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अमेरिका के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद का प्रदर्शन
Updated Sat, 23 Dec 2017 12:34 AM IST
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देवबंद। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा येरुशलम को इस्राइल की राजधानी बनाने का निर्णय लिए जाने के विरोध में शुक्रवार को जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ को ज्ञापन भी भेजा है।
शुक्रवार को ईदगाह रोड स्थित महमूद हॉल में आयोजित हुई जमीयत उलमा-ए-हिंद की बैठक में जमीयत के कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा येरुशलम को इस्राइल की राजधानी बनाने के निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के उन फैसलों के विरुद्ध है जिनके तहत यह स्वीकार किया गया है कि वर्ष 1967 के युद्ध में इस्रराइल ने येरुशलम पर अत्याचार पूर्ण कब्जा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की इस कार्रवाई का उद्देश्य उस नाजायज कब्जे को जायज ठहराना है। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने मुल्क का दूतावात बैतुल मुकद्दस में बनाने का जो निर्णय लिया है उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। सुरक्षा काउंसिल और उसके 14 सदस्यों समेत 128 मुल्कों ने अमेरिका के खिलाफ वोट किया है। इसके बावजूद अमेरिका अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और व चाहता है कि येरुशलाम पर इस्राइल का जो जबरदस्ती का कब्जा है उसको कानूनी हैसियत दी जाए। उन्होंने कहा कि इसका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक ये मुल्क मुसलमानों के पास वापस नहीं आ जाता। इसके उपरांत सैकड़ों लोग हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया पर पहुंचे। जहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, विदेश मंत्री, अमेरिकी दूतावास को प्रेषित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसे स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना हो जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम ही हो। साथ ही भारत सरकार से मांग करते हुए कहा कि वह देश की दीर्घकालिक नीति के अनुसार स्पष्ट शब्दों में अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले की निंदा करे। इस मौके पर जमीयत नगर अध्यक्ष उमैर उस्मानी, पूर्व पालिकाध्यक्ष इनाम कुरैशी, हाजी मनशाद, सलीम कुरैशी, जमालुद्दीन अंसारी, मुल्ला अकरम, सादिक सिद्दीकी, कारी जुबैर, चौधरी सादिक, सदरुद्दीन अंसारी, हाजी जैद आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को ईदगाह रोड स्थित महमूद हॉल में आयोजित हुई जमीयत उलमा-ए-हिंद की बैठक में जमीयत के कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा येरुशलम को इस्राइल की राजधानी बनाने के निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के उन फैसलों के विरुद्ध है जिनके तहत यह स्वीकार किया गया है कि वर्ष 1967 के युद्ध में इस्रराइल ने येरुशलम पर अत्याचार पूर्ण कब्जा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति की इस कार्रवाई का उद्देश्य उस नाजायज कब्जे को जायज ठहराना है। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने मुल्क का दूतावात बैतुल मुकद्दस में बनाने का जो निर्णय लिया है उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। सुरक्षा काउंसिल और उसके 14 सदस्यों समेत 128 मुल्कों ने अमेरिका के खिलाफ वोट किया है। इसके बावजूद अमेरिका अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और व चाहता है कि येरुशलाम पर इस्राइल का जो जबरदस्ती का कब्जा है उसको कानूनी हैसियत दी जाए। उन्होंने कहा कि इसका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक ये मुल्क मुसलमानों के पास वापस नहीं आ जाता। इसके उपरांत सैकड़ों लोग हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया पर पहुंचे। जहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, विदेश मंत्री, अमेरिकी दूतावास को प्रेषित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसे स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना हो जिसकी राजधानी पूर्वी येरुशलम ही हो। साथ ही भारत सरकार से मांग करते हुए कहा कि वह देश की दीर्घकालिक नीति के अनुसार स्पष्ट शब्दों में अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले की निंदा करे। इस मौके पर जमीयत नगर अध्यक्ष उमैर उस्मानी, पूर्व पालिकाध्यक्ष इनाम कुरैशी, हाजी मनशाद, सलीम कुरैशी, जमालुद्दीन अंसारी, मुल्ला अकरम, सादिक सिद्दीकी, कारी जुबैर, चौधरी सादिक, सदरुद्दीन अंसारी, हाजी जैद आदि मौजूद रहे।
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