फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   Senior clerk Asghar Ali's bail plea rejected in advocate murder case

Rampur News: अधिवक्ता हत्याकांड में वरिष्ठ लिपिक असगर अली की जमानत अर्जी खारिज

Fri, 14 Aug 2026 01:57 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Fri, 14 Aug 2026 01:57 AM IST
विज्ञापन
Senior clerk Asghar Ali's bail plea rejected in advocate murder case
रामपुर। जिला पंचायत कार्यालय में अधिवक्ता फारुख अहमद की गोली मारकर हत्या करने के मामले में आरोपी वरिष्ठ लिपिक असगर अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत ने मामले की परिस्थितियों और सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन के बाद असगर अली की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश अब रामपुर पहुंच गया है।
विज्ञापन

असगर अली के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। अधिवक्ता फारुख अहमद की 12 फरवरी को जिला पंचायत दफ्तर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की वारदात के बाद पुलिस ने इस मामले में असगर अली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। असगर की जमानत याचिका रामपुर की कोर्ट से खारिज हो गई थी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट की शरण ली।
विज्ञापन

हाईकोर्ट में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि घटना के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी और हाथापाई हुई थी तथा गोली अचानक चली। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी को खुद भी गोली लगी थी और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर घटना की सीसीटीवी फुटेज पेन ड्राइव के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत की गई। हाईकोर्ट ने फुटेज देखने के बाद प्रथमदृष्टया पाया कि कार्यालय में असगर अली और मृतक के बीच विवाद शुरू हुआ।
इसके बाद असगर अली ने लाइसेंसी पिस्टल निकाली और मृतक का पीछा करते हुए दरवाजे तक गया। हाथापाई के दौरान उसकी पिस्टल से गोली चली, जो मृतक को लगी। फुटेज में घटना के समय आरोपी के हाथ में पिस्टल होना भी दिखाई दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर आरोपी को निर्दोष नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपी सार्वजनिक सेवक था और उसे कार्यालय में अपनी लाइसेंसी पिस्टल ले जाने की अनुमति नहीं थी, इसके बावजूद उसने हथियार कार्यालय में रखा और उसका इस्तेमाल किया, जिससे युवा अधिवक्ता की मौत हो गई।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी जमानत पाने का हकदार नहीं है और उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अर्जी पर की गई टिप्पणियां मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगी। यह आदेश रामपुर पहुंच गया है। स्थानीय कोर्ट में जमानत अर्जी खारिज होने का आदेश दाखिल कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed