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मुहर्रम की मजलिस
Updated Wed, 19 Sep 2018 12:57 AM IST
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गागलहेड़ी। पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत व करबला मैदान में शहीदों की याद में मजलिस हुई। इसमें इमाम हुसैन की याद में कलाम पढ़े जिससे उनके चाहने वालों की आंखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
सोमवार रात्रि हरोड़ा अहतमाल में डा. शौकत अली के आवास पर मोहर्रम पर मजलिस हुई। इसमें राशिद अली, राव अबरार, इमरान, निसार, हाफिज मुर्तजा ने बयान करते हुए बताया कि करबला में शहीद कर दिए गए थे इमाम हुसैन। इस्लामिक नए साल की दस तारीख को नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ मजहब-ए-इस्लाम को बचाने, हक और इंसाफ को जिंदा रखने के लिए शहीद हो गए थे। मोहर्रम पर पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे (नाती) हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद ताजा हो जाती है। यह जंग बताती है कि जुल्म के आगे कभी नहीं झुकना चाहिए, चाहे इसके लिए सिर ही क्यों न कट जाए। सच्चाई के लिए बड़े से बड़े जालिम शासक के सामने भी खड़ा हो जाना चाहिए। इकरार, राव सुहैल, जुनैद, इकबाल, शाहिद, इकबाल, मुबारक अली, जीशान, मुजफ्फर अली, आलमगीर, नासिर, तबरेज, गुलजार आदि मौजूद रहे।
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सोमवार रात्रि हरोड़ा अहतमाल में डा. शौकत अली के आवास पर मोहर्रम पर मजलिस हुई। इसमें राशिद अली, राव अबरार, इमरान, निसार, हाफिज मुर्तजा ने बयान करते हुए बताया कि करबला में शहीद कर दिए गए थे इमाम हुसैन। इस्लामिक नए साल की दस तारीख को नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ मजहब-ए-इस्लाम को बचाने, हक और इंसाफ को जिंदा रखने के लिए शहीद हो गए थे। मोहर्रम पर पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे (नाती) हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद ताजा हो जाती है। यह जंग बताती है कि जुल्म के आगे कभी नहीं झुकना चाहिए, चाहे इसके लिए सिर ही क्यों न कट जाए। सच्चाई के लिए बड़े से बड़े जालिम शासक के सामने भी खड़ा हो जाना चाहिए। इकरार, राव सुहैल, जुनैद, इकबाल, शाहिद, इकबाल, मुबारक अली, जीशान, मुजफ्फर अली, आलमगीर, नासिर, तबरेज, गुलजार आदि मौजूद रहे।
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