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वाल्मीकि समाज ने सभा कर जताया रोष
Updated Tue, 03 Apr 2018 12:08 AM IST
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वाल्मीकि समाज ने सभा कर जताया रोष
सहारनपुर। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज भारत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में हकीकत नगर स्थित धरना स्थल पर सभा की और एससी, एसटी एक्ट में संशोधन किए जाने पर रोष जताया। भावाधस ने सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर पुनर्विचार कर पूर्व की भांति प्रभावी बनाए जाने की मांग की।
बाल्मीकि समाज के लोग एकत्रित होकर हकीकत नगर सिथत रामलीला मैदान धरना स्थल पर पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट के एसएसी एसटी एक्ट में किए गए संशोधन का विरोध करते हुए रोष जताया। वक्ताओं ने कहा कि इस एक्ट का प्रभाव कम हो जाने से दलितों पर अत्याचार, शोषण बढ़ेगा, अूूनवीय व्यवहार की भावना की पुनरावृत्ति शुरू हो जाएगी, जो भारत की एकता, अखंडता, धर्मनिरपेक्षता एवं समाजवाद में निहित संविधान की प्रस्तावना को कुठाराघात पहुंचाता है। वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एससी, एसटी एक्ट पर पुनर्विचार करे और इसे प्रभावी बनाकर क्रियान्वित करे। जिससे देश में रहने वाले करोड़ों दलितों को अपनी सुरक्षा का अहसास हो। उन्होंने कहा कि संगठन की मांग नहीं मानीं तो बाल्मीकि समाज इकट्ठा होकर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगा। इस संबंध में भावाधस के प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन डीएम को सौंपा। ज्ञापन देने वालों में सोनू बिरला, संदीप, चौधरी तिलकराज, सुरेश समर्पित, विनोद वैध, मुन्नीलाल, रमेश बिरला, हरीश बहोत, सोनू, संदीप, रोबिन, दीपक बिरला शामिल रहे।
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सहारनपुर। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज भारत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में हकीकत नगर स्थित धरना स्थल पर सभा की और एससी, एसटी एक्ट में संशोधन किए जाने पर रोष जताया। भावाधस ने सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर पुनर्विचार कर पूर्व की भांति प्रभावी बनाए जाने की मांग की।
बाल्मीकि समाज के लोग एकत्रित होकर हकीकत नगर सिथत रामलीला मैदान धरना स्थल पर पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट के एसएसी एसटी एक्ट में किए गए संशोधन का विरोध करते हुए रोष जताया। वक्ताओं ने कहा कि इस एक्ट का प्रभाव कम हो जाने से दलितों पर अत्याचार, शोषण बढ़ेगा, अूूनवीय व्यवहार की भावना की पुनरावृत्ति शुरू हो जाएगी, जो भारत की एकता, अखंडता, धर्मनिरपेक्षता एवं समाजवाद में निहित संविधान की प्रस्तावना को कुठाराघात पहुंचाता है। वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एससी, एसटी एक्ट पर पुनर्विचार करे और इसे प्रभावी बनाकर क्रियान्वित करे। जिससे देश में रहने वाले करोड़ों दलितों को अपनी सुरक्षा का अहसास हो। उन्होंने कहा कि संगठन की मांग नहीं मानीं तो बाल्मीकि समाज इकट्ठा होकर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगा। इस संबंध में भावाधस के प्रतिनिधि मंडल ने प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन डीएम को सौंपा। ज्ञापन देने वालों में सोनू बिरला, संदीप, चौधरी तिलकराज, सुरेश समर्पित, विनोद वैध, मुन्नीलाल, रमेश बिरला, हरीश बहोत, सोनू, संदीप, रोबिन, दीपक बिरला शामिल रहे।
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