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कई रोगों से बचाने में सहायक है बीज शोधन : डा. कुशवाहा
Updated Mon, 22 Oct 2018 12:22 AM IST
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फसलों को कई रोगों से बचाने में सहायक है बीज शोधन : डा. कुशवाहा
सहारनपुर। बीज शोधन फसलों की कई बीमारियों को रोकने में सहायक होता है। रबी फसलों को बीजजनित रोगों से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को फसल की बुआई से पूर्व बीज शोधन करने की सलाह दे रहे हैं। इससे फसलों में लगने वाली कई बीमारियों को रोका जा सकता है।
रबी फसलों की बुआई की तैयारियों में जुटे किसानों को कृषि वैज्ञानिक बुआई से पूर्व बीज शोधन करने पर जोर दे रहे हैं। जनपद में रबी फसलों में गेहूं, सरसों, जई, अलसी, चना, मटर, आलू, आदि की फसलें ली जाती हैं। इन फसलों में कई बिमारियां बीज जनित होती है। इसके चलते फसल को 10 से 15 प्रतिशत का नुकसान हो जाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि रबी की सबसे महत्वपूर्ण फसल गेहूं में बीज जनित लूज स्मट या खुला कंडुआ रोग से बचाव के लिए टेबूकोनाजॉल एक ग्राम प्रति किलो या वाइटावैक्स पावर या कार्बेंडाजिम दो ग्राम प्रति किलो की दर से बीज का शोधन करना चाहिए। चना, मटर और मसूर की फसल को उकठा और गलन आदि रोग के प्रभाव से बचाने के लिए मेटालेक्सील एक्सएल की 10 एमएल प्रति किलो या वाइटावैक्स पावर तीन ग्राम प्रति किलो की दर से बीज शोधित करना चाहिए। सरसों के व्हाइट रस्ट रोग पर नियंत्रण के लिए मेटालेक्सील प्लस, मैंकोजेब की एक ग्राम मात्रा प्रति किलो बीज के शोधन के लिए पर्याप्त रहती है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि बीज उपचार करने से जहां बीज जनित रोगों कर नियंत्रण होता है वहीं बीज का जमाव भी अधिक होता है। पौधे स्वस्थ होने से उत्पादन में भी 8 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होती है।
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सहारनपुर। बीज शोधन फसलों की कई बीमारियों को रोकने में सहायक होता है। रबी फसलों को बीजजनित रोगों से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को फसल की बुआई से पूर्व बीज शोधन करने की सलाह दे रहे हैं। इससे फसलों में लगने वाली कई बीमारियों को रोका जा सकता है।
रबी फसलों की बुआई की तैयारियों में जुटे किसानों को कृषि वैज्ञानिक बुआई से पूर्व बीज शोधन करने पर जोर दे रहे हैं। जनपद में रबी फसलों में गेहूं, सरसों, जई, अलसी, चना, मटर, आलू, आदि की फसलें ली जाती हैं। इन फसलों में कई बिमारियां बीज जनित होती है। इसके चलते फसल को 10 से 15 प्रतिशत का नुकसान हो जाता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि रबी की सबसे महत्वपूर्ण फसल गेहूं में बीज जनित लूज स्मट या खुला कंडुआ रोग से बचाव के लिए टेबूकोनाजॉल एक ग्राम प्रति किलो या वाइटावैक्स पावर या कार्बेंडाजिम दो ग्राम प्रति किलो की दर से बीज का शोधन करना चाहिए। चना, मटर और मसूर की फसल को उकठा और गलन आदि रोग के प्रभाव से बचाने के लिए मेटालेक्सील एक्सएल की 10 एमएल प्रति किलो या वाइटावैक्स पावर तीन ग्राम प्रति किलो की दर से बीज शोधित करना चाहिए। सरसों के व्हाइट रस्ट रोग पर नियंत्रण के लिए मेटालेक्सील प्लस, मैंकोजेब की एक ग्राम मात्रा प्रति किलो बीज के शोधन के लिए पर्याप्त रहती है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि बीज उपचार करने से जहां बीज जनित रोगों कर नियंत्रण होता है वहीं बीज का जमाव भी अधिक होता है। पौधे स्वस्थ होने से उत्पादन में भी 8 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होती है।
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