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एमबीबीएस की पढ़ाई और खर्च रकम पर फिरा पानी, नहीं दे पाए नीट

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 15 Sep 2021 12:50 AM IST
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Water lost on MBBS education and expenses, could not give NEET
मसवासी (रामपुर)। जनसेवा केंद्र संचालक की लापरवाही से एमबीबीएस कर रहे तीन युवकों का भविष्य और लाखों रुपये दांव पर लग गए। युवकों का आरोप है कि जनसेवा केंद्र संचालक ने पूर्ण शुल्क लेने के बाद नीट के आवेदन न कर उन्हें फर्जी प्रवेशपत्र थमा दिए। इस कारण वे परीक्षा से वंचित हो गए। इन युवकों की एमबीबीएस की अब तक की पढ़ाई और लाखों रुपयों पर पानी फिर गया है। कोविड संक्रमण के कारण सरकार ने नीट में विलंब के कारण छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश की छूट दे दी थी। इस आधार पर तीनों युवकों ने एमबीबीएस में प्रवेश ले लिया। प्रवेश इस शर्त पर दिए गए थे कि प्रवेश के बाद होने वाली नीट परीक्षा पास करनी होगी।
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तीनों युवक मसवासी क्षेत्र के गांव शिवनगर लौहर्रा निवासी मो. नाजिम, मो. इमरान और रियाजुद्दीन हैं। इमरान ने बताया कि सरकार की घोषणा के बाद उसने और रियाजुद्दीन ने प्रवेश ले लिया। वह एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। बाद में मोहम्मद नाजिम प्रवेश लिया वह एमबीबीएस प्रथम वर्ष में है। एमबीबीएस में प्रवेश लेने के बाद युवकों ने 11 सितंबर की शाम क्षेत्र के एक जनसेवा केंद्र संचालक से नीट में आवेदन करवाने के लिए कहा और शुल्क दे दिया। छह सितंबर को आवेदकों ने प्रवेशपत्र डाउनलोड करने को कहा। आरोप है कि जनसेवा केंद्र संचालक ने किसी अन्य प्रवेशपत्र को एडिट कर उसमें फर्जी अनुक्रमांक डालकर उन लोगों को दे दिया।
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12 सितंबर को तीनों प्रवेशपत्र लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचे। वहां कर्मचारी ने प्रवेश पत्र देखकर बताया कि ये फर्जी हैं, क्योंकि जिस सीरीज का अनुक्रमांक उनके प्रवेशपत्र पर था, वह अनुक्रमांक पूरे सेंटर में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की सीरीज से अलग था। युवकों का आरोप है कि जनसेवा केंद्र संचालक ने आवेदन का शुल्क ले लिया, लेकिन उनके आवेेदन नहीं किए। प्रवेशपत्र मांगने पर उसने फर्जी दे दिए। इस कारण वे परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।
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अब कोई अवसर नहीं
नीट परीक्षा से वंचित रहे छात्रों का कहना है अब कोई अवसर न होने के कारण वे न तो एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकते हैं और न ही नीट की परीक्षा दे सकते हैं। मोहम्मद इमरान ने बताया कि उनके व रियाजुद्दीन के करीब 13-13 लाख रुपये अब तक पढ़ाई के दौरान खर्च हो गए हैं, जबकि मो. नाजिम के भी करीब छह लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
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