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कानपुर की ये छोरी दौड़ाएगी गुडगांव की रैपिड मेट्रो
Updated Thu, 14 Nov 2013 04:00 PM IST
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राजधानी दिल्ली के उपनगरीय इलाके गुडगांव में शुरू देश की पहली निजी मेट्रो रेल सेवा '' रैपिड मेट्रो '' में ट्रेन ऑपरेटर का काम करने वाली प्रिया सचान का कहना है कि पुरुषों के आधिपत्य वाले इस क्षेत्र में खुद को साबित करना एक बडी चुनौती है।
बीबीसी से खास बातचीत में सचान ने कहा कि रैपिड मेट्रो को ऑपरेटर और ट्रेन कंट्रोलर की जरूरत थी और उन्होंने इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाया। इसके बाद इंटरव्यू हुआ और सौभाग्य से वह पास कर गईं।
कानपुर की रहने वाली सचान साल 2009 में दिल्ली आईं। भारतीय समाज में जहां आमतौर पर महिलाओं के ट्रेन चलाने के बारे में सोचा तक नहीं जा सकता वहां पर इस पेशे को चुनने वाली सचान का कहना है कि उनका परिवार खुले विचारों वाला है। वे खुश हैं।
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आश्चर्य करते हैं घर वाले
उनके परिवार के लोग यह सुनकर आश्चर्य करते हैं कि वह ट्रेन चलाती हैं। वो उनसे पूछते हैं कि आप कैसे ट्रेन चलाती हैं।
बच्चे भी आश्चर्य से ट्रेन चलाने के बारे में सवाल करते हैं। सचान ने कहा, ''यह मेरे और मेरे आसपास के लोगों के लिए रोमांचक है। कुछ लोग आश्चर्य करते हैं लेकिन अधिकतर लोग गर्व महसूस करते हैं।''
उन्होंने कहा, ''जीवन में हर कोई सफल होना चाहता है और मैंने भी ऐसा ही सोचा। खुद को साबित करने का यह एक अवसर था जिसे मैंने हाथ से जाने नहीं दिया।''
उन्होंने कहा कि हमारे पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के सामने खुद को साबित करने की एक चुनौती है।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे नियम बने हैं कि कुछ खास काम केवल पुरुष कर सकते हैं तो कुछ अन्य काम केवल महिलाओं के लिए है। लेकिन ये कुछ नए क्षेत्र हैं जहां हम अपने आप को साबित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को घर से बाहर निकलकर यहां आना चाहिए और यह साबित करना चाहिए कि ऐसा कोई काम नहीं जिसे महिलाएं नहीं कर सकती।
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बीबीसी से खास बातचीत में सचान ने कहा कि रैपिड मेट्रो को ऑपरेटर और ट्रेन कंट्रोलर की जरूरत थी और उन्होंने इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाया। इसके बाद इंटरव्यू हुआ और सौभाग्य से वह पास कर गईं।
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कानपुर की रहने वाली सचान साल 2009 में दिल्ली आईं। भारतीय समाज में जहां आमतौर पर महिलाओं के ट्रेन चलाने के बारे में सोचा तक नहीं जा सकता वहां पर इस पेशे को चुनने वाली सचान का कहना है कि उनका परिवार खुले विचारों वाला है। वे खुश हैं।
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आश्चर्य करते हैं घर वाले
उनके परिवार के लोग यह सुनकर आश्चर्य करते हैं कि वह ट्रेन चलाती हैं। वो उनसे पूछते हैं कि आप कैसे ट्रेन चलाती हैं।
बच्चे भी आश्चर्य से ट्रेन चलाने के बारे में सवाल करते हैं। सचान ने कहा, ''यह मेरे और मेरे आसपास के लोगों के लिए रोमांचक है। कुछ लोग आश्चर्य करते हैं लेकिन अधिकतर लोग गर्व महसूस करते हैं।''
उन्होंने कहा, ''जीवन में हर कोई सफल होना चाहता है और मैंने भी ऐसा ही सोचा। खुद को साबित करने का यह एक अवसर था जिसे मैंने हाथ से जाने नहीं दिया।''
उन्होंने कहा कि हमारे पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के सामने खुद को साबित करने की एक चुनौती है।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे नियम बने हैं कि कुछ खास काम केवल पुरुष कर सकते हैं तो कुछ अन्य काम केवल महिलाओं के लिए है। लेकिन ये कुछ नए क्षेत्र हैं जहां हम अपने आप को साबित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को घर से बाहर निकलकर यहां आना चाहिए और यह साबित करना चाहिए कि ऐसा कोई काम नहीं जिसे महिलाएं नहीं कर सकती।