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जिला सहकारी बैंक के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तीन संदिग्ध खातों की जांच में जुटी एजेंसियां
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रामपुर। जिला सहकारी बैंक के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की फर्म के तीन बैंक खाते जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। इन खातों में मुंबई के एक बैंक की शाखा से करीब साढ़े चार करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे। बाद में यह पैसा दिल्ली के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था। बैंक सचिव ने तीनों संदिग्ध खाते पकड़े थे, जिसके बाद चेयरमैन ने सरकार को जानकारी दे दी थी। सरकार की सिफारिश के बाद अब प्रर्वतन निदेशालय और आयकर विभाग की ओर से अलग-अलग जांच की जा रही है।
मामला जिला सहकारी बैंक की पत्थरखेड़ा, चीनी मिल और राजद्वारा शाखा से जुड़ा है। तीनों ही शाखाओं में जिला सहकारी बैंक का एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात रहा। दरअसल, बैंक के खातों की सामान्य जांच के दौरान सामने आया कि एक ही फर्म के तीन शाखाओं में अलग-अलग खाते हैं। यह फर्म बैंक के उसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की थी जो तीनों शाखाओं में तैनात रहा था। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के इन तीनों बैंक खातों में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। खातों में जो पैसा आया था, वह भी मुंबई स्थित निजी बैंक की एक शाखा से ट्रांसफर हुआ था। जो बाद में दिल्ली के अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। बैंक सचिव उपेंद्र कुमार सारस्वत को तीनों खाते संदिग्ध लगे, जिसके बाद उन्होंने इसकी जानकारी बैंक के चेयरमैन देवकरन गंगवार को दी। चेयरमैन ने तुरंत इसकी जानकारी प्रदेश सरकार को दी। जिसके बाद सरकार की सिफारिश पर तीनों बैंक खातों की विस्तृत जांच हो रही है। सूत्रों की माने तो सरकार ने जांच प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दी है। प्रवर्तन निदेशालय यह जांच करेगा कि खातों में जो पैसा आया है, वह हवाला कारोबार से जुुड़ा हुआ तो नहीं है। यह पैसा किसके खातों में ट्रांसफर हुआ है, ये बिंदु भी जांच का हिस्सा होंगे। वहीं, आय से अधिक संपत्ति की आशंका को देखते हुए जांच आयकर विभाग से भी कराई जा रही है।
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मामला जिला सहकारी बैंक की पत्थरखेड़ा, चीनी मिल और राजद्वारा शाखा से जुड़ा है। तीनों ही शाखाओं में जिला सहकारी बैंक का एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात रहा। दरअसल, बैंक के खातों की सामान्य जांच के दौरान सामने आया कि एक ही फर्म के तीन शाखाओं में अलग-अलग खाते हैं। यह फर्म बैंक के उसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की थी जो तीनों शाखाओं में तैनात रहा था। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के इन तीनों बैंक खातों में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। खातों में जो पैसा आया था, वह भी मुंबई स्थित निजी बैंक की एक शाखा से ट्रांसफर हुआ था। जो बाद में दिल्ली के अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। बैंक सचिव उपेंद्र कुमार सारस्वत को तीनों खाते संदिग्ध लगे, जिसके बाद उन्होंने इसकी जानकारी बैंक के चेयरमैन देवकरन गंगवार को दी। चेयरमैन ने तुरंत इसकी जानकारी प्रदेश सरकार को दी। जिसके बाद सरकार की सिफारिश पर तीनों बैंक खातों की विस्तृत जांच हो रही है। सूत्रों की माने तो सरकार ने जांच प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दी है। प्रवर्तन निदेशालय यह जांच करेगा कि खातों में जो पैसा आया है, वह हवाला कारोबार से जुुड़ा हुआ तो नहीं है। यह पैसा किसके खातों में ट्रांसफर हुआ है, ये बिंदु भी जांच का हिस्सा होंगे। वहीं, आय से अधिक संपत्ति की आशंका को देखते हुए जांच आयकर विभाग से भी कराई जा रही है।
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