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भवा एजेंडे को धार देने वाले स्कूली पाठयक्रम पर देवबंदी उलमा का ऐतराज
Updated Mon, 30 Apr 2018 12:24 AM IST
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चुनिंदा लोगों को शामिल करना इतिहास से छेड़छाड़ : उलमा
देवबंद (सहारनपुर)। बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा छह से आठ तक जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय जैसे महापुरुषों तथा हिंदुत्व के प्रतीक संत बाबा गोरखनाथ को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर देवबंदी उलमा ने ऐतराज जताया है। उलमा का कहना है कि ऐसे चुनिंदा लोगों को पाठ्यक्रम में शामिल करना इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। इससे भावी पीढ़ी असल इतिहास से अंजान रहेगी।
रविवार को इस मुद्दे पर दारुल उलूम निस्वा के मोहतमिम मौलाना अब्दुल लतीफ का कहना है कि मुल्क को आजाद कराने के लिए सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ मौलाना फजले हक खैराबादी ने आवाज बुलंद की थी। अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे बड़ा आंदोलन मौलाना फजले हक और उसके बाद देवबंदी उलमा और हमारे अकाबिरों ने शुरू किया था। इसलिए उन सबके नाम लाए जाएं ताकि भावी पीढ़ी को इतिहास की सही जानकारी हो सके। उन्होंने कहा कि अगर सिर्फ चुनिंदा लोगों को पाठ्यक्रम में शामिल करते हैं तो यह आने वाले समय में खतरनाक साबित होगा और हमारे बच्चे इतिहास से भ्रमित होंगे। मौलाना अब्दुल लतीफ ने कहा कि जिन्होंने हिंदुत्व पर काम किया सिर्फ उनका नाम लाना सरासर गलत है। इतिहास में इतिहास होना चाहिए जबकि सच्चाई यह है कि आरएसएस और उसके हिमायती संगठन अग्रेजों के गुलाम थे जिनका मुल्क की आजादी में कोई किरदार नहीं है।
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देवबंद (सहारनपुर)। बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा छह से आठ तक जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय जैसे महापुरुषों तथा हिंदुत्व के प्रतीक संत बाबा गोरखनाथ को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर देवबंदी उलमा ने ऐतराज जताया है। उलमा का कहना है कि ऐसे चुनिंदा लोगों को पाठ्यक्रम में शामिल करना इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। इससे भावी पीढ़ी असल इतिहास से अंजान रहेगी।
रविवार को इस मुद्दे पर दारुल उलूम निस्वा के मोहतमिम मौलाना अब्दुल लतीफ का कहना है कि मुल्क को आजाद कराने के लिए सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ मौलाना फजले हक खैराबादी ने आवाज बुलंद की थी। अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे बड़ा आंदोलन मौलाना फजले हक और उसके बाद देवबंदी उलमा और हमारे अकाबिरों ने शुरू किया था। इसलिए उन सबके नाम लाए जाएं ताकि भावी पीढ़ी को इतिहास की सही जानकारी हो सके। उन्होंने कहा कि अगर सिर्फ चुनिंदा लोगों को पाठ्यक्रम में शामिल करते हैं तो यह आने वाले समय में खतरनाक साबित होगा और हमारे बच्चे इतिहास से भ्रमित होंगे। मौलाना अब्दुल लतीफ ने कहा कि जिन्होंने हिंदुत्व पर काम किया सिर्फ उनका नाम लाना सरासर गलत है। इतिहास में इतिहास होना चाहिए जबकि सच्चाई यह है कि आरएसएस और उसके हिमायती संगठन अग्रेजों के गुलाम थे जिनका मुल्क की आजादी में कोई किरदार नहीं है।
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