{"_id":"66fc768fff76f575b9029f54","slug":"after-56-years-the-wound-is-fresh-again-now-we-have-enough-patience-to-perform-the-last-rites-saharanpur-news-c-30-1-smrt1051-132839-2024-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: 56 साल बाद फिर जख्म हुआ ताजा, इतना सब्र कि अब कर पाएंगे अंत्येष्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: 56 साल बाद फिर जख्म हुआ ताजा, इतना सब्र कि अब कर पाएंगे अंत्येष्टी
Wed, 02 Oct 2024 03:54 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 02 Oct 2024 03:54 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। सात फरवरी 1968 का वह दिन आज भी याद है, जब बड़े भाई 23 वर्षीय मलखान सिंह की विमान हादसे में निधन की सूचना मिली। उस समय मेरी उम्र करीब 12 साल होगी, लेकिन परिवार के हालातों से वाकिफ था। देखता रहता था कि माता-पिता और भाभी समेत परिवार के अन्य सदस्य किस तरह कोने में जाकर रोते-बिलखते थे। क्योंकि अंतिम समय में परिवार का कोई सदस्य उनका चेहरा भी नहीं देख सका और न ही अंत्येष्टी कर सके। 56 साल बाद जब सेना के जवानों ने आकर पार्थिव शरीर मिलने के जानकारी दी तो वह दर्द ताजा हो गया। समझ ही नहीं आया कि आखिर भाई के निधन पर अब दुख जताऊं या फिर यह सब्र करूं कि कम से कम अब अंत्येष्टी तो कर सकेंगे। यह कहते-कहते मलखान सिंह के छोटे भाई इसमपाल सिंह की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह एक ऐसा घटनाक्रम है, जिस पर यकीन करना भी मुश्किल होता है।
-- -
दादा को देखा नहीं, लेकिन गर्व है
मलखान सिंह के पोते गौतम और मनीष का कहना है कि दादा को देखा तो नहीं है, लेकिन उन्हें दादा पर गर्व है। इस बात का संतोष है कि देश की खातिर दादा बलिदानी हुए और उनका अंतिम संस्कार विधि-विधान से परिवार के लोग कर पाएंगे। मलखान सिंह की पोती सोनिया और मोनिका की शादी हो चुकी है। वह भी कहती हैं कि निधन का दुख है, लेकिन इस बात की भी तसल्ली है कि वह दादा के पार्थिव शरीर का परिवार के लोग अंतिम संस्कार करेंगे। मलखान सिंह का जन्म 18 जनवरी 1945 को हुआ था। वह पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके बलिदानी होने के बाद पत्नी शीला की शादी छोटे भाई चंद्रपाल सिंह के साथ करा दी गई थी। परिजनों का कहना है कि उन्हें कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिली। हालांकि नानौता थाना पुलिस का कहना है कि मलखान सिंह सेना के जवान थे।
-- -- --
लगातार चल रहा सर्च अभियान
वर्ष 2003 में अटल बिहारी वाजपेई सरकार के कार्यकाल में सेना ने यहां पर सर्च अभियान शुरू किया था। बताया जाता है कि इसी सर्च अभियान के दौरान मलखान सिंह समेत चार जवानों के पार्थिव शरीर मिले हैं। वर्ष 2019 में भी पांच जवानों के पार्थिव शरीर मिले थे।
विज्ञापन
यह बोले डॉक्टर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि जब तक शव के चारों तरफ बर्फ ढकी होती है, तब तक उसका कुछ नहीं बिगड़ता। बर्फ पिघलने के बाद शव सड़ने लगेगा। बर्फ में कितने साल तक शव रह सकता है, इसका कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
विज्ञापन
दादा को देखा नहीं, लेकिन गर्व है
मलखान सिंह के पोते गौतम और मनीष का कहना है कि दादा को देखा तो नहीं है, लेकिन उन्हें दादा पर गर्व है। इस बात का संतोष है कि देश की खातिर दादा बलिदानी हुए और उनका अंतिम संस्कार विधि-विधान से परिवार के लोग कर पाएंगे। मलखान सिंह की पोती सोनिया और मोनिका की शादी हो चुकी है। वह भी कहती हैं कि निधन का दुख है, लेकिन इस बात की भी तसल्ली है कि वह दादा के पार्थिव शरीर का परिवार के लोग अंतिम संस्कार करेंगे। मलखान सिंह का जन्म 18 जनवरी 1945 को हुआ था। वह पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके बलिदानी होने के बाद पत्नी शीला की शादी छोटे भाई चंद्रपाल सिंह के साथ करा दी गई थी। परिजनों का कहना है कि उन्हें कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिली। हालांकि नानौता थाना पुलिस का कहना है कि मलखान सिंह सेना के जवान थे।
विज्ञापन
लगातार चल रहा सर्च अभियान
वर्ष 2003 में अटल बिहारी वाजपेई सरकार के कार्यकाल में सेना ने यहां पर सर्च अभियान शुरू किया था। बताया जाता है कि इसी सर्च अभियान के दौरान मलखान सिंह समेत चार जवानों के पार्थिव शरीर मिले हैं। वर्ष 2019 में भी पांच जवानों के पार्थिव शरीर मिले थे।
विज्ञापन
यह बोले डॉक्टर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि जब तक शव के चारों तरफ बर्फ ढकी होती है, तब तक उसका कुछ नहीं बिगड़ता। बर्फ पिघलने के बाद शव सड़ने लगेगा। बर्फ में कितने साल तक शव रह सकता है, इसका कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।