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टीबी 211 नए मरीज सामने आने से हड़कंप
Updated Sat, 24 Mar 2018 12:11 AM IST
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सहारनपुर। सरकार ने देश को वर्ष 2025 तक टीबी से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। टीबी के जीवाणु को पूरी तरह खत्म करने के लिए सरकार डोर टू डोर मरीजों को चिह्नित कर रही है। जिससे टीबी को पूरी तरह खत्म किया जा सके। पिछले दिनों चले अभियान में करीब पौने चार लाख लोगों का सर्वे किया गया, जिसमें 211 नए मरीज टीबी के सामने आए हैं, जो चौंकाने वाला आंकड़ा है।
जनपद की कुल आबादी करीब 38 लाख है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने अपने चिकित्सकों के साथ ही आशाओं, आंगनबाड़ी कर्मचारियों आदि की मदद से सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान जनपद में चलाया। टीमों ने कुल तीन लाख 82 हजार 500 लोगों पर अपना सर्वे किया। इस अभियान में टीबी के 211 नए मरीज सामने आए। जिनका उपचार भी शुरू कर दिया गया है। उधर, निजी चिकित्सकों से सहयोग न मिलने की वजह से विभाग के पास जनपद में टीबी के मरीजों का सही आंकड़ा नहीं है। निजी चिकित्सकों की यही लापरवाही टीबी को खत्म करने के अभियान को पलीता लगा रही है। जबकि शासन से स्पष्ट आदेश हैं कि निजी चिकित्सक भी अपने यहां आने वाले टीबी के मरीजों की जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय को भेजेंगे। जिससे टीबी के मरीजों की सही जानकारी मिल सके और टीबी पर काबू पाया जा सके। जनपद में 197 चिकित्सक दर्ज हैं, मगर उनमें से दस से 15 चिकित्सक ही टीबी के मरीजों की जानकारी दे रहे हैं। जानकारी न देने वाले चिकित्सकों के विरुद्घ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश हैं, मगर विभागीय स्तर पर आज तक किसी चिकित्सक पर एफआइआर दर्ज नहीं कराई गई है।
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टीबी को लेकर शासन से जारी सभी आदेशों को फॉलो किया जा रहा है। गंगोह ब्लॉक की बात करें तो खादर क्षेत्र में टीबी के मरीजों की संख्या जनपद के अन्य ब्लॉकों से अधिक है, जिनको सीएचसी पर इलाज दिया जा रहा है। हमारा प्रयास यही है कि मरीजों को समय से चिह्नित कर उसको सही इलाज दिया जा सके। हमारी लोगों से भी अपील है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक दिन तक सामान्य लगने वाली भी खांसी है तो वह अपने बलगम की जांच कराए।
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डॉ. राजेश जैन, जिला क्षय रोग अधिकारी।
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जनपद की कुल आबादी करीब 38 लाख है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग ने अपने चिकित्सकों के साथ ही आशाओं, आंगनबाड़ी कर्मचारियों आदि की मदद से सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान जनपद में चलाया। टीमों ने कुल तीन लाख 82 हजार 500 लोगों पर अपना सर्वे किया। इस अभियान में टीबी के 211 नए मरीज सामने आए। जिनका उपचार भी शुरू कर दिया गया है। उधर, निजी चिकित्सकों से सहयोग न मिलने की वजह से विभाग के पास जनपद में टीबी के मरीजों का सही आंकड़ा नहीं है। निजी चिकित्सकों की यही लापरवाही टीबी को खत्म करने के अभियान को पलीता लगा रही है। जबकि शासन से स्पष्ट आदेश हैं कि निजी चिकित्सक भी अपने यहां आने वाले टीबी के मरीजों की जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय को भेजेंगे। जिससे टीबी के मरीजों की सही जानकारी मिल सके और टीबी पर काबू पाया जा सके। जनपद में 197 चिकित्सक दर्ज हैं, मगर उनमें से दस से 15 चिकित्सक ही टीबी के मरीजों की जानकारी दे रहे हैं। जानकारी न देने वाले चिकित्सकों के विरुद्घ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश हैं, मगर विभागीय स्तर पर आज तक किसी चिकित्सक पर एफआइआर दर्ज नहीं कराई गई है।
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टीबी को लेकर शासन से जारी सभी आदेशों को फॉलो किया जा रहा है। गंगोह ब्लॉक की बात करें तो खादर क्षेत्र में टीबी के मरीजों की संख्या जनपद के अन्य ब्लॉकों से अधिक है, जिनको सीएचसी पर इलाज दिया जा रहा है। हमारा प्रयास यही है कि मरीजों को समय से चिह्नित कर उसको सही इलाज दिया जा सके। हमारी लोगों से भी अपील है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक दिन तक सामान्य लगने वाली भी खांसी है तो वह अपने बलगम की जांच कराए।
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डॉ. राजेश जैन, जिला क्षय रोग अधिकारी।