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बहल्ला में गंदगी, श्रद्धालुओं ने नहीं किया स्नान
ब्यूूराे/रामपुर
Updated Thu, 26 Nov 2015 12:11 AM IST
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टांडा में केंद्र और राज्य सरकारें नदियों की साफ-सफाई के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहीं हैं। ताकि लोग स्वच्छ जल में स्नान और ध्यान कर सकें। साथ ही वे निरोग रह सकें। वहीं, टांडा के पास से बहने वाली बहल्ला नदी प्रदूषण के चलते काली हो चुकी है।
इससे कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालु स्नान तक नहीं कर सके। बाद में वे दूसरे स्थानों पर जाकर स्नान किया और पुण्य लाभ कमाया। उत्तराखंड से निकलकर नगर से सटकर निकल रही बहल्ला नदी के बादली घाट पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर भारी संख्या में लोग स्नान करते रहे हैं। वहीं इस अवसर पर मेले का भी आयोजन किया जाता रहा है।
उत्तराखंड के काशीपुर की औद्योगिक इकाइयों को नदी में प्रदूषित कचरा डाले जाने से पानी बदबूदार और जहरीला हो जाने से नदी में स्नान करना तो दूर, पशुओं के लायक भी नहीं रहा। हालांकि अमर उजाला प्रदूषण का मुद्दा लगातार उठाता रहा है।
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शासन प्रशासन की लापरवाही से बहल्ला नदीं का कार्तिक पूर्णिमा पर भी प्रदूषण बंद नहीं होने से नगर सहित बादली, करखेड़ा, करखेड़ी, जालपुर, धीरजनगर सहित आसपास के भारी संख्या में श्रद्धालु नदी में स्नान नहीं करने से पुण्य से वंचित रह गये। कई लोगों ने बारह किलोमीटर कोसी नदी में पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई।
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इससे कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालु स्नान तक नहीं कर सके। बाद में वे दूसरे स्थानों पर जाकर स्नान किया और पुण्य लाभ कमाया। उत्तराखंड से निकलकर नगर से सटकर निकल रही बहल्ला नदी के बादली घाट पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर भारी संख्या में लोग स्नान करते रहे हैं। वहीं इस अवसर पर मेले का भी आयोजन किया जाता रहा है।
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उत्तराखंड के काशीपुर की औद्योगिक इकाइयों को नदी में प्रदूषित कचरा डाले जाने से पानी बदबूदार और जहरीला हो जाने से नदी में स्नान करना तो दूर, पशुओं के लायक भी नहीं रहा। हालांकि अमर उजाला प्रदूषण का मुद्दा लगातार उठाता रहा है।
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शासन प्रशासन की लापरवाही से बहल्ला नदीं का कार्तिक पूर्णिमा पर भी प्रदूषण बंद नहीं होने से नगर सहित बादली, करखेड़ा, करखेड़ी, जालपुर, धीरजनगर सहित आसपास के भारी संख्या में श्रद्धालु नदी में स्नान नहीं करने से पुण्य से वंचित रह गये। कई लोगों ने बारह किलोमीटर कोसी नदी में पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई।