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Saharanpur News: दस माह से गोपालकों को नहीं मिला मुख्यमंत्री सहभागिता योजना का पैसा
Fri, 02 Jan 2026 12:59 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:59 AM IST
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तीतरों। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत पशुपालकों को गोवंशियों के पालन के लिए सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता दस माह से खातों में नहीं आने से गहरा रोष व्याप्त है।
बता दें, कि प्रदेश सरकार ने गोवंश को संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री योजना संचालित की थी, जिसमें पहले 30 रुपये प्रतिदिन तथा बाद में इसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया था। गोपालकों को गोशालाओं से गाय लेने पर प्रतिमाह 1500 रुपये देने का प्रावधान तय किया है। गोपालकों अभिषेक कुमार, सतीश कुमार, पहल सिंह, ब्रजपाल सिंह, रामकुमार, सौ सिंह, सेवाराम, सोनू कुमार आदि का कहना है कि उन लोगों ने तीतरों की विभिन्न गोशालाओं से गाेवंशियों को सरकार की इस योजना के तहत लेते हुए सोचा था कि कुछ धनराशि सरकार से मिल जाएगी, लेकिन दस माह से राशि नहीं मिली है, जबकि उनके बैंक खाते एकदम सुचारु रूप से संचालित हैं।
पशुपालकों का कहना है कि गोशाला से गोद ली गाय उपचार के बाद भी गर्भ धारण नहीं कर पाई है। साथ ही गायों के कानों में लगे टैग के कारण ही वे उन्हें छोड़ नहीं पा रहे हैं। गैर दुधारू गोवंश को चारा खिलाना महंगा पड़ रहा है। गोपालकों ने प्रशासन से अनुदान राशि दिलाने अथवा उन्हें वापस गोशाला भिजवाने की मांग की है।
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मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डाॅ.एमपी सिंह गौर का कहना है कि बजट की कमी नहीं है। बैंकों के विलय की प्रक्रिया में दिए गए खातों के बैंक बदल जाने से धनराशि ट्रासंफर नहीं हो पा रही है। फिर भी जल्दी ही धनराशि भिजवाने का प्रयास किया जाएगा।
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बता दें, कि प्रदेश सरकार ने गोवंश को संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री योजना संचालित की थी, जिसमें पहले 30 रुपये प्रतिदिन तथा बाद में इसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया था। गोपालकों को गोशालाओं से गाय लेने पर प्रतिमाह 1500 रुपये देने का प्रावधान तय किया है। गोपालकों अभिषेक कुमार, सतीश कुमार, पहल सिंह, ब्रजपाल सिंह, रामकुमार, सौ सिंह, सेवाराम, सोनू कुमार आदि का कहना है कि उन लोगों ने तीतरों की विभिन्न गोशालाओं से गाेवंशियों को सरकार की इस योजना के तहत लेते हुए सोचा था कि कुछ धनराशि सरकार से मिल जाएगी, लेकिन दस माह से राशि नहीं मिली है, जबकि उनके बैंक खाते एकदम सुचारु रूप से संचालित हैं।
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पशुपालकों का कहना है कि गोशाला से गोद ली गाय उपचार के बाद भी गर्भ धारण नहीं कर पाई है। साथ ही गायों के कानों में लगे टैग के कारण ही वे उन्हें छोड़ नहीं पा रहे हैं। गैर दुधारू गोवंश को चारा खिलाना महंगा पड़ रहा है। गोपालकों ने प्रशासन से अनुदान राशि दिलाने अथवा उन्हें वापस गोशाला भिजवाने की मांग की है।
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मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डाॅ.एमपी सिंह गौर का कहना है कि बजट की कमी नहीं है। बैंकों के विलय की प्रक्रिया में दिए गए खातों के बैंक बदल जाने से धनराशि ट्रासंफर नहीं हो पा रही है। फिर भी जल्दी ही धनराशि भिजवाने का प्रयास किया जाएगा।