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घाड़ के 20 से ज्यादा गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
Updated Wed, 28 Jun 2017 12:39 AM IST
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घाड़ के 20 से ज्यादा गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
बेहट (सहारनपुर)। बरसात का मौसम शुरू हो गया है। इसी के साथ घाड़ इलाके के 20 से अधिक गांवों के लोगों को संभावित बाढ़ की चिंता सताने लगी है। बरसाती नदियों पर पुलों का निर्माण नहीं होने से बाढ़ आने के दौरान यहां के लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है। आजादी के बाद से न जाने कितनी सरकारें आई और चली गई, लेकिन किसी भी सरकार में घाड़ इलाके का कायाकल्प करने के लिए कोई ठोस कार्य योजना परवान नहीं चढ़ सकी।
बता दें कि सहारनपुर जनपद की बेहट तहसील के 122 गांव घाड़ इलाके के अंतर्गत आते हैं। भौगोलिक एवं आर्थिक दृष्टि से यह क्षेत्र अति पिछड़ा हुआ है। इस क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों ऐसे है, जो शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियों से घिरे हैं। बरसात के दिनों में नदियों में बाढ़ आने पर इन गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है। शाहपुर एवं हुसैन मलकपुर गांवों की बात करें, तो यह दोनों गांवों दोनों तरफ से बरसाती नदियों से घिरे है और तीसरी तरफ से पूर्वी यमुना नहर बह रही है। नदियों में बाढ़ आने पर ये गांवों टापू बन जाते हैं। नदियों पर पुल निर्माण की मांग को लेकर इन गांवों के लोग लोकसभा एवं विधान सभा चुनावों का बहिष्कार भी कर चुके है। पंचायतें और आंदोलनों की तो कोई गिनती ही नहीं, लेकिन आज तक उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया, केवल चुनाव के समय नेताओं ने कोरे आश्वासन यहां के लोगों को दिए।
मुर्तजापुर गांव मशकरा नदी के किनारे पर बसा है। बाढ़ आने पर इस गांवों के लोगों को आठ किमी का अतिरिक्त चक्कर काटकर बेहट आना पड़ता है, जबकि नदी से होकर गांव की दूरी मात्र 500 मीटर है। जसमोर, पठानपुरा, बाकरपुर, जैतपुर खुर्द, जैतपुर कलां, कोठड़ी ग्राम समूह, मदनपुरा, ताल्हापुर, नौरंगपुर आदि करीब 20 से अधिक गांवों नदियों से घिरे है, जिनका बाढ़ आने पर बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है। बच्चें तक भी स्कूल नहीं जा पाते। मवेशियों के चारा तक के लाले पड़ जाते हैं।
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बेहट (सहारनपुर)। बरसात का मौसम शुरू हो गया है। इसी के साथ घाड़ इलाके के 20 से अधिक गांवों के लोगों को संभावित बाढ़ की चिंता सताने लगी है। बरसाती नदियों पर पुलों का निर्माण नहीं होने से बाढ़ आने के दौरान यहां के लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है। आजादी के बाद से न जाने कितनी सरकारें आई और चली गई, लेकिन किसी भी सरकार में घाड़ इलाके का कायाकल्प करने के लिए कोई ठोस कार्य योजना परवान नहीं चढ़ सकी।
बता दें कि सहारनपुर जनपद की बेहट तहसील के 122 गांव घाड़ इलाके के अंतर्गत आते हैं। भौगोलिक एवं आर्थिक दृष्टि से यह क्षेत्र अति पिछड़ा हुआ है। इस क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों ऐसे है, जो शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियों से घिरे हैं। बरसात के दिनों में नदियों में बाढ़ आने पर इन गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है। शाहपुर एवं हुसैन मलकपुर गांवों की बात करें, तो यह दोनों गांवों दोनों तरफ से बरसाती नदियों से घिरे है और तीसरी तरफ से पूर्वी यमुना नहर बह रही है। नदियों में बाढ़ आने पर ये गांवों टापू बन जाते हैं। नदियों पर पुल निर्माण की मांग को लेकर इन गांवों के लोग लोकसभा एवं विधान सभा चुनावों का बहिष्कार भी कर चुके है। पंचायतें और आंदोलनों की तो कोई गिनती ही नहीं, लेकिन आज तक उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया, केवल चुनाव के समय नेताओं ने कोरे आश्वासन यहां के लोगों को दिए।
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मुर्तजापुर गांव मशकरा नदी के किनारे पर बसा है। बाढ़ आने पर इस गांवों के लोगों को आठ किमी का अतिरिक्त चक्कर काटकर बेहट आना पड़ता है, जबकि नदी से होकर गांव की दूरी मात्र 500 मीटर है। जसमोर, पठानपुरा, बाकरपुर, जैतपुर खुर्द, जैतपुर कलां, कोठड़ी ग्राम समूह, मदनपुरा, ताल्हापुर, नौरंगपुर आदि करीब 20 से अधिक गांवों नदियों से घिरे है, जिनका बाढ़ आने पर बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाता है। बच्चें तक भी स्कूल नहीं जा पाते। मवेशियों के चारा तक के लाले पड़ जाते हैं।
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