{"_id":"66d778a02a016463ea0da234","slug":"a-leader-is-a-slave-of-the-people-not-of-power-iqra-hasan-saharanpur-news-c-30-1-smrt1052-130672-2024-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"सत्ता का नहीं जनता का गुलाम होता है नेता : इकरा हसन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सत्ता का नहीं जनता का गुलाम होता है नेता : इकरा हसन
Wed, 04 Sep 2024 02:29 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 04 Sep 2024 02:29 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। कैराना सांसद इकरा हसन ने कहा कि नेता सत्ता का नहीं, बल्कि जनता का गुलाम होता है। इसलिए उन्हें सबके लिए काम करना चाहिए। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए। मंगलवार को कैराना सांसद इकरा हसन किसी काम के लिए कलक्ट्रेट पहुंची थी।
इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब सत्ता में होते हैं तो सबके लिए कार्य करना चाहिए, लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री को लेकर कहा कि उनकी कार्यशैली को देखते नहीं लगता कि वह जनता के नेता हैं। 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया है। सभी को इंसाफ मिलना चाहिए।
मॉब लिंचिंग पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसी को भी इसका हक नहीं कि वह भीड़ का सहारा लेकर किसी को मार दे। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर पहले से ही गाइडलाइन बना रखी है। लेकिन अफसोस है कि उसका पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है। इस तरह के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को दोबारा इस पर संज्ञान लेना चाहिए। कलक्ट्रेट से पहले वह पुलिस लाइन में भी पहुंची थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब सत्ता में होते हैं तो सबके लिए कार्य करना चाहिए, लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री को लेकर कहा कि उनकी कार्यशैली को देखते नहीं लगता कि वह जनता के नेता हैं। 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया है। सभी को इंसाफ मिलना चाहिए।
विज्ञापन
मॉब लिंचिंग पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसी को भी इसका हक नहीं कि वह भीड़ का सहारा लेकर किसी को मार दे। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर पहले से ही गाइडलाइन बना रखी है। लेकिन अफसोस है कि उसका पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है। इस तरह के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को दोबारा इस पर संज्ञान लेना चाहिए। कलक्ट्रेट से पहले वह पुलिस लाइन में भी पहुंची थीं।
विज्ञापन