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पांच साल में भीम आर्मी से आजाद समाज पार्टी तक का सफर
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पांच साल में भीम आर्मी से आजाद समाज पार्टी तक का सफर
छुटमलपुर। चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी का सफर पांच साल में आजाद समाज पार्टी के पड़ाव पर पहुंचा है। चंद्रशेखर आजाद ने नोएडा में अपनी राजनीतिक पारी का आगाज करते हुए ‘आजाद समाज पार्टी’ नाम से राजनीतिक दल का गठन किया।
भीम आर्मी की स्थापना पिछले जिला पंचायत चुनाव से पहले 2015 में हुई थी। इसके बाद एएचपी इंटर कालेज में कथित तौर पर अनुसूचित समाज के छात्रों की पिटाई और गागलहेड़ी थाने के गांव घडकोली में हुए प्रकरण के बाद भीम आर्मी पहली बार सुर्खियों में आई थी। पांच मई 2017 को शब्बीरपुर में अनुसूचित समाज के लोगों और राजपूतों में संघर्ष हो गया था। तब अनुसूचित समाज के कथित तौर पर 25 घरों को जलाने और एक युवक की मौत के बाद नौ मई को रामनगर में की जा रही भीम आर्मी की महापंचायत की अनुमति न मिलने पर हिंसक झड़प हो गई थी। इसमें भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर को रासुका में निरुद्ध किया गया था। इसके बाद चंद्रशेखर ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी। वर्ष 2017 में जेल जाने पर 15 माह बाद 12 सितंबर 2018 की देर रात चंद्रशेखर को रिहा किया गया था। उसके बाद चंद्रशेखर से मिलने कई राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के साथ ही जिग्नेश मेवाणी तक छुटमलपुर पहुंचे थे। मूलत: हरिद्वार जनपद के भगवानपुर ब्लाक के गांव डाडा पट्टी के रहने वाले चंद्रशेखर आजाद का परिवार एक अरसे से छुटमलपुर की हरिजन कालोनी में रह रहा है। रविवार को उनके पार्टी गठन के वक्त घर पर उनकी मां और बहन ही थी, जो इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बचती रही। वहीं यहां रहने वाले समाज के लोगों ने खुशी जताई।
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छुटमलपुर। चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी का सफर पांच साल में आजाद समाज पार्टी के पड़ाव पर पहुंचा है। चंद्रशेखर आजाद ने नोएडा में अपनी राजनीतिक पारी का आगाज करते हुए ‘आजाद समाज पार्टी’ नाम से राजनीतिक दल का गठन किया।
भीम आर्मी की स्थापना पिछले जिला पंचायत चुनाव से पहले 2015 में हुई थी। इसके बाद एएचपी इंटर कालेज में कथित तौर पर अनुसूचित समाज के छात्रों की पिटाई और गागलहेड़ी थाने के गांव घडकोली में हुए प्रकरण के बाद भीम आर्मी पहली बार सुर्खियों में आई थी। पांच मई 2017 को शब्बीरपुर में अनुसूचित समाज के लोगों और राजपूतों में संघर्ष हो गया था। तब अनुसूचित समाज के कथित तौर पर 25 घरों को जलाने और एक युवक की मौत के बाद नौ मई को रामनगर में की जा रही भीम आर्मी की महापंचायत की अनुमति न मिलने पर हिंसक झड़प हो गई थी। इसमें भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर को रासुका में निरुद्ध किया गया था। इसके बाद चंद्रशेखर ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी। वर्ष 2017 में जेल जाने पर 15 माह बाद 12 सितंबर 2018 की देर रात चंद्रशेखर को रिहा किया गया था। उसके बाद चंद्रशेखर से मिलने कई राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के साथ ही जिग्नेश मेवाणी तक छुटमलपुर पहुंचे थे। मूलत: हरिद्वार जनपद के भगवानपुर ब्लाक के गांव डाडा पट्टी के रहने वाले चंद्रशेखर आजाद का परिवार एक अरसे से छुटमलपुर की हरिजन कालोनी में रह रहा है। रविवार को उनके पार्टी गठन के वक्त घर पर उनकी मां और बहन ही थी, जो इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बचती रही। वहीं यहां रहने वाले समाज के लोगों ने खुशी जताई।
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