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दहेज के लिए हत्या करने के आरोपियों को आजीवन कारावास
Updated Sun, 06 Aug 2017 12:44 AM IST
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दहेज के लिए हत्या करने के आरोपियों को आजीवन कारावास
सहारनपुर। दहेज नहीं देने पर विवाहिता की हत्या करने के तीन आरोपियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक लाख रुपये और बाइक नहीं देने पर पति, सास और ससुर ने ही बहू की हत्या कर डाली।
थाना जनकपुर निवासी आसमीन की पुत्री रहनुमा की शादी 5 जून 2012 को हुसैन बस्ती माहीपुरा निवासी शफाकत उर्फ सागर के साथ हुई थी। ससुराल वाले शादी के बाद से ही रहनुमा को परेशान करते थे। उसे अपने मायके से एक लाख रुपये और बाइक लाने के लिए कहते थे। 11 अगस्त 2013 को यासमीन की छोटी बेटी जब रहनुमा से मिलने गई तो घर का दरवाजा बंद था। जिस पर उसने अपने परिजनों को सूचना दी। परिवार के लोगों ने घर पर आकर देखा तो रहनुमा घर के अंदर छत के कुंडे से दुपट्टे से लटकी हुई मिली। अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता विक्रम वर्मा ने बताया कि घटना की रिपोर्ट यासमीन ने 11 अगस्त 2013 को शफकत, रिहाना, लियाकत अली, शालू, सोनू, सिकंदर, मुन्ना एवं मोनू के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद शफकत, लियाकत और रिहाना के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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अपर सत्र न्यायाधीश रविकांत की कोर्ट में दोनों पक्षों की सुनवाई की गई। सुनवाई के बाद न्यायाधीश रविकांत ने तीनों को दहेज के लिए हत्या का दोषी पाया। कोर्ट ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की भी सजा सुनाई है।
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सहारनपुर। दहेज नहीं देने पर विवाहिता की हत्या करने के तीन आरोपियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक लाख रुपये और बाइक नहीं देने पर पति, सास और ससुर ने ही बहू की हत्या कर डाली।
थाना जनकपुर निवासी आसमीन की पुत्री रहनुमा की शादी 5 जून 2012 को हुसैन बस्ती माहीपुरा निवासी शफाकत उर्फ सागर के साथ हुई थी। ससुराल वाले शादी के बाद से ही रहनुमा को परेशान करते थे। उसे अपने मायके से एक लाख रुपये और बाइक लाने के लिए कहते थे। 11 अगस्त 2013 को यासमीन की छोटी बेटी जब रहनुमा से मिलने गई तो घर का दरवाजा बंद था। जिस पर उसने अपने परिजनों को सूचना दी। परिवार के लोगों ने घर पर आकर देखा तो रहनुमा घर के अंदर छत के कुंडे से दुपट्टे से लटकी हुई मिली। अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता विक्रम वर्मा ने बताया कि घटना की रिपोर्ट यासमीन ने 11 अगस्त 2013 को शफकत, रिहाना, लियाकत अली, शालू, सोनू, सिकंदर, मुन्ना एवं मोनू के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद शफकत, लियाकत और रिहाना के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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अपर सत्र न्यायाधीश रविकांत की कोर्ट में दोनों पक्षों की सुनवाई की गई। सुनवाई के बाद न्यायाधीश रविकांत ने तीनों को दहेज के लिए हत्या का दोषी पाया। कोर्ट ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा कोर्ट ने 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की भी सजा सुनाई है।