{"_id":"5c17f998bdec22571a17bd64","slug":"91545075096-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना गुरु के कैसे पढ़ाई करें विद्यार्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना गुरु के कैसे पढ़ाई करें विद्यार्थी
Updated Tue, 18 Dec 2018 01:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिना गुरु के कैसे पढ़ाई करें विद्यार्थी
सहारनपुर। नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों के स्वीकृत 30 पदों के सापेक्ष मात्र आठ ही शिक्षक कार्यरत हैं। खास बात यह है कि महत्वपूर्ण विषयों हिन्दी, गणित, अंग्रेजी, विज्ञान के ही शिक्षक नहीं हैं। वाणिज्य का कोई प्रवक्ता नहीं होने की वजह से पिछले कई साल से वाणिज्य में दाखिले तक नहीं हो रहे हैं। यह हाल केवल एक राजकीय विद्यालय का नहीं है, बल्कि जनपद के लगभग ज्यादातर राजकीय विद्यालयों की यही स्थिति है।
राजकीय इंटर कॉलेज नेहरू मार्केट में एलटी ग्रेड शिक्षकों के 22 पद स्वीकृत हैं, मगर वर्तमान में मात्र सात ही शिक्षक कार्यरत हैं। प्रवक्ता के आठ पद स्वीकृत हैं, मगर दो ही शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से एक फिजिक्स और दूसरे अंग्रेजी विषय के हैं। रसायन विज्ञान प्रवक्ता के दो पद स्वीकृत हैं, मगर एक भी कार्यरत नहीं है। गणित के प्रवक्ता का एक पद स्वीकृत है, मगर वह भी नहीं है। जीव विज्ञान, फिजिक्स और हिन्दी में भी एक-एक पद खाली है। शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए छह अस्थाई शिक्षकों को रखा गया है, जिनमें बायोलॉजी, हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, गणित और केमिस्ट्री के शिक्षक शामिल हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की बात करें तो दस पद स्वीकृत हैं, मगर मात्र पांच कार्यरत हैं, जिनमें से भी एक कर्मचारी को संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय और एक डीआईओएस कार्यालय में अटैच है। बताया गया है कि पिछले करीब पांच साल से वाणिज्य विषय का एक भी शिक्षक नहीं होने की वजह से वाणिज्य स्ट्रीम में कोई दाखिला नहीं हो रहा है।
प्रधानाचार्यों के पद भी चल रहे खाली
जनपद में कुल 50 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 17 इंटर कॉलेज और 33 हाई स्कूल हैं। 17 इंटर कॉलेजों में से मात्र एक कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं, जबकि 16 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य नहीं हैं। ऐसे में कार्यवाहकों से काम लिया जा रहा है। ऐसी ही स्थिति हाईस्कूलों की भी है। 33 हाईस्कूलों में से 20 में प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि 13 विद्यालयों में प्रधानाचार्य के आने का इंतजार है। इनके अलावा सभी 50 विद्यालयों में शिक्षकों के 50 फीसदी से अधिक पद खाली चल रहे हैं।
विज्ञापन
शिक्षक नहीं होने से घटी बच्चों की संख्या
महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने की वजह से विद्यार्थी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में दाखिला लेने से मुंह मोड़ रहे हैं। नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज ही की बात करें तो करीब पांच वर्ष पहले यहां करीब 850 विद्यार्थी पंजीकृत थे, मगर वाणिज्य विषय का कोई शिक्षक नहीं होने की वजह से पूरी स्ट्रीम ही खत्म हो गई, जिसकी वजह से 60 सीटें कम हो गईं। वर्तमान में मात्र 710 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
---
यह सच है कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। वाणिज्य विषय का शिक्षक नहीं होने से दाखिले भी नहीं हो रहे हैं, जिस वजह से छात्रों की संख्या में भी कमी आई है। उम्मीद है कि जनवरी 2019 में होने वाली 11 हजार शिक्षकों की भर्ती में कॉलेज के हिस्से में भी शिक्षक आएंगे। यदि में दस शिक्षक भी मिल गए तो व्यवस्था में सुधार होगा। -- महावीर सिंह, प्रधानाचार्य, जीआईसी, नेहरू मार्केट।
---
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के लिए शिक्षकों की भर्ती लंबे समय से नहीं हो रही है, जिस वजह से सहारनपुर नहीं, प्रदेश के अन्य जनपदों में भी शिक्षकों की कमी है। 29 जुलाई 2018 को ही शिक्षकों की भर्ती की परीक्षा हुई है, जिसका परिणाम 20 दिसंबर तक आने की उम्मीद है। नई भर्ती से सहारनपुर के राजकीय विद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी दूर होगी। -- डॉक्टर अरुण कुमार दुबे, डीआईओएस।
विज्ञापन
सहारनपुर। नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों के स्वीकृत 30 पदों के सापेक्ष मात्र आठ ही शिक्षक कार्यरत हैं। खास बात यह है कि महत्वपूर्ण विषयों हिन्दी, गणित, अंग्रेजी, विज्ञान के ही शिक्षक नहीं हैं। वाणिज्य का कोई प्रवक्ता नहीं होने की वजह से पिछले कई साल से वाणिज्य में दाखिले तक नहीं हो रहे हैं। यह हाल केवल एक राजकीय विद्यालय का नहीं है, बल्कि जनपद के लगभग ज्यादातर राजकीय विद्यालयों की यही स्थिति है।
राजकीय इंटर कॉलेज नेहरू मार्केट में एलटी ग्रेड शिक्षकों के 22 पद स्वीकृत हैं, मगर वर्तमान में मात्र सात ही शिक्षक कार्यरत हैं। प्रवक्ता के आठ पद स्वीकृत हैं, मगर दो ही शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से एक फिजिक्स और दूसरे अंग्रेजी विषय के हैं। रसायन विज्ञान प्रवक्ता के दो पद स्वीकृत हैं, मगर एक भी कार्यरत नहीं है। गणित के प्रवक्ता का एक पद स्वीकृत है, मगर वह भी नहीं है। जीव विज्ञान, फिजिक्स और हिन्दी में भी एक-एक पद खाली है। शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए छह अस्थाई शिक्षकों को रखा गया है, जिनमें बायोलॉजी, हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, गणित और केमिस्ट्री के शिक्षक शामिल हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की बात करें तो दस पद स्वीकृत हैं, मगर मात्र पांच कार्यरत हैं, जिनमें से भी एक कर्मचारी को संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय और एक डीआईओएस कार्यालय में अटैच है। बताया गया है कि पिछले करीब पांच साल से वाणिज्य विषय का एक भी शिक्षक नहीं होने की वजह से वाणिज्य स्ट्रीम में कोई दाखिला नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
प्रधानाचार्यों के पद भी चल रहे खाली
जनपद में कुल 50 राजकीय माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 17 इंटर कॉलेज और 33 हाई स्कूल हैं। 17 इंटर कॉलेजों में से मात्र एक कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं, जबकि 16 इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य नहीं हैं। ऐसे में कार्यवाहकों से काम लिया जा रहा है। ऐसी ही स्थिति हाईस्कूलों की भी है। 33 हाईस्कूलों में से 20 में प्रधानाचार्य कार्यरत हैं, जबकि 13 विद्यालयों में प्रधानाचार्य के आने का इंतजार है। इनके अलावा सभी 50 विद्यालयों में शिक्षकों के 50 फीसदी से अधिक पद खाली चल रहे हैं।
विज्ञापन
शिक्षक नहीं होने से घटी बच्चों की संख्या
महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने की वजह से विद्यार्थी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में दाखिला लेने से मुंह मोड़ रहे हैं। नेहरू मार्केट स्थित राजकीय इंटर कॉलेज ही की बात करें तो करीब पांच वर्ष पहले यहां करीब 850 विद्यार्थी पंजीकृत थे, मगर वाणिज्य विषय का कोई शिक्षक नहीं होने की वजह से पूरी स्ट्रीम ही खत्म हो गई, जिसकी वजह से 60 सीटें कम हो गईं। वर्तमान में मात्र 710 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
---
यह सच है कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी है। वाणिज्य विषय का शिक्षक नहीं होने से दाखिले भी नहीं हो रहे हैं, जिस वजह से छात्रों की संख्या में भी कमी आई है। उम्मीद है कि जनवरी 2019 में होने वाली 11 हजार शिक्षकों की भर्ती में कॉलेज के हिस्से में भी शिक्षक आएंगे। यदि में दस शिक्षक भी मिल गए तो व्यवस्था में सुधार होगा। -- महावीर सिंह, प्रधानाचार्य, जीआईसी, नेहरू मार्केट।
---
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के लिए शिक्षकों की भर्ती लंबे समय से नहीं हो रही है, जिस वजह से सहारनपुर नहीं, प्रदेश के अन्य जनपदों में भी शिक्षकों की कमी है। 29 जुलाई 2018 को ही शिक्षकों की भर्ती की परीक्षा हुई है, जिसका परिणाम 20 दिसंबर तक आने की उम्मीद है। नई भर्ती से सहारनपुर के राजकीय विद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी दूर होगी। -- डॉक्टर अरुण कुमार दुबे, डीआईओएस।