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इंसान और धरती में फूंक रहे ‘प्राण’
अमर उजाला ब्यूरो/रामपुर
Updated Sun, 07 Feb 2016 11:46 PM IST
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तीस साल का यह कंप्यूटर इंजीनियर चाहता तो लाखों-करोड़ों रुपये कमाने की मशीन बन सकता था। लेकिन स्वामी विवेकानंद और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जीवन दर्शन से प्रेरित नलिन सिंह मल्टीनेशनल कंपनी की भारी-भरकम कमाई वाली नौकरी छोड़ गांव और खेतों की खाक छान रहे हैं।
नलिन युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने, किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने में और नारी सम्मान दिलाने के भगीरथ कार्य में पूरे प्राण-प्रण से जुटे हैं। छह साल के अरसे में एक हजार से अधिक लोगों को प्रेरित कर रक्तदान करवाया है। इन्हें 24 घंटे रक्तदान के लिए तैयार करते हुए एक सहायता समूह बनाया है।
मिलक तहसील के छोटे से गांव नवदिया निवासी नलिन सिंह 2008 में कंप्यूटर इंजीनियर बने। एक दिन वह अपने पिता के साथ खेत पर गए तो किसानों को पुराने ढर्रे से खेती करते हुए देखकर उनके मन में विचार आया कि कैसे वह खेती में आधुनिकता का समावेश का लाकर अन्नदाता की मदद कर सकते हैं।
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इसी दौरान उन्होंने स्वामी विवेकानंद और शहीद सरदार भगत सिंह से जुड़ा साहित्य पढ़ा तो उनके दिलो-दिमाग में समाज और देश के लिए कुछ करने का जुनून पैदा हो गया। नलिन सिंह ने दो जरूरतों को अपनी समाज सेवा के दायरे में शामिल किया। पहला रक्तदान और दूसरा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार।
इसके लिए उन्होंने साल 2009 में स्वैच्छिक रक्तदाताओं का समूह बनाना शुरू किया। रक्तदान-जीवनदान नाम से बनाए गए उनके समूह में 85 स्वैच्छिक रक्तदाता जुड़े हैं। इसमें शामिल लोग आसपास के इलाकों में ही नहीं, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, एनसीआर आदि स्थानों में जाकर रक्तदान के जरिये दूसरों को जीवनदान दे रहे हैं।
हर माह लगभग 20 सदस्य रक्तदान करते हैं। नलिन युवाओं व ग्रामीणों को उनके मूल अधिकारों के प्रति जागरूक करने की मुहिम भी चलाते हैं। इसके लिए नियमित रूप से गांवों का भ्रमण करते हैं। शिविर लगाते हैं। नलिन हर माह औसतन बीस गांवों में किसानों की चौपाल आयोजित कर उन्हें जैविक खेती की जानकारी दे रहे हैं।
वह किसानों को डेमो के माध्यम से जैविक खेती के तौर-तरीके समझाते हैं। इस काम के लिए वह एक प्रोजेक्टर, जैविक खाद व कुछ कृषि विज्ञानियों को भी साथ लेकर जाते हैं। नलिन ने अब तक सैकड़ों स्वास्थ्य परीक्षण शिविर और जागरूकता शिविरों का आयोजन करने के साथ ही महिला सम्मान के लिए भी जागरूकता रैलियां की हैं।
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नलिन युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने, किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने में और नारी सम्मान दिलाने के भगीरथ कार्य में पूरे प्राण-प्रण से जुटे हैं। छह साल के अरसे में एक हजार से अधिक लोगों को प्रेरित कर रक्तदान करवाया है। इन्हें 24 घंटे रक्तदान के लिए तैयार करते हुए एक सहायता समूह बनाया है।
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मिलक तहसील के छोटे से गांव नवदिया निवासी नलिन सिंह 2008 में कंप्यूटर इंजीनियर बने। एक दिन वह अपने पिता के साथ खेत पर गए तो किसानों को पुराने ढर्रे से खेती करते हुए देखकर उनके मन में विचार आया कि कैसे वह खेती में आधुनिकता का समावेश का लाकर अन्नदाता की मदद कर सकते हैं।
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इसी दौरान उन्होंने स्वामी विवेकानंद और शहीद सरदार भगत सिंह से जुड़ा साहित्य पढ़ा तो उनके दिलो-दिमाग में समाज और देश के लिए कुछ करने का जुनून पैदा हो गया। नलिन सिंह ने दो जरूरतों को अपनी समाज सेवा के दायरे में शामिल किया। पहला रक्तदान और दूसरा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार।
इसके लिए उन्होंने साल 2009 में स्वैच्छिक रक्तदाताओं का समूह बनाना शुरू किया। रक्तदान-जीवनदान नाम से बनाए गए उनके समूह में 85 स्वैच्छिक रक्तदाता जुड़े हैं। इसमें शामिल लोग आसपास के इलाकों में ही नहीं, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, एनसीआर आदि स्थानों में जाकर रक्तदान के जरिये दूसरों को जीवनदान दे रहे हैं।
हर माह लगभग 20 सदस्य रक्तदान करते हैं। नलिन युवाओं व ग्रामीणों को उनके मूल अधिकारों के प्रति जागरूक करने की मुहिम भी चलाते हैं। इसके लिए नियमित रूप से गांवों का भ्रमण करते हैं। शिविर लगाते हैं। नलिन हर माह औसतन बीस गांवों में किसानों की चौपाल आयोजित कर उन्हें जैविक खेती की जानकारी दे रहे हैं।
वह किसानों को डेमो के माध्यम से जैविक खेती के तौर-तरीके समझाते हैं। इस काम के लिए वह एक प्रोजेक्टर, जैविक खाद व कुछ कृषि विज्ञानियों को भी साथ लेकर जाते हैं। नलिन ने अब तक सैकड़ों स्वास्थ्य परीक्षण शिविर और जागरूकता शिविरों का आयोजन करने के साथ ही महिला सम्मान के लिए भी जागरूकता रैलियां की हैं।