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रमजान में हर नेकी का 70 गुना सवाब मिलता है: मुफ्ती राशिद
Updated Sat, 19 May 2018 11:40 PM IST
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रमजान में हर नेकी का 70 गुना सवाब मिलता है: मुफ्ती राशिद
देवबंद (सहारनपुर)। पवित्र रमजान माह में पिछले वर्ष की तरह इस बार भी मोहल्ला लहसवाड़ा में तीन दिन में तरावीह में कलाम पाक मुकम्मल किया गया। इस दौरान उलमा ने रमजान माह के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मोहल्ला लहसवाड़ा स्थित मौलाना सिराजुल इस्लाम के आवास पर पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष तरावीह में तीन दिन में कलाम पाक पूरा किया गया। हाफिज कारी समीर ने कलाम पाक सुनाया। इस दौरान दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती राशिद कासमी ने कहा कि रमजान का महीने अल्लाह की तरफ से बंदों के लिए खास इनाम है। अल्लाह से इस माह में अपने बंदों के लिए हर काम का 70 गुना सवाब रखा है। बस जरूरत उसे लेने वालों की है। उन्होंने कहा कि रोजे रखना, पांच वक्त की नमाज पढ़ना, तरावीह पढ़ना और अपना अधिक समय अल्लाह की इबादत में गुजारने का नाम ही रमजान है। इसलिए पूरे महीने तरावीह पढ़नी चाहिए। अंत में उन्होंने आपसी सौहार्द, मुल्क में अमनो अमान के लिए दुआ कराई। इस मौैके पर शमीम किरतपुरी, मो. गुफरान, आफताब, डा. एके त्यागी, डा. शमशाद, फरमान खां, अमानुल्लाह खान, शमीम अहमद आदि मौैजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। पवित्र रमजान माह में पिछले वर्ष की तरह इस बार भी मोहल्ला लहसवाड़ा में तीन दिन में तरावीह में कलाम पाक मुकम्मल किया गया। इस दौरान उलमा ने रमजान माह के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मोहल्ला लहसवाड़ा स्थित मौलाना सिराजुल इस्लाम के आवास पर पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष तरावीह में तीन दिन में कलाम पाक पूरा किया गया। हाफिज कारी समीर ने कलाम पाक सुनाया। इस दौरान दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती राशिद कासमी ने कहा कि रमजान का महीने अल्लाह की तरफ से बंदों के लिए खास इनाम है। अल्लाह से इस माह में अपने बंदों के लिए हर काम का 70 गुना सवाब रखा है। बस जरूरत उसे लेने वालों की है। उन्होंने कहा कि रोजे रखना, पांच वक्त की नमाज पढ़ना, तरावीह पढ़ना और अपना अधिक समय अल्लाह की इबादत में गुजारने का नाम ही रमजान है। इसलिए पूरे महीने तरावीह पढ़नी चाहिए। अंत में उन्होंने आपसी सौहार्द, मुल्क में अमनो अमान के लिए दुआ कराई। इस मौैके पर शमीम किरतपुरी, मो. गुफरान, आफताब, डा. एके त्यागी, डा. शमशाद, फरमान खां, अमानुल्लाह खान, शमीम अहमद आदि मौैजूद रहे।
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