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तारीख ए खानदान ए तैमूरिया की तलाश में मिलीं दो अन्य अहम किताबें
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रामपुर। तारीख-ए-खानदान-ए-तैमूरिया की तलाश में रजा लाइब्रेरी में यह पुस्तक तो नहीं मिली लेकिन, अमीर तैमूर से जुड़ी दो अन्य अहम किताबें मिली हैं। मलफूजात-ए-तैमूरी व तुज्क-ए-तैमूरी नामक किताबें रजा लाइब्रेरी में मिली हैं। जिनकी सूचना उज्बेकिस्तान के दूतावास को भेजा गया है। अमीर तैमूर के जीवन से जुड़ी इन किताबों का भी उज्बेकिस्तान में खासा महत्व है।
भारत में उज्बेकिस्तान के राजदूत दिलशोद अखतोव के आग्रह पर पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने रजा लाइब्रेरी पहुंचकर तारीख-ए-खानदान-तैमूरिया किताब की खोजबीन की। लेकिन, यह किताब रजा लाइब्रेरी में उपलब्ध नहीं है। इसके पटना की खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी में होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, रजा लाइब्रेरी में दो और अहम किताबें मिली हैं जिनका उज्बेकिस्तान में काफी महत्व है। पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि शनिवार-रविवार दो दिनों की खोजबीन के बाद रजा लाइब्रेरी के खजाने में मलफूजात-ए-तैमूरी व तुज्क-ए-तैमूरी नामक किताबें मिली हैं। इन दोनों पुस्तकों का विवरण उज्बेकिस्तान के दूतावास को भेजा गया है। यह किताबें भी काफी महत्वपूर्ण हैं और उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय का दल अब इन किताबों को देखने रामपुर आ सकता है। इन किताबों में अमीर तैमूर के बारे में नए अध्याय सामने आ सकते हैं। उन्होंने बताया कि तारीख-ए-खानदान-ए-तैमूरिया नामक पुस्तक 30 वर्ष पुरानी पटना की खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी में है। इस लाइब्रेरी की निदेशक डॉ. शाइस्ता बेदार रामपुर की ही हैं। अब भारत में उज्बेकिस्तान के दूतावास द्वारा खुदाबख्श लाइब्रेरी में भी संपर्क किया जाएगा।
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भारत में उज्बेकिस्तान के राजदूत दिलशोद अखतोव के आग्रह पर पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने रजा लाइब्रेरी पहुंचकर तारीख-ए-खानदान-तैमूरिया किताब की खोजबीन की। लेकिन, यह किताब रजा लाइब्रेरी में उपलब्ध नहीं है। इसके पटना की खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी में होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, रजा लाइब्रेरी में दो और अहम किताबें मिली हैं जिनका उज्बेकिस्तान में काफी महत्व है। पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि शनिवार-रविवार दो दिनों की खोजबीन के बाद रजा लाइब्रेरी के खजाने में मलफूजात-ए-तैमूरी व तुज्क-ए-तैमूरी नामक किताबें मिली हैं। इन दोनों पुस्तकों का विवरण उज्बेकिस्तान के दूतावास को भेजा गया है। यह किताबें भी काफी महत्वपूर्ण हैं और उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय का दल अब इन किताबों को देखने रामपुर आ सकता है। इन किताबों में अमीर तैमूर के बारे में नए अध्याय सामने आ सकते हैं। उन्होंने बताया कि तारीख-ए-खानदान-ए-तैमूरिया नामक पुस्तक 30 वर्ष पुरानी पटना की खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी में है। इस लाइब्रेरी की निदेशक डॉ. शाइस्ता बेदार रामपुर की ही हैं। अब भारत में उज्बेकिस्तान के दूतावास द्वारा खुदाबख्श लाइब्रेरी में भी संपर्क किया जाएगा।
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