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अमेरिका इस्लाम और मुस्लिम विरोधी, पहले भी कई बार दिए सबूत: उलमा
Updated Tue, 17 Jul 2018 12:44 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। अमेरिका में मुस्लिम बच्चों को स्विमिंग पूल से भगाने और स्कार्फ से सिर ढंकने के कारण मुस्लिम महिला के नस्लीय भेदभाव का शिकार होने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि अमेरिका इससे पहले भी इस्लाम और मुस्लिम विरोधी होने का सबूत दे चुका है।
दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी का कहना है कि अमेरिका लगातार मुस्लिम विरोधी कार्य कर रहा है। जिससे साफ है कि उसकी नीति मुसलमान और इस्लाम विरोधी है। इससे पूर्व भी अमेरिका में मुसलमानों को निशाना बनाया गया और उन पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई। इतना ही नहीं कई अन्य देशों में भी मुसलमानों को तरह तरह से परेशान किया जा रहा है जो संयुक्त राष्ट्र संघ के नियमों के विरुद्ध है। इसलिए यूएनओ को चाहिए कि वो इन सभी मामलों का संज्ञान ले और कार्रवाई करे। शिक्षा प्रभारी मौलाना रहमतुल्ला कासमी का कहना है कि अमेरिका में मुसलमानों के साथ जिस तरह की शर्मनाक हरकतें की जा रही हैं उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। कभी पहनावे को लेकर तो कभी दाढ़ी रखने को लेकर अमेरिका में मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। अब मुस्लिम बच्चों को स्विमिंग पूल से भगाना और मुस्लिम महिला के साथ नस्लीय भेदभाव अपनाने की घटना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने यूएनओ और भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी का कहना है कि अमेरिका लगातार मुस्लिम विरोधी कार्य कर रहा है। जिससे साफ है कि उसकी नीति मुसलमान और इस्लाम विरोधी है। इससे पूर्व भी अमेरिका में मुसलमानों को निशाना बनाया गया और उन पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई। इतना ही नहीं कई अन्य देशों में भी मुसलमानों को तरह तरह से परेशान किया जा रहा है जो संयुक्त राष्ट्र संघ के नियमों के विरुद्ध है। इसलिए यूएनओ को चाहिए कि वो इन सभी मामलों का संज्ञान ले और कार्रवाई करे। शिक्षा प्रभारी मौलाना रहमतुल्ला कासमी का कहना है कि अमेरिका में मुसलमानों के साथ जिस तरह की शर्मनाक हरकतें की जा रही हैं उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। कभी पहनावे को लेकर तो कभी दाढ़ी रखने को लेकर अमेरिका में मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। अब मुस्लिम बच्चों को स्विमिंग पूल से भगाना और मुस्लिम महिला के साथ नस्लीय भेदभाव अपनाने की घटना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने यूएनओ और भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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