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मौलाना साद के कार्यक्रम में जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं
Updated Sun, 04 Mar 2018 12:44 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम की सुप्रीम पावर मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना मुफ्ती इस्माइल मालेगांव मौलाना साद के कार्यक्रम में शिरकत करने को लेकर चर्चाओं में आ आ गए हैं।
तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना साद को लेकर इस्लामिक हल्कों में बड़ी बहस छिड़ी हुई है और उनको लेकर दारुल उलूम अपना नजरिया साफ कर चुका है। इतना ही नहीं दारुल उलूम समेत दीनी इदारों में मौलाना साद से जुड़े लोगों के बयानों पर भी पाबंदी लगाई हुई है। हॉल ही में दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना फरीदुद्दीन कासमी के औरंगाबाद में मौलाना साद के कार्यक्रम में शिरकत करने को लेकर चर्चा हुई। जिसके बाद मौलाना फरीद को इस पर स्पष्टीकरण देना पड़ा था। अब दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना मुफ्ती इस्माइल मालेगांव के उसी कार्यक्रम में शिरकत करने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे पर मौलाना इस्माइल ने दूरभाष पर बताया कि दारुल उलूम ने हमेशा से दावत व तब्लीग का समर्थन किया है। जहां तक मौलाना साद के कार्यक्रम में जाने का सवाल है तो दारुल उलूम ने उन पर या किसी और पर कार्यक्रम में जाने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है। इसलिए जब कोई पाबंदी नहीं है तो फिर इजाजत लेने का क्या मतलब है। उन्होंने एक सवाल के जवाब पर कहा कि अल्लाह के यहां तौबा का दरवाजा हर वक्त खुला रहता है। इसी तरह दारुल उलूम का दरवाजा भी मौलाना साद के लिए खुला हुआ है। वो जब चाहे आकर रुजू (माफी) कर सकते हैं। मौलाना इस्माइल ने कहा कि तब्लीगी जमात के जिम्मेदार मौलाना शौकत कुछ लोगों के साथ उनके पास पहुंचे थे और उन्हें कार्यक्रम में आने की दावत दी थी। तब्लीगी जमात के झगड़े से उनका या दारुल उलूम का कोई ताल्लुक नहीं है।
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तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना साद को लेकर इस्लामिक हल्कों में बड़ी बहस छिड़ी हुई है और उनको लेकर दारुल उलूम अपना नजरिया साफ कर चुका है। इतना ही नहीं दारुल उलूम समेत दीनी इदारों में मौलाना साद से जुड़े लोगों के बयानों पर भी पाबंदी लगाई हुई है। हॉल ही में दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना फरीदुद्दीन कासमी के औरंगाबाद में मौलाना साद के कार्यक्रम में शिरकत करने को लेकर चर्चा हुई। जिसके बाद मौलाना फरीद को इस पर स्पष्टीकरण देना पड़ा था। अब दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना मुफ्ती इस्माइल मालेगांव के उसी कार्यक्रम में शिरकत करने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे पर मौलाना इस्माइल ने दूरभाष पर बताया कि दारुल उलूम ने हमेशा से दावत व तब्लीग का समर्थन किया है। जहां तक मौलाना साद के कार्यक्रम में जाने का सवाल है तो दारुल उलूम ने उन पर या किसी और पर कार्यक्रम में जाने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है। इसलिए जब कोई पाबंदी नहीं है तो फिर इजाजत लेने का क्या मतलब है। उन्होंने एक सवाल के जवाब पर कहा कि अल्लाह के यहां तौबा का दरवाजा हर वक्त खुला रहता है। इसी तरह दारुल उलूम का दरवाजा भी मौलाना साद के लिए खुला हुआ है। वो जब चाहे आकर रुजू (माफी) कर सकते हैं। मौलाना इस्माइल ने कहा कि तब्लीगी जमात के जिम्मेदार मौलाना शौकत कुछ लोगों के साथ उनके पास पहुंचे थे और उन्हें कार्यक्रम में आने की दावत दी थी। तब्लीगी जमात के झगड़े से उनका या दारुल उलूम का कोई ताल्लुक नहीं है।
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