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स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं, दूषित पानी से बुझा रहे प्यास
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 30 Apr 2017 12:58 AM IST
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बदहाल हिंडन नदी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में जनपद में बड़ी आबादी जहरीला पानी पीने को मजबूर है। 300 से अधिक लोग इस पानी को पीकर अपनी जान गवां चुके हैं और कई जिंदगी अभी भी बीमारी से लड़ रही हैं। हैरत की बात यह है कि सबकुछ जानते हुए भी शासन और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
कभी जीवनदायिनी रही हिंडन नदी पिछले दो दशक से कहर बरपा रही है। इसके लिए जिम्मेदार हैं वह इंडस्ट्री, जो कानून की परवाह किए बिना केमिकल युक्त पानी को सीधा नदी में छोड़ रहे हैं।
इसकी वजह से हिंडन नदी पूरी तरह जहरीली हो चुकी है। एनजीटी भी अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा कर चुकी है। हिंडन का पानी दूषित होने से आसपास के गांवों का भूजल जहर बन चुका है। हैंडपंप लगातार जहर उगल रहे हैं।
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एनजीटी के आदेश पर बड़गांव के गांवों में हैंडपंपों की जांच कराई गई थी। दूषित पानी देने वाले हैंडपंपों को उखाड़ने और पेयजल की व्यवस्था करने के आदेश प्रशासन को दिए गए थे। मगर अभी तक ऐसे अनेक हैंडपंपों को उखाड़ा नहीं गया है।
ऐसे में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले एक दशक में भूजल स्तर 35 फुट तक घटा है। वर्तमान में 135 फुट पर भी साफ पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में बड़गांव क्षेत्र के करीब 52 गांवों में पेयजल के लिए जूझ रहे हैं।
क्षेत्र से गुजर रही जहरीली हिंडन नदी की वजह से आसपास के गांवों के हैंडपंपों और नलकूपों का पानी पीला हो चुका है, जो कैंसर समेत अनेक बीमारियां बांट रहा है।
गांव महेशपुर, शिमलाना, शब्बीरपुर, भगवानपुर, कुतबामाजरा, अंबेहटाचांद सहजी, सांवतखेड़ी, दल्हेड़ी, चंदपुर, नन्हेड़ा खुर्द एवं कला चिराऊ, सिसौनी आदि दूषित जल प्रभावित गांव हैं। इन गांवों में दूषित पानी अभी तक 300 से अधिक लोगों की जान ले चुका है।
जबकि सैकड़ों लोग अब भी जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं। महेशपुर के प्रधान पप्पू उर्फ श्यामसिंह का कहना है कि उनके गांव में करीब 70 हैंडपंप सरकारी लगे हुए हैं, जिनका पानी पीने के लायक नहीं बचा है।
शासन से टंकी बनवाने के लिए पैसा रिलीज हो चुका है, मगर अभी तक काम शुरू नहीं कराया गया है। बड़गांव के ग्राम प्रधान सुखपाल शर्मा कहते हैं कि उनके गांव में 70 में से 10 हैंडपंप ऐसे हैं, जिनको रिबोर के लिए चिह्नित किया गया था, मगर उसके बाद कोई कदम नहीं उठाया गया है।
गांव दल्हेड़ी के प्रधान सोनू राणा, शिमलाना के प्रधान बीरपाल सिंह, चंदपुर के प्रधान रविंद्र सिंह आदि का कहना है कि चिह्निकरण के बाद कोई भी हैंडपंप अभी तक रिबोर नहीं हुआ है।
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कभी जीवनदायिनी रही हिंडन नदी पिछले दो दशक से कहर बरपा रही है। इसके लिए जिम्मेदार हैं वह इंडस्ट्री, जो कानून की परवाह किए बिना केमिकल युक्त पानी को सीधा नदी में छोड़ रहे हैं।
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इसकी वजह से हिंडन नदी पूरी तरह जहरीली हो चुकी है। एनजीटी भी अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा कर चुकी है। हिंडन का पानी दूषित होने से आसपास के गांवों का भूजल जहर बन चुका है। हैंडपंप लगातार जहर उगल रहे हैं।
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एनजीटी के आदेश पर बड़गांव के गांवों में हैंडपंपों की जांच कराई गई थी। दूषित पानी देने वाले हैंडपंपों को उखाड़ने और पेयजल की व्यवस्था करने के आदेश प्रशासन को दिए गए थे। मगर अभी तक ऐसे अनेक हैंडपंपों को उखाड़ा नहीं गया है।
ऐसे में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पिछले एक दशक में भूजल स्तर 35 फुट तक घटा है। वर्तमान में 135 फुट पर भी साफ पानी नहीं आ रहा है। ऐसे में बड़गांव क्षेत्र के करीब 52 गांवों में पेयजल के लिए जूझ रहे हैं।
क्षेत्र से गुजर रही जहरीली हिंडन नदी की वजह से आसपास के गांवों के हैंडपंपों और नलकूपों का पानी पीला हो चुका है, जो कैंसर समेत अनेक बीमारियां बांट रहा है।
गांव महेशपुर, शिमलाना, शब्बीरपुर, भगवानपुर, कुतबामाजरा, अंबेहटाचांद सहजी, सांवतखेड़ी, दल्हेड़ी, चंदपुर, नन्हेड़ा खुर्द एवं कला चिराऊ, सिसौनी आदि दूषित जल प्रभावित गांव हैं। इन गांवों में दूषित पानी अभी तक 300 से अधिक लोगों की जान ले चुका है।
जबकि सैकड़ों लोग अब भी जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे हैं। महेशपुर के प्रधान पप्पू उर्फ श्यामसिंह का कहना है कि उनके गांव में करीब 70 हैंडपंप सरकारी लगे हुए हैं, जिनका पानी पीने के लायक नहीं बचा है।
शासन से टंकी बनवाने के लिए पैसा रिलीज हो चुका है, मगर अभी तक काम शुरू नहीं कराया गया है। बड़गांव के ग्राम प्रधान सुखपाल शर्मा कहते हैं कि उनके गांव में 70 में से 10 हैंडपंप ऐसे हैं, जिनको रिबोर के लिए चिह्नित किया गया था, मगर उसके बाद कोई कदम नहीं उठाया गया है।
गांव दल्हेड़ी के प्रधान सोनू राणा, शिमलाना के प्रधान बीरपाल सिंह, चंदपुर के प्रधान रविंद्र सिंह आदि का कहना है कि चिह्निकरण के बाद कोई भी हैंडपंप अभी तक रिबोर नहीं हुआ है।