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भाजपा के बयान, निशाने पर इमरान पर जीते फजलुर्रहमान

Fri, 24 May 2019 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 24 May 2019 12:24 AM IST
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भाजपा के बयान, निशाने पर इमरान पर जीते फजलुर्रहमान
सहारनपुर। भाजपा ने सहारनपुर लोकसभा सीट पर 2014 जैसा माहौल तैयार करने का प्रयास किया था। मकसद था मुस्लिम मतों में बिखराव पैदा करना। उसके लिए लक्ष्य बनाया गया था कांग्रेस को चुनावी मुकाबले में लाना। ताकि दो मुस्लिम प्रत्याशियों के बीच मुस्लिम मतों में ज्यादा से ज्यादा बंटवारा हो जाए, लेकिन भाजपा नेताओं के बयानों का असर उल्टा ही हो गया, जिसका फायदा सीधे तौर पर बसपा (गठबंधन) को हुआ।
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दरअसल, सहारनपुर लोकसभा सीट पर कुल मतदाता 17,36,881 हैं। इसमेें जातिगत आंकड़े पर गौर किया जाए, तो करीब साढ़े छह लाख मुस्लिम और साढ़े तीन लाख अनुसूचित जाति वर्ग के वोटर बताए जाते हैं। इस लिहाज से अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं की अनुमानित संख्या करीब 10 लाख होती है। भाजपा को इस आंकड़े में अपनी जीत का गणित फिट करना था। वहीं, गठबंधन से बसपा के टिकट पर हाजी फजलुर्रहमान को प्रत्याशी बनाया गया, तो कांग्रेस ने कद्दावर नेता इमरान मसूद को उतार दिया। भाजपा ने दो मुस्लिम प्रत्याशियों के बीच से अपना चुनाव बनाने के लिए व्यूह रचना की, जिसमें भाजपा नेताओं ने इमरान मसूद को निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सहारनपुर में चुनाव जनसभाओं के दौरान तमाम राजनीति बयान दिए, लेकिन इमरान मसूद को निशाने पर रखना नहीं भूले। 2014 में इमरान मसूद के बोटी -बोटी वाले बयान की याद भी दिलाई गई, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आतंकी मसूद अजहर का कनेक्शन जोड़ते हुए कहा था कि यहां मसूद अजहर का दामाद है, जो उसी की भाषा बोलता है।
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भाजपा का प्रयास था कि चुनावी मुकाबले में इमरान मसूद को लाएं, तो मुस्लिम मतों में बंटवारा हो जाएगा, लेकिन ऐसा हो न सका। बल्कि हुआ इसके विपरीत। क्योंकि गठबंधन की तरफ से बसपा, सपा और रालोद नेता भी जनसभाओं के दौरान यह बात मतदाताओं के दिलो-दिमाग पर बैठाने में लगे रहे कि भाजपा जानबूझकर इमरान मसूद को चुनावी मुकाबले में लाना चाहती है, ताकि मुस्लिम मतों में बंटवारा हो जाए।
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निगम चुनाव की हार की सहानुभूति
गठबंधन से बसपा प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान सहारनपुर नगर निगम का चुनाव भी लड़े थे। उसमें भाजपा के संजीव वालिया बहुत कम अंतर से जीते थे, तो फजलुर्रहमान दूसरे नंबर पर रहे थे। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी शशि वालिया तीसरे नंबर पर थे, जिनके लिए कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने काफी मेहनत की थी। उस चुनाव में बहुत कम अंतर से फजलुर्रहमान की हार का संदेश भी मुस्लिम मतदाताओं में पहुंचाया गया था। इस बात को भी गठबंधन की सभाओं में कहा जाता था। साथ ही यह भी बताया जाता था कि कांग्रेस प्रत्याशी तो भाजपा की बी टीम है, जो खुद को मजबूत बताकर भाजपा को चुनाव जिताना चाहते हैं।

बसपा सुप्रीमो की अपील भी हुई कामयाब
देवबंद में सात अप्रैल को गठबंधन की पहली चुनावी जनसभा हुई थी, जिसमें बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने लोगों को संबोधित किया था। वहीं, बसपा सुप्रीमो के भाषण का फोकस मुस्लिम और अनुसूचित जाति के वोटरों पर रहा था। यहां तक कि बसपा सुप्रीमो ने मुस्लिमों से अपील की थी कि अपना वोट बंटने मत देना, बल्कि गठबंधन के प्रत्याशी को ही वोट देना। अब जो चुनाव परिणाम सामने आया है, उससे स्पष्ट है कि जिस तरह से मुस्लिम मतदाताओं ने 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में एकतरफा वोटिंग की थी, उसी ट्रेंड में बसपा प्रत्याशी को वोट मिले हैं।
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