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Saharanpur News: छिपाकर नहीं बताकर करना होगा एड्स से मुकाबला
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सहारनपुर। एड्स लाइलाज है, लेकिन दवाओं के नियमित सेवन, तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर एड्स होने पर लंबी जिंदगी जी सकते हैं। जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में 1800 एड्स पीड़ितों का इलाज चल रहा है। इनमें थर्ड जेंडर भी शामिल हैं।
बृहस्पतिवार यानी आज विश्व एड्स दिवस मनाया जाएगा। एसबीडी जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सहारनपुर में पिछले कुछ सालों से एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। हर महीने एड्स के 25 से 30 नए मरीज मिल रहे हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुष एचआईवी संक्रमण की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। इस बात की पुष्टि एआरटी सेंटर के आंकड़े कर रहे हैं। एआरटी सेंटर में 1120 पुरुष, 660 महिला और 20 थर्ड जेंडर का उपचार चल रहा है। एडी हेल्थ एवं एसबीडी जिला अस्पताल के प्रभारी प्रमुख अधीक्षक डॉ. बृजेश राठौर ने बताया कि जागरुकता के अभाव में लोग एचआईवी संक्रमण की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। अब बेहतर और असरदार दवाएं उपलब्ध है, जो रोग को फैलने से रोकती है। हालांकि अभी इसका इलाज संभव नहीं है, पर व्यवस्थित दिनचर्या और तनावमुक्त रहकर लोग कई सालों से स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं। रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने पर घबराने के बजाय इसे स्वीकार करना सीखना होगा। एड्स के अलावा भी कई बीमारियां ऐसी हैं जिनकी चपेट में आने के बाद जीवनभर उनके साथ रहना पड़ता है। ऐसे में रोग के साथ जीना ही विकल्प है।
-किसी भी तरह के लक्षण को नजरअंदाज न करें
किसी भी तरह के लक्षण सामने आने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय अस्पताल जाए, क्योंकि बीमारी या संक्रमण जितनी जल्दी पकड़ में आ जाए उतनी जल्दी उसका इलाज शुरू कर उसे नियंत्रित या ठीक किया जा सकता है। एचआईवी जैसे संक्रमण में एक-एक पल बहुत ही कीमती होती है।
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--ऐसे फैलता है संक्रमण
-संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क से
-संक्रमित सिरिंज व सुई का दूसरों के द्वारा प्रयोग करने से
-संक्रमित मां से शिशु को जन्म से पूर्व, प्रसव के समय या प्रसव शीघ्र बाद
-संक्रमित अंग प्रत्यारोपण से
--ऐसे करें बचाव
-जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य से यौन संबंध नहीं रखें
-मादक औषधियों के आदी व्यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सुई का प्रयोग न करें
-जब कभी खून की जरूरत हो, पंजीकृत ब्लड बैंक से जांच किए गए खून का ही उपयोग करें
-चिकित्सीय उपकरणों को 20 मिनट पानी में उबालकर जीवाणुरहित करके ही उपयोग में लें
--एचआईवी के लक्षण
-गले में सूजन
-लगातार वजन घटते जाना
-कोई भी बीमारी होने के बाद ठीक न होना
-मुंह में घाव, त्वचा में खुजली, दर्द होना, सेहत का लगातार गिरना आदि
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बृहस्पतिवार यानी आज विश्व एड्स दिवस मनाया जाएगा। एसबीडी जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सहारनपुर में पिछले कुछ सालों से एड्स पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। हर महीने एड्स के 25 से 30 नए मरीज मिल रहे हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुष एचआईवी संक्रमण की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। इस बात की पुष्टि एआरटी सेंटर के आंकड़े कर रहे हैं। एआरटी सेंटर में 1120 पुरुष, 660 महिला और 20 थर्ड जेंडर का उपचार चल रहा है। एडी हेल्थ एवं एसबीडी जिला अस्पताल के प्रभारी प्रमुख अधीक्षक डॉ. बृजेश राठौर ने बताया कि जागरुकता के अभाव में लोग एचआईवी संक्रमण की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। अब बेहतर और असरदार दवाएं उपलब्ध है, जो रोग को फैलने से रोकती है। हालांकि अभी इसका इलाज संभव नहीं है, पर व्यवस्थित दिनचर्या और तनावमुक्त रहकर लोग कई सालों से स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं। रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने पर घबराने के बजाय इसे स्वीकार करना सीखना होगा। एड्स के अलावा भी कई बीमारियां ऐसी हैं जिनकी चपेट में आने के बाद जीवनभर उनके साथ रहना पड़ता है। ऐसे में रोग के साथ जीना ही विकल्प है।
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-किसी भी तरह के लक्षण को नजरअंदाज न करें
किसी भी तरह के लक्षण सामने आने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय अस्पताल जाए, क्योंकि बीमारी या संक्रमण जितनी जल्दी पकड़ में आ जाए उतनी जल्दी उसका इलाज शुरू कर उसे नियंत्रित या ठीक किया जा सकता है। एचआईवी जैसे संक्रमण में एक-एक पल बहुत ही कीमती होती है।
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--ऐसे फैलता है संक्रमण
-संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क से
-संक्रमित सिरिंज व सुई का दूसरों के द्वारा प्रयोग करने से
-संक्रमित मां से शिशु को जन्म से पूर्व, प्रसव के समय या प्रसव शीघ्र बाद
-संक्रमित अंग प्रत्यारोपण से
--ऐसे करें बचाव
-जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य से यौन संबंध नहीं रखें
-मादक औषधियों के आदी व्यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सुई का प्रयोग न करें
-जब कभी खून की जरूरत हो, पंजीकृत ब्लड बैंक से जांच किए गए खून का ही उपयोग करें
-चिकित्सीय उपकरणों को 20 मिनट पानी में उबालकर जीवाणुरहित करके ही उपयोग में लें
--एचआईवी के लक्षण
-गले में सूजन
-लगातार वजन घटते जाना
-कोई भी बीमारी होने के बाद ठीक न होना
-मुंह में घाव, त्वचा में खुजली, दर्द होना, सेहत का लगातार गिरना आदि