Rampur: रामपुर विधानसभा सीट पर दूसरी बार उपचुनाव, पहले आजम खां ने इस्तीफा दिया दूसरी बार सदस्यता रद्द
आजम खां ने सांसद रहते हुए इस सीट पर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इस चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के आकाश सक्सेना को पराजित किया था।
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रामपुर विधानसभा सीट पर दूसरी बार उप चुनाव होगा। इस सीट पर पहली बार उप चुनाव 2019 में हुआ था। उस वक्त आजम खां ने विधायक रहते हुए लोकसभा का चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद इस सीट पर उप चुनाव हुआ था जिसमें आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा ने भाजपा के प्रत्याशी भारत भूषण गुप्ता को 7,716 वोटों से हरा दिया था।
इस सीट पर दूसरी बार विधानसभा का चुनाव कराए जाने का एलान कर दिया गया है। वजह है नफरती भाषण देने के एक मामले में कोर्ट से आजम खां को तीन साल की सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी रद्द कर दी गई है। उनकी विधायकी रद्द होने के बाद इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर उप चुनाव कराए जाने का एलान कर दिया है। आजम खां ने सांसद रहते हुए इस सीट पर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इस चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के आकाश सक्सेना को पराजित किया था।
जेल में रहते हुए आजम खां ने 1,31,225 वोट हासिल किया था। जबकि उनके निकटम प्रतिद्वंदी आकाश सक्सेना को 76,084 वोट मिले थे। हालांकि जेल में रहने की वजह से आजम खां अन्य विधायकों के साथ शपथ नहीं ले पाए थे। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने 23 मई को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के कक्ष में शपथ ग्रहण किया था। कोर्ट से सजा मिलने के बाद 27 अक्तूबर से ही उनकी विधायकी रद्द घोषित कर दिया गया। इसके बाद इस सीट पर उप चुनाव का एलान किया गया है।
इस सीट से 10 बार चुनाव जीते आजम खां
प्रदेश में अब तक विधानसभा के 18 चुनाव हुए हैं। रामपुर विधानसभा सीट पर आजम खां ने 10 बार जीत हासिल की है। इन 18 चुनावों में वो 12 बार वो चुनावी मैदान में उतरे हैं, जिसमें दो बार उनको हार का सामना करना पड़ा है। पहली बार वो 1977 में विधानसभा का चुनाव लड़े थे जिसमें उनको हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनकी जीत का सफर 1980 के विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ।
1980 से लेकर 1995 तक हुए विधानसभा के पांच चुनावों में उन्होंने लगातार जीत हासिल की। 1996 के विधानसभा चुनाव में उनको कांग्रेस के प्रत्याशी अफरोज अली खां ने पराजित कर दिया था। इसके बाद पार्टी ने उनको राज्यसभा में भेज दिया था। 2002 में वो फिर विधानसभा का चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 2002 से 2022 के बीच हुए विधानसभा के चुनावों में उन्होंने फिर से लगातार पांच बार जीत हासिल की। इस 18वीं विधानसभा के लिए आजम खां निर्वाचित जरूर हुए लेकिन एक दिन भी विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाए।