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जौहर यूनिवर्सिटी में चकरोड की जमीन की पैमाइश पूरी
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रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी में चकरोड की जमीन की पैमाइश पूरी हो गई है। पैमाइश पूरी होने के बाद प्रशासन ने चकरोड की लगभग 17 बीघा जमीन सींगनखेड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान को सौंप दी। पैमाइश में यूनिवर्सिटी की तीन भवनों का कुछ हिस्सा चकरोड की जमीन पर आ रहा है। इसको लेकर प्रशासन से अलग से ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करेगा।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने 2012 में विनिमय के आधार पर चकरोड की 17 बीघा जमीन ली थी। यह जमीन सामुदायिक उपयोग की होती है। इस जमीन को जौहर यूनिवर्सिटी की चहारदीवारी में शामिल कर लिया गया था। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गई थी। मुख्यमंत्री के संज्ञान लेेने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने राजस्व बोर्ड परिषद, प्रयागराज में चार वाद दायर कराए थे। तीन अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद द्वारा वाद चलाने की अनुमति प्रदान की गई थी। 20 अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद के इस आदेश के विरुद्ध आजम खां ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। 26 अगस्त 2018 को उच्च न्यायालय ने राजस्व बोर्ड परिषद के फैसले को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी। 23 जनवरी 2019 को राजस्व बोर्ड ने अपने फैसले में मुरादाबाद कमिश्नर को इस वाद को चार हफ्ते में निस्तारित करने का आदेश दिया। कमिश्नर की कोर्ट ने दो सितंबर 2019 को एसडीएम टांडा द्वारा जौहर ट्रस्ट को दी गई सरकारी चकरोड के जमीन के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके जौहर ट्रस्ट के संरक्षक और सांसद ने राजस्व परिषद में द्वितीय अपील भी दायर की थी, जो वहां से खारिज हो गई। द्वितीय अपील खारिज होने के बाद गुरुवार को जिला प्रशासन ने जौहर यूनिवर्सिटी चकरोड के जमीन की पैमाइश शुरू कराई थी। 11 गाटा संख्या में पांच की पैमाइश गुरुवार को हुई थी। शुक्रवार को शेष गाटा संख्या की पैमाइश कराई गई। पैमाइश पूरी होने के बाद चकरोड की 17 बीघा जमीन सींगनखेड़ा के प्रधान के कब्जे में दे दी गई। पैमाइश के दौरान यह बात सामने आई है कि जौहर यूनिवर्सिटी के वीसी का निवास, मेेडिकल फैसेलिटी बिल्डिंग और एक नई बिल्डिंग का कुछ हिस्सा चकरोड की जमीन पर बना हुआ है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने अलग से नोटिस जारी करेगा।
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मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने 2012 में विनिमय के आधार पर चकरोड की 17 बीघा जमीन ली थी। यह जमीन सामुदायिक उपयोग की होती है। इस जमीन को जौहर यूनिवर्सिटी की चहारदीवारी में शामिल कर लिया गया था। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की गई थी। मुख्यमंत्री के संज्ञान लेेने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने राजस्व बोर्ड परिषद, प्रयागराज में चार वाद दायर कराए थे। तीन अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद द्वारा वाद चलाने की अनुमति प्रदान की गई थी। 20 अगस्त 2018 को राजस्व बोर्ड परिषद के इस आदेश के विरुद्ध आजम खां ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। 26 अगस्त 2018 को उच्च न्यायालय ने राजस्व बोर्ड परिषद के फैसले को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी। 23 जनवरी 2019 को राजस्व बोर्ड ने अपने फैसले में मुरादाबाद कमिश्नर को इस वाद को चार हफ्ते में निस्तारित करने का आदेश दिया। कमिश्नर की कोर्ट ने दो सितंबर 2019 को एसडीएम टांडा द्वारा जौहर ट्रस्ट को दी गई सरकारी चकरोड के जमीन के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके जौहर ट्रस्ट के संरक्षक और सांसद ने राजस्व परिषद में द्वितीय अपील भी दायर की थी, जो वहां से खारिज हो गई। द्वितीय अपील खारिज होने के बाद गुरुवार को जिला प्रशासन ने जौहर यूनिवर्सिटी चकरोड के जमीन की पैमाइश शुरू कराई थी। 11 गाटा संख्या में पांच की पैमाइश गुरुवार को हुई थी। शुक्रवार को शेष गाटा संख्या की पैमाइश कराई गई। पैमाइश पूरी होने के बाद चकरोड की 17 बीघा जमीन सींगनखेड़ा के प्रधान के कब्जे में दे दी गई। पैमाइश के दौरान यह बात सामने आई है कि जौहर यूनिवर्सिटी के वीसी का निवास, मेेडिकल फैसेलिटी बिल्डिंग और एक नई बिल्डिंग का कुछ हिस्सा चकरोड की जमीन पर बना हुआ है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने अलग से नोटिस जारी करेगा।
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