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कभी अलविदा न कहना गीत देकर मेरा बचपन का यार कह गया अलविदा : रजा मुराद
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रामपुर। बालीवुड में डिस्को का परिचय कराने वाले बप्पी लहरी अब इस दुनिया में नहीं रहे। बप्पी लहरी और रजा मुराद बचपन के दोस्त थे। बप्पी लहरी के निधन पर बालीवुड कलाकार रजा मुराद ने उनसे जुड़ी यादें अमर उजाला से साझा कीं। कहा कि कभी अलविदा न कहना गीत देकर मेरा बचपन का यार अलविदा कह गया।
मूल रूप से रामपुर निवासी और बालीवुड के चर्चित कलाकार रजा मुराद ने कहा कि उनका और बप्पी दा का बचपन एक साथ बीता। एक साथ पढ़ाई की और कैरियर की शुरुआत भी एक साथ की। कहा कि उनके जैसा दोस्त मिलना मुश्किल है। उनके जाने के बाद उनके गीत यार बिना चैन कहां रे....के बोल जेहन में गूंज रहे हैं। रजा मुराद कहते हैं कि उनके जैसा सरल स्वभाव के कलाकार कम ही मिलते हैं। रजा मुराद ने बताया कि साल 2014 में एक लम्हा ऐसा भी आया जब उन्होंने अपने हाथ से बप्पी लहरी को पुरस्कार दिया। ये लम्हा साल 2014 में ऑल इंडिया अचीवर अवार्ड फंक्शन में मिला। रजा मुराद ने कहा कि बप्पी लहरी जी के साथ आखिरी बार करीब एक-डेढ़ साल पहले मस्कट में एक शो करने का अवसर मिला था, इसके बाद उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला और कोरोना संक्रमण के कारण मुलाकातों का सिलसिला भी सिमट गया था।
रजा मुराद ने बचपन से जुड़ी यादों को साझा कर कहा कि वो और बप्पी लहरी मुंबई के खार इलाके में पड़ोस में रहते थे। उनकी बप्पी लहरी से अच्छी दोस्ती थी। करीब छह-सात साल की उम्र में थी और बप्पी लहरी उस वक्त भी काफी गोल-मटोल थे। जिस पर वो उनके गालों को खींचते थे। ऐसा करने पर बप्पी लहरी रोते हुए अपने पिता से उनकी शिकायत करते थे, जिस पर वो सफाई देते थे। रजा मुराद ने बताया कि बप्पी लहरी उन्हें रजा नहीं बल्कि राजा कहते थे।
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रजा मुराद ने बताया कि उनके बच्चे और बप्पी लहरी के बच्चे मुंबई के एक ही स्कूल में पढ़ते थे। इसलिए लगभग रोजाना ही उनसे मुलाकात होती थी। वो बच्चों को कार से ही स्कूल भेजते थे, ऐसे में कभी बच्चों को स्कूल ले जाते वक्त तो कभी छुट्टी में दोनों मिलते थे। इस दौरान वो अक्सर 10-15 मिनट पहले पहुंच जाते थे और दोनों दोस्त आपस में बात करते थे।
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मूल रूप से रामपुर निवासी और बालीवुड के चर्चित कलाकार रजा मुराद ने कहा कि उनका और बप्पी दा का बचपन एक साथ बीता। एक साथ पढ़ाई की और कैरियर की शुरुआत भी एक साथ की। कहा कि उनके जैसा दोस्त मिलना मुश्किल है। उनके जाने के बाद उनके गीत यार बिना चैन कहां रे....के बोल जेहन में गूंज रहे हैं। रजा मुराद कहते हैं कि उनके जैसा सरल स्वभाव के कलाकार कम ही मिलते हैं। रजा मुराद ने बताया कि साल 2014 में एक लम्हा ऐसा भी आया जब उन्होंने अपने हाथ से बप्पी लहरी को पुरस्कार दिया। ये लम्हा साल 2014 में ऑल इंडिया अचीवर अवार्ड फंक्शन में मिला। रजा मुराद ने कहा कि बप्पी लहरी जी के साथ आखिरी बार करीब एक-डेढ़ साल पहले मस्कट में एक शो करने का अवसर मिला था, इसके बाद उनके साथ काम करने का अवसर नहीं मिला और कोरोना संक्रमण के कारण मुलाकातों का सिलसिला भी सिमट गया था।
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रजा मुराद ने बचपन से जुड़ी यादों को साझा कर कहा कि वो और बप्पी लहरी मुंबई के खार इलाके में पड़ोस में रहते थे। उनकी बप्पी लहरी से अच्छी दोस्ती थी। करीब छह-सात साल की उम्र में थी और बप्पी लहरी उस वक्त भी काफी गोल-मटोल थे। जिस पर वो उनके गालों को खींचते थे। ऐसा करने पर बप्पी लहरी रोते हुए अपने पिता से उनकी शिकायत करते थे, जिस पर वो सफाई देते थे। रजा मुराद ने बताया कि बप्पी लहरी उन्हें रजा नहीं बल्कि राजा कहते थे।
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रजा मुराद ने बताया कि उनके बच्चे और बप्पी लहरी के बच्चे मुंबई के एक ही स्कूल में पढ़ते थे। इसलिए लगभग रोजाना ही उनसे मुलाकात होती थी। वो बच्चों को कार से ही स्कूल भेजते थे, ऐसे में कभी बच्चों को स्कूल ले जाते वक्त तो कभी छुट्टी में दोनों मिलते थे। इस दौरान वो अक्सर 10-15 मिनट पहले पहुंच जाते थे और दोनों दोस्त आपस में बात करते थे।