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रोजा बुरे कामों से बचने और नेक काम करने का माध्यम

Fri, 24 May 2019 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 24 May 2019 12:24 AM IST
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रोजा बुरे कामों से बचने और नेक काम करने का माध्यम
सहारनपुर। जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम कारी इसहाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों की शंकाओं का समाधान किया। कारी इसहाक गोरा ने कहा कि रोजा बुरे कामों से बचने और नेक काम करने का माध्यम है।
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सवाल:- कैलाशपुर निवासी दाऊद ने पूछा कि उनकी पत्नी पांच माह की गर्भवती है। रोजे में उनको बहुत कमजोरी महसूस हो रही है। उठते-बैठते चक्कर आते हैं। डाक्टर ने कहा कि रोजा रखना बच्चे और उनकी पत्नी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।
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जवाब:- शरीयत में आया है यदि कोई महिला गर्भवती है और रोजे में बच्चे को या खुद की जान को खतरा है तो उसके गुंजाइश है कि वह रोजाना न रखे।
सवाल:- गांव पठेड़ निवासी अखलाक ने पूछा कि उनके भाई मस्जिद में पूरे महीने के ऐतेकाफ में बैठे हैं। उस मस्जिद में नहाने का कोई खास इंतजाम नहीं है। इन दिनों मौसम काफी गर्म है। क्या वह मस्जिद से बाहर नहाने जा सकते हैं। इससे ऐतेकाफ टूटेगा तो नहीं।
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जवाब:- शरीयत के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ऐतेकाफ में बैठा है और वह सिर्फ ठंडक की नियत से नहाने के लिए मस्जिद से बाहर जाता आया तो उसके लिए जायज नहीं है।
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