के लिए खर्च किया जा रहा है।
किसी भी लिपिक को कंप्यूटर ऑपरेटर सहयोगी देने का कोई नियम नहीं है। पूर्व में लिपिक के लिए भर्ती होने वालों के लिए टाइपिंग का ज्ञान जरूरी होता था, मगर समय के साथ टाइपिंग मशीन की जगह कंप्यूटर ने ले ली। नगर निगम के तमाम कार्य ऑनलाइन हो चुके हैं। सूत्रों ने बताया कि नगर निगम में 16 लिपिक ऐसे हैं, जिन्हें कंप्यूटर ऑपरेट करना नहीं आता है। ऐसे में नगरायुक्त ने ऐसे सभी लिपिकों को कंप्यूटर सीखने के निर्देश देने की बजाय कंप्यूटर ऑपरेटर सहयोगी प्रदान किए हुए हैं। ऐसे में लिपिक वाचक बनकर सहयोगियों से कंपोजिंग कराते हैं। इन सहयोगियों पर प्रति माह एक लाख 20 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो साल में करीब 15 लाख बैठते हैं। इतने पैसे किसी भी मोहल्ले की सड़क, पुलिया या नाली निर्माण के लिए काफी हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि सातवें वेतन आयोग का लाभ लिपिक को तभी मिल सकता है, जब उसे कंप्यूटर आता हो। उधर, नगरायुक्त ने कहा कि वह मामले को दिखवाएंगे।
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