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जुब्बा शरीफ की जियारत को उमडे़ जायरीन
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गंगोह (सहारनपुर)। सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल कुद्दूस के 495वें उर्स में शुक्रवार को परंपरागत रूप से जुलूस जुब्बा शरीफ निकाला गया। जुलूस में हजरत कुतबे आलम द्वारा 40 वर्षों तक जेबतन फरमाई गई गुदड़ी, दस्तार और तस्बीह की जियारत कराई गई। बड़ी संख्या में देश के कोने-कोने से आए जायरीनों ने जियारत कर मन्नतें मांगीं। मुल्क के अमनों अमान और आतंक के खात्मे की दुआ भी कराई गई। शनिवार को हजरत कुतबे आलम की दरगाह में हजरत के मुबारक हाथों द्वारा लिखी गई कुरान मजीद एवं अन्य संग्रहित तबर्रुकात की जियारत कराई जाएगी।
आस्तान ए कुद्दूसिया से सज्जादानशीं शाह महताब आलम की अगुवाई में हक अल्लाह-हक अल्लाह के बुलंद नारों के साथ आरंभ किए गए जुलूस में कलियर शरीफ के सज्जादा नशीं शाह मंसूर एजाज हजरत कुतबे आलम द्वारा 40 वर्षों तक जेबतन फरमाई गई गुदड़ी, दस्तार और तस्बीह को धारण कर वाहन पर विराजमान थे। रास्ते में शाहअता मंजिल पर सज्जादानशीं हकीम जफर कुद्दूसी और नायब सज्जादानशीं आसिम कुद्दूसी के अलावा चेयरमैन प्रतिनिधि काजी नोमान मसूद ने उनका स्वागत करते हुए नजराना भेंट किया। सज्जादानशीं शाह मंसूर एजाज ने उन्हें तबर्रुक प्रदान किया। देश के कोने-कोने से आए जायरीनों, सूफी-संतों और दरवेशों के अल्लाह की बुलंद आवाजों के साथ जुलूस हजरत शेख अबु सईद की दरगाह तक पहुंचा। सज्जादानशीं मोहम्मद जाफिर सईद कुद्दूसी, साबरी सईद और मोहम्मद नजम सईद ने उनका स्वागत किया। वहां से जैसे ही शाह मंसूर एजाज की नजर हजरत कुतबे आलम के मजार के गुंबद पर पड़ी तो उन्होंने दुआ के लिए हाथ उठा दिए। मुल्क के अमनो अमान, खुशहाली और आतंक से मुक्ति की दुआ की गई। इसके बाद जुलूस वापस आस्ताने कुद्दूसिया रवाना हो गया। जुब्बा शरीफ के दीदार को बड़ी संख्या में जायरीन सड़कों पर उमड़ पडे़। जुलूस में पप्पू उर्फ शादाब मियां, नायब सज्जादा मुदस्सिर मियां, रदौली शरीफ के सज्जादानशीं नैय्यर मियां, रजबपुर के राशिद फरीदी, पानीपत के सूफी निसार उस्मानी, थानेसर के हजरत तारिक काकी, कलियर शरीफ के शाह अली मियां, अंबेहटा पीर के शाह मसरूर साबरी, शाह मख्दूम मियां, हाफिज शाहिद मियां, पहलवान राजू मियां, अली एजाज, सुहैल, कासिफ मियां कलियर शरीफ, अयाजउर्रहमान, हरजीत सिंह अमृतसर, इशरत हुसैन मुरादाबादी, शाह बहजाद साबरी, मुद्दसर मियां, शाह मख्दूम कुद्दूसी, सलीम फरीदी, खालिक मियां, राशिद एडवोकेट, कलीम फरीदी, राजा भैया, जावेद इकबाल, ख्वाजा सुहैल, अथहर फरीदी, राशिद एडवोकेट, आसिफ कुद्दूसी, सूफी बिलाल शाह, सूफी कामिल, गुलाम भीक, सूफी लालशाह, मुस्तफा आदि शामिल रहे।
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आस्तान ए कुद्दूसिया से सज्जादानशीं शाह महताब आलम की अगुवाई में हक अल्लाह-हक अल्लाह के बुलंद नारों के साथ आरंभ किए गए जुलूस में कलियर शरीफ के सज्जादा नशीं शाह मंसूर एजाज हजरत कुतबे आलम द्वारा 40 वर्षों तक जेबतन फरमाई गई गुदड़ी, दस्तार और तस्बीह को धारण कर वाहन पर विराजमान थे। रास्ते में शाहअता मंजिल पर सज्जादानशीं हकीम जफर कुद्दूसी और नायब सज्जादानशीं आसिम कुद्दूसी के अलावा चेयरमैन प्रतिनिधि काजी नोमान मसूद ने उनका स्वागत करते हुए नजराना भेंट किया। सज्जादानशीं शाह मंसूर एजाज ने उन्हें तबर्रुक प्रदान किया। देश के कोने-कोने से आए जायरीनों, सूफी-संतों और दरवेशों के अल्लाह की बुलंद आवाजों के साथ जुलूस हजरत शेख अबु सईद की दरगाह तक पहुंचा। सज्जादानशीं मोहम्मद जाफिर सईद कुद्दूसी, साबरी सईद और मोहम्मद नजम सईद ने उनका स्वागत किया। वहां से जैसे ही शाह मंसूर एजाज की नजर हजरत कुतबे आलम के मजार के गुंबद पर पड़ी तो उन्होंने दुआ के लिए हाथ उठा दिए। मुल्क के अमनो अमान, खुशहाली और आतंक से मुक्ति की दुआ की गई। इसके बाद जुलूस वापस आस्ताने कुद्दूसिया रवाना हो गया। जुब्बा शरीफ के दीदार को बड़ी संख्या में जायरीन सड़कों पर उमड़ पडे़। जुलूस में पप्पू उर्फ शादाब मियां, नायब सज्जादा मुदस्सिर मियां, रदौली शरीफ के सज्जादानशीं नैय्यर मियां, रजबपुर के राशिद फरीदी, पानीपत के सूफी निसार उस्मानी, थानेसर के हजरत तारिक काकी, कलियर शरीफ के शाह अली मियां, अंबेहटा पीर के शाह मसरूर साबरी, शाह मख्दूम मियां, हाफिज शाहिद मियां, पहलवान राजू मियां, अली एजाज, सुहैल, कासिफ मियां कलियर शरीफ, अयाजउर्रहमान, हरजीत सिंह अमृतसर, इशरत हुसैन मुरादाबादी, शाह बहजाद साबरी, मुद्दसर मियां, शाह मख्दूम कुद्दूसी, सलीम फरीदी, खालिक मियां, राशिद एडवोकेट, कलीम फरीदी, राजा भैया, जावेद इकबाल, ख्वाजा सुहैल, अथहर फरीदी, राशिद एडवोकेट, आसिफ कुद्दूसी, सूफी बिलाल शाह, सूफी कामिल, गुलाम भीक, सूफी लालशाह, मुस्तफा आदि शामिल रहे।
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