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Makar Sankranti 2024: देश भर में उड़ान भरेंगी रामपुर में बनी पतंगें, 150 कारखानों में तैयार की गई 80 लाख पीस

Sat, 13 Jan 2024 12:46 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 13 Jan 2024 12:46 PM IST
सार

मकर संक्रांति पर रामपुर की पतंगें देश भर में उड़ान भरेंगी। रामपुर में 150 कारखानों में इन पतंगों को तैयार किया गया है। कारोबारियों ने बताया कि हर साल लगभग पांच करोड़ का कारोबार होता है। 

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Makar Sankranti 2024: Kites made Rampur fly across country, 80 lakh pieces made 150 factories
रामपुर में पतंग तैयार करते कारीगर - फोटो : संवाद

विस्तार

रामपुर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ पतंगों के लिए भी मशहूर है। यहां कारखानों में बड़े पैमाने पर कारीगर पतंगें बनाते हैं, जिनका देश के कई राज्यों में निर्यात किया जाता है। मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की परंपरा है। ऐसे में जिले के कारीगरों को 80 लाख से ज्यादा पतंगों का ऑर्डर मिला है।

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मकर संक्रांति पर रामपुर की पतंगे लुधियाना और हैदराबाद में भी उड़ान भरेंगी। मौजूदा समय में जनपद में पतंगों के 150 कारखाने हैं। इन कारखानों में कारीगर अपने हुनर का करिश्मा दिखाकर पतंगों को रूप देते हैं। एक-एक कारखाने में चार-पांच कर्मचारी रखे हुए हैं। इन कर्मचारियों का काम तरह-तरह की आकर्षक पतंगों को तैयार करना है।
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रंग-बिरंगी पतंगे दो रुपये से 15 रुपये तक उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि यहां की बनी पतंगें रामपुर में कम जबकि बाहरी राज्यों में अधिक उड़ती हैं। रामपुर के कारखानों में तैयार पतंगों की उड़ान मुंबई, पुणे, हैदराबाद, नासिक, वाराणसी, लुधियाना, सहारनपुर तक है। इन इलाकों में रामपुर की पतंगों की काफी अधिक डिमांड है।
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कारोबारी बताते हैं कि हर साल 4-5 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। मकर संक्रांति के लिए कारीगर दिन-रात पतंगे बनाने में जुटे हैं।

फर्रुखाबाद और कोलकाता से आती है कमान

रामपुर में पतंगों की कमान बांस के पेड़ से बनाई जाती है। जिसको फर्रुखाबाद और कोलकाता से लाया जाता है। बताया जा रहा है कि बांस असम से कोलकाता से रामपुर लाया जाता है। इसी बांस से कमान बनती है।


20 साल से पतंगों का कारोबार कर रहे हैं। दूर-दरा से आर्डर मिलते हैं। पतंग से पूरा परिवार पाल रहे हैं। खुशी है कि हमारी बनाई पतंगें अन्य राज्यों तक उड़ान भर रही हैं। रामपुर में कारीगर भी बेहद उम्दा हैं। इस बार संक्रांति के लिए 10 लाख पतंगों का ऑर्डर मिला था, जिसे पूरा कर दिया गया है। ये पतंगे लुधियाना, हैदराबाद में उड़ान भरेंगी। -अकरम, पतंग कारोबारी

लंबे समय से पतंगों के धंधे से जुड़े हैं। दो रुपये की पतंग ने रामपुर को पहचान दिला दी है। अपने काम में बड़ा सुकून मिलता है। यह पतंगें खासतौर पर विशेष उपलक्ष्यों में अधिक उड़ती हैं। बसंत पंचमी, मकर संक्रांति और अन्य कई त्योहार हैं। जिनमें विशेष कर अच्छी कमाई रहती है। -महफूज अली, कारीगर

इस बार डिमांड अच्छी आई है और पूरे मनोयोग से हम लोग पतंग बनाने में लगे हुए हैं। पूरा माल लेकर बैठे हुए हैं। लक्ष्य के अनुरूप मांग बढ़ती है और हम इनको तैयार करते जाते हैं। हमारे साथियों का भी सहयोग रहता है। -फैसल अली, कारीगर


पतंग बनाने के लिए कमानी को फर्रुखाबाद से लाते हैं और कागज यहीं उपलब्ध हो जाता है। सुबह कारखाने में आने के बाद शाम को पांच बजे के बाद ही जाते हैं। पतंगे ज्यादा से ज्यादा बनाने की कोशिश करते हैं और ग्राहक को किसी भी तरह की शिकायत न आए इसका भी ध्यान रखना पड़ता है। -फैजान अली, कारीगर

 

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