{"_id":"5803d3f64f1c1b6f5128e443","slug":"yateemkhana-issue00000","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं जले चूल्हे, खुले आसमान के नीचे गुजारी रात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं जले चूल्हे, खुले आसमान के नीचे गुजारी रात
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
Updated Mon, 17 Oct 2016 12:54 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
यतीमखाने की जमीन पर बने मकानों के ध्वस्तीकरण के बाद यहां के कब्जेदार अब अपनी बर्बादी के निशान मलबे में तलाश रहे हैं। यहां पर एक ओर जेसीबी के जरिये मलबा हटाया जा रहा है तो दूसरी ओर बस्ती के लोग इसी मलबे में अपना सामान और जरूरत की चीजें तलाश रहे हैं। चौबीस घंटे बाद भी पुलिस के जुल्म की दास्तां के निशान बाकी हैं। लोग रह-रहकर पुलिस के जुल्म सितम की कहानी को भूल नहीं पा रहे हैं।
वक्फ की जमीन पर यतीमखाना बनना था, लेकिन इस जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर अपने आशियाने बना लिए। अब इस जमीन पर रामपुर पब्लिक स्कूल का निर्माण होना है। इसके लिए यहां रहने वाले लोगों को सरकारी तंत्र ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए उजाड़ दिया। शनिवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में तीन दर्जन से ज्यादा मकानों व पशुशालाओं पर जेसीबी चलवा दी थी।
विज्ञापन
पब्लिक के विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस ने बस्ती के लोगों के साथ खूब अभद्र व्यवहार किया। यहां लोगों को बस्ती से जबरन बाहर निकाल कर सड़क पर ले जाकर पटक दिया था। पुलिस ने इन लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया और जेसीबी चलवा दी। कुछ ही घंटे में पूरी बस्ती मलबे में तब्दील हो गई। बस्ती के मलबे में तब्दील होने के बाद बस्ती के तमाम लोगों ने अपने कब्जे नहीं छोड़े हैं। तमाम परिवार अभी खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। रात भर वह भूखे प्यासे ही खुले आसमान के नीचे रहे।
विज्ञापन
रविवार की सुबह होने के बाद यहां के लोग मलबे में दबे अपनी बर्बादी के निशानों को तलाशते रहे। बस्ती में चूल्हे भी नहीं जले। परेशान लोग रह-रहकर सरकारी तंत्र की कार्रवाई को कोसते हुए नजर आए। बस्ती में कुछ लोग तो गायब हो गए हैं, लेकिन तमाम लोग अभी भी यहां से कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं हो रहे हैं। महिलाएं हो या फिर बच्चे हर किसी की जुबां पर सरकारी तंत्र के जुल्म की दास्तां हैं और चेहरे पर आक्रोश साफ छलक रहा है।