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निगरानी समिति की बैठक से विधायक-ब्लाक प्रमुख नदारद
अमर उजाला ब्यूरो/रामपुर
Updated Sun, 14 Aug 2016 12:59 AM IST
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रामपुर में निगरानी समिति की बैठक लेते सांसद नेपाल सिंह और जिलाधिकारी ।
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रामपुर में ऐसे हो रही विकास कार्यों की निगरानी। जिला विकास समन्वय निगरानी समिति की पहली बैठक में न तो विधायक और न ही ब्लाक प्रमुख पहुंचे। सिर्फ सांसद ने बुकलेट पलटकर विकास कार्यों की समीक्षा कर ली। एजेंडा न भेजने पर एमएलसी के प्रतिनिधि बैठक से उठकर चले गए।
शासन ने जिला स्तरीय निगरानी समिति का नाम बदलकर जिला विकास समन्वय निगरानी समिति कर दी है। पुनर्गठन के बाद विकास भवन में पहले बैठक आयोजित की गई। बैठक में सांसद डा. नैपाल सिंह और चमरौैवा ब्लाक प्रमुख के पति हंसराज पप्पू ही पहुंच सके। अधिकारियों की मर्जी के मुताबिक ही मनरेगा, पीएमजीएसवाई, स्वच्छता मिशन, पेयजल, ग्रामीण विकास, विद्युतीकरण, इंदिरा आवास समेत सभी योजनाओं की समीक्षा निपटा दी।
इस बीच एमएलसी डा. जयपाल सिंह व्यस्त के प्रतिनिधि अजय तिवारी पहुंचे। उन्हें बैठने के लिए आगे स्थान भी नहीं मिला। एमएलसी के प्रतिनिधि को पीछे बैठा दिया गया। इस पर प्रतिनिधि भड़क गए। बोले, पहले तो बैठक का एजेंडा नहीं भेजा। साथ ही बैठने की भी व्यवस्था नहीं है। यह कहते हुए बैठक से उठकर चले गए। उनका कहना था कि डीएम समिति का सचिव होता है। अव्यवस्था के लिए सचिव जिम्मेदार हैं। यह मामला विधान परिषद में उठवाया जाएगा।
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शासन ने जिला स्तरीय निगरानी समिति का नाम बदलकर जिला विकास समन्वय निगरानी समिति कर दी है। पुनर्गठन के बाद विकास भवन में पहले बैठक आयोजित की गई। बैठक में सांसद डा. नैपाल सिंह और चमरौैवा ब्लाक प्रमुख के पति हंसराज पप्पू ही पहुंच सके। अधिकारियों की मर्जी के मुताबिक ही मनरेगा, पीएमजीएसवाई, स्वच्छता मिशन, पेयजल, ग्रामीण विकास, विद्युतीकरण, इंदिरा आवास समेत सभी योजनाओं की समीक्षा निपटा दी।
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इस बीच एमएलसी डा. जयपाल सिंह व्यस्त के प्रतिनिधि अजय तिवारी पहुंचे। उन्हें बैठने के लिए आगे स्थान भी नहीं मिला। एमएलसी के प्रतिनिधि को पीछे बैठा दिया गया। इस पर प्रतिनिधि भड़क गए। बोले, पहले तो बैठक का एजेंडा नहीं भेजा। साथ ही बैठने की भी व्यवस्था नहीं है। यह कहते हुए बैठक से उठकर चले गए। उनका कहना था कि डीएम समिति का सचिव होता है। अव्यवस्था के लिए सचिव जिम्मेदार हैं। यह मामला विधान परिषद में उठवाया जाएगा।
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