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सर्दी की शुरुआत, नवजातों को निमोनिया करने लगा परेशान, ये लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से लें सलाह
Fri, 13 Nov 2020 12:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 13 Nov 2020 12:02 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
धीरे-धीरे सर्दी का मौसम बच्चों की सेहत बिगाड़ने लगा है। खासकर नवजात बच्चों में निमोनिया का प्रकोप बढ़ रहा है। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचने वाले नवजात में से करीब 30 फीसदी बच्चों में निमोनिया की शिकायत मिल रही है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सहारनपुर के अध्यक्ष/बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह जिला महिला अस्पताल में बच्चों की ओपीडी भी करते हैं। उन्होंने बताया कि निमोनिया एक प्रकार का संक्रमण है। हवा में मौजूद इसका बैक्टीरिया सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचता है।
कई बार फंफूद की वजह से भी फेफड़ा संक्रमित हो जाता है। निमोनिया अक्सर सर्दियों में होता है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण भी उनके लिए यह बीमारी घातक साबित होती है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सहारनपुर के अध्यक्ष/बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह जिला महिला अस्पताल में बच्चों की ओपीडी भी करते हैं। उन्होंने बताया कि निमोनिया एक प्रकार का संक्रमण है। हवा में मौजूद इसका बैक्टीरिया सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचता है।
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कई बार फंफूद की वजह से भी फेफड़ा संक्रमित हो जाता है। निमोनिया अक्सर सर्दियों में होता है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण भी उनके लिए यह बीमारी घातक साबित होती है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए।
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बच्चों में निमोनिया के लक्षण
-कंपकंपी और पसीने के साथ बुखार।
-गंभीर खांसी के साथ गाढ़ा बलगम या खून आना।
-भूख का कम लगना।
-प्रत्येक सांस के साथ एक सीटी जैसी।
-होट और नाखूनों का नीला पड़ना।
बचाव को यह करें
-जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध पिलाएं।
-छह माह के बाद अतिरिक्त आहार के साथ मां का दूध भी जारी रखें।
-बच्चे को अच्छा पोषण दें।
-भीड़ वाली जगहों पर कम से कम ले जाएं।
-खांसी और जुकाम के रोगी से दूर रखें।
-प्रदूषण से दूर रखें आदि।
आईएमए ने की गोष्ठी
विश्व निमोनिया दिवस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सहारनपुर द्वारा जूम एप पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्ष डॉ. मनदीप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश गोयल, डॉ. हिमांशु और डॉ. प्रमोद यादव ने निमोनिया को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने निमोनिया होने के कारण और उपचार पर विस्तार से अपनी बात रखी।
-कंपकंपी और पसीने के साथ बुखार।
-गंभीर खांसी के साथ गाढ़ा बलगम या खून आना।
-भूख का कम लगना।
-प्रत्येक सांस के साथ एक सीटी जैसी।
-होट और नाखूनों का नीला पड़ना।
बचाव को यह करें
-जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध पिलाएं।
-छह माह के बाद अतिरिक्त आहार के साथ मां का दूध भी जारी रखें।
-बच्चे को अच्छा पोषण दें।
-भीड़ वाली जगहों पर कम से कम ले जाएं।
-खांसी और जुकाम के रोगी से दूर रखें।
-प्रदूषण से दूर रखें आदि।
आईएमए ने की गोष्ठी
विश्व निमोनिया दिवस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सहारनपुर द्वारा जूम एप पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्ष डॉ. मनदीप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश गोयल, डॉ. हिमांशु और डॉ. प्रमोद यादव ने निमोनिया को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने निमोनिया होने के कारण और उपचार पर विस्तार से अपनी बात रखी।