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Rampur News: लेफ्टिनेंट-गर्वनर जेम्स स्कोर्गी मेस्टन के नाम पर नवाब ने रखा था रामपुर के इस मोहल्ले का नाम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 01:19 AM IST
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Nawab had named this locality of Rampur after Lieutenant-Governor James Scorgie Meston.
रामपुर। शहर का व्यस्ततम इलाका मिस्टनगंज (मेस्टनगंज) 112 साल का इतिहास समेटे हुए है। 1912 में अवध और आगरा प्रांत के लेफ्टिनेंट-गर्वनर जेम्स स्कोर्गी मेस्टन के नाम से चौराहे व मोहल्ले का नाम मेस्टनगंज पड़ा था। जेम्स स्कोर्गी मेस्टन लंबे समय तक रामपुर में रहे। तत्कालीन नवाब हामिद अली खां ने यहीं पर उनको रहने के लिए कोठी भी दी थी। बाद में इस कोठी में ही पीडब्ल्यूडी का कार्यालय खुल गया। अब यह भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। अधिकतर शहरवासी मेस्टनगंज को मिस्टनगंज कहते हैं। नवाबों का शहर रामपुर का इतिहास काफी पुराना है। इतिहासकार बताते हैं कि नवाबों से पहले यहां राजा राम सिंह कठेरिया का राज था। बाद में जब नवाबों ने सत्ता संभाली तो शहर को अपने हिसाब से बसाया। कई ऐतिहासिक इमारतें बनवाईं। जिसमें रजा लाइब्रेरी भी शामिल है। इतिहासकार बताते हैं कि रामपुर के मोहल्लों का भी अपना इतिहास है। शहर के लगभग सभी मोहल्लों के नाम कहीं न कहीं से नवाबों से जुड़े हुए हैं।
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शहर के बीचोंबीच स्थित व्यस्ततम इलाके मिस्टनगंज) की अपनी अलग पहचान है। मिस्टनगंज नवाब हामिद अली खां और फिर नवाब रजा अली खां के समय में बसाया गया। इतिहासकार महेंद्र सक्सेना बताते हैं कि नवाब हामिद अली खां के समय में आगरा और अवध प्रांत के लेफ्टिनेंट-गर्वनर जेम्स स्कोर्गी मेस्टन रामपुर आया करते थे। नवाब की उनसे दोस्ती थी। नवाब ने उनको यहां रहने के लिए कोठी भी दी थी। इस कोठी में जेम्स स्कोर्गी मेस्टन कई साल रहे। इतिहासकार बताते हैं कि 1912 में नवाब हामिद अली खां ने ही लेफ्टिनेंट-गर्वनर के नाम पर मोहल्ले और चौराहे का नाम मेस्टन रखा था। बाद में इसे मेस्टनगंज कर दिया गया। अब लोग इसे मिस्टनगंज कहते हैं।
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नवाब हामिद अली खां के शासनकाल में लेफ्टिनेंट गर्वनर जेम्स स्कोर्गी मेस्टन के नाम पर मोहल्ले का नाम रखा गया था। अब लोग इसे मिस्टनगंज के नाम से जानते हैं।
- महेंद्र सक्सेना, इतिहासकार

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सपा शासन में खाली कराया गया था कार्यालय
नवाब नवाब हामिद अली खां ने लेफ्टिनेंट-गर्वनर जेम्स स्कोर्गी मेस्टन को चौराहे के पास ही एक कोठी दे दी गई थी। इसी कोठी में वह रहा करते थे। मेस्टन के निधन के बाद यह कोठी खाली हो गई और फिर रामपुर रियासत के देश में विलय के बाद यहां लोक निर्माण विभाग का कार्यालय खुल गया। सपा शासन में कोठी से लोक निर्माण विभाग के कार्यालय को खाली करा लिया गया था। इस भवन को जौहर ट्रस्ट में लेने की कोशिश हुई थी। हालांकि, पीडब्लूडी ने यह दफ्तर खाली तो कर दिया लेकिन यहां पर कुछ और नहीं बन सका। अब यह भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
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