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अधिनियम की कमजोरी का लाभ लेते रहे माफिया

Tue, 12 Feb 2019 12:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Feb 2019 12:59 AM IST
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अधिनियम की कमजोरी का लाभ लेते रहे माफिया
सहारनपुर। अवैध रूप से बनी शराब बेचने वालों को पुलिस गिरफ्तार करती रही, लेकिन वह न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आकर फिर से उसी धंधे को करने में सक्रिय हो गए। इसके पीछे बड़ी वजह आबकारी अधिनियम की धारा 60 का जमानती अपराध की श्रेणी में होना था, इसी कमजोरी का फायदा शराब माफिया उठाते रहे। हालांकि 2018 में ही आबकारी अधिनियम में संशोधन हुआ, जिसमें आबकारी अधिनियम की धारा 60 ए को गैरजमानती अपराध की श्रेणी में डाला गया।
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सहारनपुर जनपद में जहरीली शराब ने कहर बरपाया। जिले के 16 से ज्यादा गांवों में 82 लोगों की जान चली गईं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत की बड़ी वजह जहरीली शराब थी, लेकिन दूसरी वजह यह भी थी कि शराब बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती। जबकि पुलिस अधिकारी हर साल ही शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई होती रही है। जनपद सहारनपुर में आबकारी अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई पर गौर करें, तो वर्ष 2016 में 3022 मुकदमे, 2017 में 2814 और वर्ष 2018 में 2475 मुकदमे आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज हुए।
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अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह है, जो गिरफ्तार होने के बाद फिर से शराब माफिया सक्रिय कैसे हो जाते हैं। इसका जवाब तलाशने के लिए फौजदारी मामलों के अधिवक्ताओं से बात की गई, तो सभी ने यही कहा कि आबकारी अधिनियम की धारा 60 जमानती अपराध की श्रेणी में रहा है, जिस कारण आरोपियों को इसका फायदा मिल जाता था। हालांकि संशोधन के बाद पुलिस धारा 60ए के अलावा शराब बनाने वालों पर धारा 272 और 273 भी लगाने लगी, जिससे आरोपियों पर शिकंजा कसा जा सके।
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------ अधिवक्ताओं की राय
- वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व डीजीसी बिशंबर सिंह पुंडीर का कहना है कि आबकारी अधिनियम की धारा 60 बिल्कुल प्रभावी नहीं है, क्योंकि यह जमानती अपराध की श्रेणी में है। अधिकतर मामलों में पुलिस इसी धारा का प्रयोग करती रही, जिसका फायदा आरोपियों को मिलता है।
- वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व बार संघ अध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा का कहना है कि पहले यह धारा जमानती श्रेणी में थी, लेकिन 2018 के संशोधन में इसे 60ए बनाया गया, जो गैरजमानती अपराध की श्रेणी में है। शराब बनाने और बेचने वालों की पुलिस से साठगांठ होती है, जिस कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती है।
- पूर्व डीजीसी प्रमोद शर्मा का कहना है कि आबकारी अधिनियम की धारा 60 प्रभावी नहीं है। जैसा मामला हाल में हुआ है, ऐसे मामलो में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी जरूरी है।
- पूर्व बार संघ अध्यक्ष सिद्धार्थ शंकर त्यागी का कहना है कि आईपीसी की धारा 272, 273 में उम्रकैद तक की सजा का प्राविधान है, जबकि 60 आबकारी अधिनियम में आसानी से आरोपियों को जमानत मिल जाती है।

- अधिवक्ता चौधरी विकास वर्मा का कहना है कि आबकारी अधिनियम के साथ ही आरोपियों के खिलाफ शराब बनाने की धारा, यदि संगठित होकर शराब बनाने और बेचने का कार्य होता है, तो गैंगस्टर भी लगना चाहिए।
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