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नवरीत सिंह के अंतिम अरदास में शामिल हुईं प्रियंका गांधी, बोलीं- शहादत को नहीं जाने देंगे व्यर्थ
Thu, 04 Feb 2021 06:44 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, रामपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रामपुर
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Thu, 04 Feb 2021 06:44 PM IST
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प्रियंका गांधी
- फोटो : अमर उजाला
26 जनवरी को दिल्ली में किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान जान गंवाने वाले नवरीत सिंह के अंतिम अरदास में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी शामिल हुईं। अरदास के बाद उन्होंने कहा कि यहां हम शहीद नवरीत की याद में आए हैं। मुझे अपने अनुभव से मालूम होता है कि नवरीत शहीद हुए हैं और उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिल में बस एक ही बात आती है कि अपने प्यारे की शहादत व्यर्थ ना हो, यही सब की तमन्ना है।
नवरीत 25 साल के थे, मेरा बेटा 20 साल का है। आपके भी नौजवान बेटे होंगे। लेकिन उनके साथ ऐसा हादसा हुआ कि वह वापस नहीं आए। वे किसानों का समर्थन देने इसलिए गए थे, क्योंकि उनके दिल में दुख था, पीड़ा थी। उन्हें मालूम था कि किसानों पर जुल्म हो रहा है। वे जानते थे कि जुल्म करना पाप है और जुल्म सहना उससे भी बड़ा पाप है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि एक नौजवान बच्चा दिल्ली से इतना दूर डिब्डिबा से आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे। यह उम्मीद रखते हुए कि सभी इकट्ठा होंगे तो सरकार उनकी बात सुनेगी। पर ऐसा हुआ नहीं। इससे भी बड़ा जुल्म ये है कि जब शहीदों को आतंकवादी कहते हैं। किसान आंदोलन को राजनीतिक साजिश की शक्ल में देखते हैं। यह बहुत बड़ा जुल्म है। किसान का दर्द सरकार न देख रही, न सुन रही है। उन्होंने कहा कि यह मौका राजनीतिक बात करने का नहीं है। मैं यहां यह कहने आई हूं कि मैं परिवार के दुख में शरीक हूं और इस शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
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नवरीत 25 साल के थे, मेरा बेटा 20 साल का है। आपके भी नौजवान बेटे होंगे। लेकिन उनके साथ ऐसा हादसा हुआ कि वह वापस नहीं आए। वे किसानों का समर्थन देने इसलिए गए थे, क्योंकि उनके दिल में दुख था, पीड़ा थी। उन्हें मालूम था कि किसानों पर जुल्म हो रहा है। वे जानते थे कि जुल्म करना पाप है और जुल्म सहना उससे भी बड़ा पाप है।
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प्रियंका गांधी ने कहा कि एक नौजवान बच्चा दिल्ली से इतना दूर डिब्डिबा से आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे। यह उम्मीद रखते हुए कि सभी इकट्ठा होंगे तो सरकार उनकी बात सुनेगी। पर ऐसा हुआ नहीं। इससे भी बड़ा जुल्म ये है कि जब शहीदों को आतंकवादी कहते हैं। किसान आंदोलन को राजनीतिक साजिश की शक्ल में देखते हैं। यह बहुत बड़ा जुल्म है। किसान का दर्द सरकार न देख रही, न सुन रही है। उन्होंने कहा कि यह मौका राजनीतिक बात करने का नहीं है। मैं यहां यह कहने आई हूं कि मैं परिवार के दुख में शरीक हूं और इस शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
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