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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:20 AM IST
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना
देवबंद (सहारनपुर)। आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने मामले का निस्तारण करते हुए जनसूचना अधिकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
आरटीआई कार्यकर्ता देवबंद निवासी रमेश चंद त्यागी ने जन सूचना अधिकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से कुछ बिंदुओं पर आरटीआई अधिनियम की धारा के अंतर्गत सूचना मांगी थी। लेकिन उन्हें कोई सूचना नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयुक्त लखनऊ को इसकी शिकायत भेजी। जिस पर राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने पत्रावली का अवलोकन कर 24 फरवरी 2014 को प्रतिवादी जनसूचना अधिकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सहारनपुर को निर्देश दिया कि अगली तिथि पर वह स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें कि वादी को सूचना क्यों नहीं दी गई। साथ ही क्यों न उनके विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए। परंतु प्रतिवादी द्वारा न तो सूचना उपलब्ध कराई गई न ही उनके द्वारा कोई स्पष्टीकरण दिया गया। जिस कारण उक्त दंड से अधिरोपित करते हुए डीएम को आदेश की प्रति भेजकर आदेश का पालन सुनिश्चित कराकर आयोग को अवगत कराने को कहा गया है। निर्देश दिया गया कि वसूली उनके वेतन से न हो पाने पर भू-राजस्व बकाये की भांति कराई जानी चाहिए।
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देवबंद (सहारनपुर)। आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने मामले का निस्तारण करते हुए जनसूचना अधिकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
आरटीआई कार्यकर्ता देवबंद निवासी रमेश चंद त्यागी ने जन सूचना अधिकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से कुछ बिंदुओं पर आरटीआई अधिनियम की धारा के अंतर्गत सूचना मांगी थी। लेकिन उन्हें कोई सूचना नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयुक्त लखनऊ को इसकी शिकायत भेजी। जिस पर राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने पत्रावली का अवलोकन कर 24 फरवरी 2014 को प्रतिवादी जनसूचना अधिकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सहारनपुर को निर्देश दिया कि अगली तिथि पर वह स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें कि वादी को सूचना क्यों नहीं दी गई। साथ ही क्यों न उनके विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए। परंतु प्रतिवादी द्वारा न तो सूचना उपलब्ध कराई गई न ही उनके द्वारा कोई स्पष्टीकरण दिया गया। जिस कारण उक्त दंड से अधिरोपित करते हुए डीएम को आदेश की प्रति भेजकर आदेश का पालन सुनिश्चित कराकर आयोग को अवगत कराने को कहा गया है। निर्देश दिया गया कि वसूली उनके वेतन से न हो पाने पर भू-राजस्व बकाये की भांति कराई जानी चाहिए।
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