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यूक्रेन में एक-एक मिनट छात्र-छात्राओं को गुजारना पड़ रहा है भारी
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रामपुर। यूक्रेन में फंसे एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने को मजबूर हैं। बिगड़े हुए हालात के बीच एक-एक मिनट छात्रों को गुजारना भारी पड़ रहा है। खारकीव में फंसी रामपुर की शजा उस्मान जैसे-तैसे हॉस्टल के बंकर से निकलकर रेलवे स्टेशन तक तो पहुंच गई, लेकिन ट्रेनों में जगह नहीं मिल पा रही है। वह सुबह से स्टेशन पर ही है। शजा ने अपने परिजनों को वहां के हालात के बारे में फोन पर बताया। उसने बताया कि भीषण बमबारी हो रही है। चारों तरफ से धमाकों की गूंजे सुनाई पड़ रही है।
अठभैयान घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव से एमबीबीएस कर रही हैं। यह उनका तीसरा साल है। उनकी मां समीना नादिर ने बताया कि मंगलवार को उनकी बेटी से फोन पर बात हुई। शजा ने बताया कि वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। चारों तरफ डर और दहशत का माहौल है। इस बीच मौका मिलते ही वह भारत समय के अनुसार दोपहर करीब 12.30 बजे खारकीव रेलवे स्टेशन पहुंच गईं। इसके लिए उन्हें एक टैक्सी की मदद लेनी पड़ी, जिसके लिए सामान्य से अधिक किराया लिया गया। इसके बाद से वह रेलवे स्टेशन पर ही है। शाम तक उसे ट्रेन में जगह नहीं मिल सकी थी। उन्होंने बताया कि यदि ट्रेन मिली, तो वह लवीव तक जाएंगी, जहां दूसरे साधन से किसी बॉर्डर तक पहुंचने का प्रयास करेंगी।
ज्वालानगर के मुदित राजपूत के पिता प्रेम सिंह ने बताया कि पांच दिन से मुदित राजपूत अपने साथियों के साथ हॉस्टल के बेसमेंट में ही छुपा है। मंगलवार को उसने वहां से निकलने का प्रयास किया, लेकिन उसके पास धन की कमी थी। अब डॉलर का इंतजाम कराया गया, तो वहां फायरिंग और बमबारी बढ़ गई। ऐसे में वह बेसमेंट में ही छुपा है। उसके पास खाने पीने का सामान भी खत्म हो गया है। मुदित राजपूत नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव से एमबीबीएस कर रहे हैं। यह उनका पहला वर्ष है।
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अठभैयान घेर सैफुद्दीन निवासी शजा उस्मान नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव से एमबीबीएस कर रही हैं। यह उनका तीसरा साल है। उनकी मां समीना नादिर ने बताया कि मंगलवार को उनकी बेटी से फोन पर बात हुई। शजा ने बताया कि वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। चारों तरफ डर और दहशत का माहौल है। इस बीच मौका मिलते ही वह भारत समय के अनुसार दोपहर करीब 12.30 बजे खारकीव रेलवे स्टेशन पहुंच गईं। इसके लिए उन्हें एक टैक्सी की मदद लेनी पड़ी, जिसके लिए सामान्य से अधिक किराया लिया गया। इसके बाद से वह रेलवे स्टेशन पर ही है। शाम तक उसे ट्रेन में जगह नहीं मिल सकी थी। उन्होंने बताया कि यदि ट्रेन मिली, तो वह लवीव तक जाएंगी, जहां दूसरे साधन से किसी बॉर्डर तक पहुंचने का प्रयास करेंगी।
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ज्वालानगर के मुदित राजपूत के पिता प्रेम सिंह ने बताया कि पांच दिन से मुदित राजपूत अपने साथियों के साथ हॉस्टल के बेसमेंट में ही छुपा है। मंगलवार को उसने वहां से निकलने का प्रयास किया, लेकिन उसके पास धन की कमी थी। अब डॉलर का इंतजाम कराया गया, तो वहां फायरिंग और बमबारी बढ़ गई। ऐसे में वह बेसमेंट में ही छुपा है। उसके पास खाने पीने का सामान भी खत्म हो गया है। मुदित राजपूत नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव से एमबीबीएस कर रहे हैं। यह उनका पहला वर्ष है।
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