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एनजीटी की रोक के बावजूद जिले में धड़ल्ले से खनन शुरू
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:15 AM IST
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सहारनपुर। एनजीटी के आदेशों को सहारनपुर पुलिस एवं प्रशासन ने पूरी तरह से ताक पर रख दिया। अभी तक न तो खनन किए जाने और न ही खनन सामग्री के परिवहन किए जाने के कोई आदेश एनजीटी ने जारी किए हैं, लेकिन सहारनपुर पुलिस और प्रशासन ने अवैध खनन का खुला खेल शुरू करा दिया है। सवाल उठ रहा है कि जब खनन हो ही नहीं रहा तो परिवहन कहां से हो रहा है।
अवैध खनन के लिए सहारनपुर पहले से ही चर्चाओं में चल रहा है। यहां जितना वैध खनन होता है, उससे कई गुना अवैध खनन का कारोबार चल रहा है, लेकिन एनजीटी की सख्ती के बाद खनन और खनन सामग्री के परिवहन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। इससे कुछ माह तक जिले में खनन और खनन सामग्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रहा। सहारनपुर के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही के बेहट में चल रहे अवैध खनन पर छापे के बाद तो पुलिस और प्रशासनिक महकमों में खलबली मची रही और पूरी सख्ती रही। एनजीटी में भी अधिकारियों को तलब किया जाता रहा।
लेकिन अब चोरी, चुपके खनन की प्रक्रिया शुरू करा दी गई। शुरुआत की गई खनन सामग्री के लगे ढेरों से। किसी प्रशासनिक अधिकारी के इशारे के बाद खनन सामग्री के ढेरों को सरकारी महकमों में कार्यों के लिए परिवहन शुरू करा दिया गया। लेकिन, हद तो तब हो गई कि खनन सामग्री के लगे ढेरों से सैकड़ों ट्रक भरकर चले गए और ढेर उतना ही बना रहा। जिसका कहीं लिखित में कोई हिसाब नहीं रहा। जिले में दो सप्ताह से शुरू हुए इस अवैध खनन से राजस्व को करोड़ों रुपये की चपत लगा दी गई। जबकि एनजीटी अथवा सरकार ने न तो अभी खनन की ही अनुमति दी है और न ही कहीं पर भी परिवहन की अनुमति जारी की।
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खनन के प्रमुख स्थान
सहारनपुर में सरसावा, चिलकाना, नकुड़, बेहट खनन के बड़े केंद्र हैं। यूपी के साथ-साथ इन क्षेत्रों में हरियाणा और उत्तराखंड राज्य की सीमाएं भी लगती हैं। दूसरे राज्यों की आड़ में यूपी, हरियाणा और उत्तराखंड तीनों ही राज्यों में जमकर अवैध खनन का कारोबार चल रहा है।
डीएम ने अवैध खनन पर साधी चुप्पी
जिलाधिकारी पीके पांडेय ने खनन और खनन सामग्री के परिवहन के बारे में पूछे जाने पर अपनी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।
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अवैध खनन के लिए सहारनपुर पहले से ही चर्चाओं में चल रहा है। यहां जितना वैध खनन होता है, उससे कई गुना अवैध खनन का कारोबार चल रहा है, लेकिन एनजीटी की सख्ती के बाद खनन और खनन सामग्री के परिवहन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। इससे कुछ माह तक जिले में खनन और खनन सामग्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रहा। सहारनपुर के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही के बेहट में चल रहे अवैध खनन पर छापे के बाद तो पुलिस और प्रशासनिक महकमों में खलबली मची रही और पूरी सख्ती रही। एनजीटी में भी अधिकारियों को तलब किया जाता रहा।
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लेकिन अब चोरी, चुपके खनन की प्रक्रिया शुरू करा दी गई। शुरुआत की गई खनन सामग्री के लगे ढेरों से। किसी प्रशासनिक अधिकारी के इशारे के बाद खनन सामग्री के ढेरों को सरकारी महकमों में कार्यों के लिए परिवहन शुरू करा दिया गया। लेकिन, हद तो तब हो गई कि खनन सामग्री के लगे ढेरों से सैकड़ों ट्रक भरकर चले गए और ढेर उतना ही बना रहा। जिसका कहीं लिखित में कोई हिसाब नहीं रहा। जिले में दो सप्ताह से शुरू हुए इस अवैध खनन से राजस्व को करोड़ों रुपये की चपत लगा दी गई। जबकि एनजीटी अथवा सरकार ने न तो अभी खनन की ही अनुमति दी है और न ही कहीं पर भी परिवहन की अनुमति जारी की।
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खनन के प्रमुख स्थान
सहारनपुर में सरसावा, चिलकाना, नकुड़, बेहट खनन के बड़े केंद्र हैं। यूपी के साथ-साथ इन क्षेत्रों में हरियाणा और उत्तराखंड राज्य की सीमाएं भी लगती हैं। दूसरे राज्यों की आड़ में यूपी, हरियाणा और उत्तराखंड तीनों ही राज्यों में जमकर अवैध खनन का कारोबार चल रहा है।
डीएम ने अवैध खनन पर साधी चुप्पी
जिलाधिकारी पीके पांडेय ने खनन और खनन सामग्री के परिवहन के बारे में पूछे जाने पर अपनी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।