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मुशायरा स्टेज संचालन के शंहशाह थे जलालपुरी: देवबंदी
Updated Wed, 03 Jan 2018 12:37 AM IST
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सहारनपुर। उर्दू अकादमी के पूर्व चेयरमैन व शायर डा. नवाब देवबंदी ने कहा कि अनवर जलालपुरी के निधन से उनका व्यक्तिगत नुकसान हुआ है। अनवर जलालपुरी मुशायरा स्टेज के शहंशाह थे। उनके बिना कोई मुशायरा कार्यक्रम परवान नहीं चढ़ता था। एक बेहतर इंसान होने के साथ उनमें तमाम खूबियां भरी थी।
मंगलवार को शायर अनवर जलालपुरी के निधन पर देवबंद निवासी शायर व उर्दु अकादमी के पूर्व चेयरमैन डा. नवाज देवबंदी ने गहरा दुुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि अनवर जलालपुरी 24 कैरेट सोने के जैसे थे। मुशायरा स्टेज का संचालन के वह शहंशाह थे। उनमें आवाज, लहजा, सलीका और शहूर कूट-कूटकर भरा था। उन्होंने गीता का अनुवाद उर्दु में किया और कुरआन पर भी काम किया। पूरी दुनिया में अनवर जलालपुरी जाने जाते थे और पश्चिमी में यूपी में उनकी काफी लोकप्रियता थी। उनके निधन से सर्व समाज के लोग हताश हैं। उन्होंने ओमान के मस्कट में 22 व 23 दिसंबर की रात अंतिम कार्यक्रम में भाग लिया था। उन्हें आज भी उस दिन की अनवर जलालपुरी की खनकती आवाज, चमकता लहजा, गुफ्तगु याद है। वह कार्यक्रम में अपना जादू बिखेर रहे थे। डा. नवाब देवबंदी ने कहा कि अनवर जलालपुरी से उनका 40 साल पूरा संबंध था। अनवर जलालपुरी के निधन से मेरा व्यक्तिगत नुकसान हुआ है। बता दें कि अनवर जलालपुरी का सहारनपुर से काफी पुराना नाता था। वह कई बार सहारनपुर हुए मुशायरों में शामिल हुए हैं। सहारनपुर के लोगों से उनके अच्छे संबंध थे। उनके निधन से सहारनपुर के लोग भी खुद को गमजदा महसूस कर रहे हैं। पार्षद व सपा नेता मंसूर बदर का कहना है कि अनवार जलालपुरी से उनकी कई बार मुलाकात हुई। वह एक बेहतर शायर होने के साथ अच्छे इंसान थे। उनके निधन से हुई क्षति को कभी पूरा नहीं किया जा सकता है।
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मंगलवार को शायर अनवर जलालपुरी के निधन पर देवबंद निवासी शायर व उर्दु अकादमी के पूर्व चेयरमैन डा. नवाज देवबंदी ने गहरा दुुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि अनवर जलालपुरी 24 कैरेट सोने के जैसे थे। मुशायरा स्टेज का संचालन के वह शहंशाह थे। उनमें आवाज, लहजा, सलीका और शहूर कूट-कूटकर भरा था। उन्होंने गीता का अनुवाद उर्दु में किया और कुरआन पर भी काम किया। पूरी दुनिया में अनवर जलालपुरी जाने जाते थे और पश्चिमी में यूपी में उनकी काफी लोकप्रियता थी। उनके निधन से सर्व समाज के लोग हताश हैं। उन्होंने ओमान के मस्कट में 22 व 23 दिसंबर की रात अंतिम कार्यक्रम में भाग लिया था। उन्हें आज भी उस दिन की अनवर जलालपुरी की खनकती आवाज, चमकता लहजा, गुफ्तगु याद है। वह कार्यक्रम में अपना जादू बिखेर रहे थे। डा. नवाब देवबंदी ने कहा कि अनवर जलालपुरी से उनका 40 साल पूरा संबंध था। अनवर जलालपुरी के निधन से मेरा व्यक्तिगत नुकसान हुआ है। बता दें कि अनवर जलालपुरी का सहारनपुर से काफी पुराना नाता था। वह कई बार सहारनपुर हुए मुशायरों में शामिल हुए हैं। सहारनपुर के लोगों से उनके अच्छे संबंध थे। उनके निधन से सहारनपुर के लोग भी खुद को गमजदा महसूस कर रहे हैं। पार्षद व सपा नेता मंसूर बदर का कहना है कि अनवार जलालपुरी से उनकी कई बार मुलाकात हुई। वह एक बेहतर शायर होने के साथ अच्छे इंसान थे। उनके निधन से हुई क्षति को कभी पूरा नहीं किया जा सकता है।
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