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शिकायत पर कार्रवाई होती तो बच सकती थी लोगों की जान
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सहारनपुर। गांव उमाही में शराब का कहर यूं ही नहीं बरपा, उसके लिए पुलिस प्रशासन की लापरवाही भी जिम्मेदार है। गांव वालों की मानें, तो पूर्व में कई बार इसकी शिकायत की गई थी कि गांव में पिन्टू अवैध रूप से लाकर शराब बेचता है। बावजूद इसके पिन्टू के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, जिसका परिणाम शुक्रवार को मौत के कहर के रूप में सामने आ गया।
ग्रामीणों ने कई बार पुलिस प्रशासन को गांव में अवैध शराब की बिक्री होने की शिकायत की और बताया कि यह किसी भी दिन बड़ी घटना का कारण बन सकती है, लेकिन पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की। कई लोगों को अवैध शराब के सेवन से जान से हाथ धोना पड़ा।
नागल क्षेत्र के गांव उमाही में अवैध शराब पीने के पांच लोगों की मौत हो गई। इनमें सभी मजदूर थे। उन्होंने बृहस्पतिवार की रात को शराब पिया, जिनकी तबियत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। उनमें से अधिकांश की मौत वहीं पर हो गई, जबकि एक की मौत बराड़ा स्थित हॉयर सेंटर ले जाते समय हुई।
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मृतक इमरान के भाई सुलेमान ने बताया कि उन्होंने कई बार पुलिस प्रशासन से गांव में अवैध शराब बिकने की शिकायत की थी, लेकिन मामला जस का तस रहा। यदि पुलिस अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती तो आज यह दिन देखना ना पड़ता। गांव के ही लाल सिंह का कहना है कि ग्रामीण काफी समय से गांव में अवैध शराब की बिक्री की बात को अधिकारियों के सामने रख चुके थे। प्रशासन की संवेदनहीनता के चलते अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुुलेखचंद और धनपाल ने बताया कि महिलाएं गांव में शराब बिकने की शिकायत लंबे समय से करती रही हैं। इसके बावजूद पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसका नतीजा आज भुगताना पड़ा है। उनका कहना कि यदि शराब की अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती तो इस घटना से बचा जा सकता था।
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ग्रामीणों ने कई बार पुलिस प्रशासन को गांव में अवैध शराब की बिक्री होने की शिकायत की और बताया कि यह किसी भी दिन बड़ी घटना का कारण बन सकती है, लेकिन पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की। कई लोगों को अवैध शराब के सेवन से जान से हाथ धोना पड़ा।
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नागल क्षेत्र के गांव उमाही में अवैध शराब पीने के पांच लोगों की मौत हो गई। इनमें सभी मजदूर थे। उन्होंने बृहस्पतिवार की रात को शराब पिया, जिनकी तबियत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। उनमें से अधिकांश की मौत वहीं पर हो गई, जबकि एक की मौत बराड़ा स्थित हॉयर सेंटर ले जाते समय हुई।
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मृतक इमरान के भाई सुलेमान ने बताया कि उन्होंने कई बार पुलिस प्रशासन से गांव में अवैध शराब बिकने की शिकायत की थी, लेकिन मामला जस का तस रहा। यदि पुलिस अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती तो आज यह दिन देखना ना पड़ता। गांव के ही लाल सिंह का कहना है कि ग्रामीण काफी समय से गांव में अवैध शराब की बिक्री की बात को अधिकारियों के सामने रख चुके थे। प्रशासन की संवेदनहीनता के चलते अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुुलेखचंद और धनपाल ने बताया कि महिलाएं गांव में शराब बिकने की शिकायत लंबे समय से करती रही हैं। इसके बावजूद पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसका नतीजा आज भुगताना पड़ा है। उनका कहना कि यदि शराब की अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती तो इस घटना से बचा जा सकता था।