{"_id":"6980efd128106171ea0c1c34","slug":"rampur-historian-nafees-siddiqui-passes-away-rampur-news-c-282-1-rmp1004-163376-2026-02-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur News: रामपुर के इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का निधन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur News: रामपुर के इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का निधन
Tue, 03 Feb 2026 12:11 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Tue, 03 Feb 2026 12:11 AM IST
विज्ञापन
रामपुर दरबार का संगीत एवं नवाबी रस्में और तारीख़–ए–रुहेला समेत कई पुस्तकें लिखीं
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। वरिष्ठ इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का दिल्ली में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनको सोमवार को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। वह रामपुर दरबार का संगीत एवं नवाबी रस्में तथा तारीख–ए–रुहेला समेत कई पुस्तकों के लेखक थे।
इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का जन्म 10 अक्तूबर 1944 को रामपुर में हुआ था। उन्होंने आखिरी सांस रविवार देर रात उपचार के दौरान दिल्ली के एक अस्पताल में ली। सोमवार को रामपुर में उनकी तदफीन अमल में आई। नमाजे जनाजा में काफी संख्या में लोग शामिल हुए। इंटेक के रुहेलखंड चैप्टर के सह संयोजक काशिफ खां के अनुसार नफीस सिद्दीकी को इतिहास के बारे में काफी जानकारी थी।
इतिहास और संगीत पर पुस्तकों के अतिरिक्त उनके लिखे गए ड्रामों के संग्रह खुसरो और दर्द के रिश्ते भी प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने कई धारावाहिक भी लिखे, जिनमें आवाज, एक और कहानी, खमोशी की आवाज, कभी धूप कभी छांव और यह तंग जमीन प्रमुख हैं।
विज्ञापन
उन्होंने आकाशवाणी के लिए भी सीरियल लिखे थे, जिनमें से सरजमीने रुहेलखंड, मेरा पैगाम मोहब्बत है, वादी–ए–कदीशा प्रमुख हैं। नफीस सिद्दीकी के कई ड्रामे बहुत लोकप्रिय हुए, जिनमें प्रमुख रूप से नेहर छूटा जाए, दो बूंद अमृत की, आखिरी शब के हमसफर, अजीजन, आस के सुर, जमीर की आवाज, लाजवंती, शीश महल और देवता प्रमुख हैं।
स्टेज प्ले और ओपेरा में भी उनका काफी दखल था। उन्होंने बताया कि रजा लाइब्रेरी के निदेशक रहे डॉ. वकारुल हसन सिद्दीकी और आकाशवाणी की केंद्र निदेशक रहीं मंदीप कौर ने उनसे रामपुर के इतिहास और संस्कृति पर काफी काम कराया था।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। वरिष्ठ इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का दिल्ली में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनको सोमवार को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। वह रामपुर दरबार का संगीत एवं नवाबी रस्में तथा तारीख–ए–रुहेला समेत कई पुस्तकों के लेखक थे।
इतिहासकार नफीस सिद्दीकी का जन्म 10 अक्तूबर 1944 को रामपुर में हुआ था। उन्होंने आखिरी सांस रविवार देर रात उपचार के दौरान दिल्ली के एक अस्पताल में ली। सोमवार को रामपुर में उनकी तदफीन अमल में आई। नमाजे जनाजा में काफी संख्या में लोग शामिल हुए। इंटेक के रुहेलखंड चैप्टर के सह संयोजक काशिफ खां के अनुसार नफीस सिद्दीकी को इतिहास के बारे में काफी जानकारी थी।
विज्ञापन
इतिहास और संगीत पर पुस्तकों के अतिरिक्त उनके लिखे गए ड्रामों के संग्रह खुसरो और दर्द के रिश्ते भी प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने कई धारावाहिक भी लिखे, जिनमें आवाज, एक और कहानी, खमोशी की आवाज, कभी धूप कभी छांव और यह तंग जमीन प्रमुख हैं।
विज्ञापन
उन्होंने आकाशवाणी के लिए भी सीरियल लिखे थे, जिनमें से सरजमीने रुहेलखंड, मेरा पैगाम मोहब्बत है, वादी–ए–कदीशा प्रमुख हैं। नफीस सिद्दीकी के कई ड्रामे बहुत लोकप्रिय हुए, जिनमें प्रमुख रूप से नेहर छूटा जाए, दो बूंद अमृत की, आखिरी शब के हमसफर, अजीजन, आस के सुर, जमीर की आवाज, लाजवंती, शीश महल और देवता प्रमुख हैं।
स्टेज प्ले और ओपेरा में भी उनका काफी दखल था। उन्होंने बताया कि रजा लाइब्रेरी के निदेशक रहे डॉ. वकारुल हसन सिद्दीकी और आकाशवाणी की केंद्र निदेशक रहीं मंदीप कौर ने उनसे रामपुर के इतिहास और संस्कृति पर काफी काम कराया था।