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आग दे कोल सारे आओ, सुंदर, मुंदरिए जोर नाल गाओ----
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रामपुर। सुंदरिए-मुंदरिए हो, तेरा कोन विचारा हो, दुल्ला भट्टी वाला हो, गई लोहड़ी वे,बना लो जोड़ी वे..जैसे पारंपरिक गीत-संगीत के साथ लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बच्चों ने घर-घर जाकर लोहड़ी मांगी। मूंगफली, गजक रेबड़ी का आनंद उठाया।
गुरुवार को सुबह से ही सिख बाहुल्य इलाकों में लोहड़ी की धूम शुरु हो गई थी। बच्चों ने सुबह से ही लोहड़ी मांगना शुरू कर दिया था। शाम को सूर्य ढलने के बाद धूमधाम से लोहड़ी जलाई गई। सूर्य ढलने के बाद धीरे-धीरे लोहड़ी जलाना शुरू किया गया। गीत-संगीत ढोल-नंगाड़ों की थाप पर लोगों ने जमकर भंगड़ा किया। घरों के बाहर ढोलों की थाप गूंजने लगीं। घरों के बाहर आग जलाकर रेवड़ी और मूंगफली समर्पित की गई। ढोल नगाड़ों की थापों पर लोगों ने जमकर भंगड़ा और गिद्दा किया। गले मिलकर लोहड़ी की शुभकामनाएं दीं। घरों में कई प्रकार के पकवान बनाए गए। शहर के दशमेश नगर, आदर्श कालोनी, वीपी कालोनी, फ्रेंडस कालोनी, बाबा दीप सिंह नगर, हाथीखाना, सिविल लाइंस, राधा रोड, पंजाबी कालोनी समेत सिख बाहुल्य क्षेत्रों में हर गली मोहल्ले में ढोल-नंगाड़ों की थाप पर पारंपरिक गीतों पर नृत्य कर लोहड़ी जलाई गई। आओ भंगड़ा पाएं इस बार, ट्विंकल, ट्विंकल लिटिल स्टार, फिर गई भंगड़े दी बारी, लोहड़ी मनोदी करो तैयारी, आग दे कोल सारे आओ, सुंदर, मुंदरिए जोर नाल गाओ, गई लोहड़ी वे, बना लो जोड़ी वे..जैसे पारंपरिक लोहड़ी के गीत गाए। बच्चे, बड़े और बुर्जुगों ने एक-दूसरे को गले-मिलकर लोहड़ी की बधाई दी। देर रात तक घरों और सार्वजनिक स्थानों पर लोहड़ी का जश्न चलता रहा।
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गुरुवार को सुबह से ही सिख बाहुल्य इलाकों में लोहड़ी की धूम शुरु हो गई थी। बच्चों ने सुबह से ही लोहड़ी मांगना शुरू कर दिया था। शाम को सूर्य ढलने के बाद धूमधाम से लोहड़ी जलाई गई। सूर्य ढलने के बाद धीरे-धीरे लोहड़ी जलाना शुरू किया गया। गीत-संगीत ढोल-नंगाड़ों की थाप पर लोगों ने जमकर भंगड़ा किया। घरों के बाहर ढोलों की थाप गूंजने लगीं। घरों के बाहर आग जलाकर रेवड़ी और मूंगफली समर्पित की गई। ढोल नगाड़ों की थापों पर लोगों ने जमकर भंगड़ा और गिद्दा किया। गले मिलकर लोहड़ी की शुभकामनाएं दीं। घरों में कई प्रकार के पकवान बनाए गए। शहर के दशमेश नगर, आदर्श कालोनी, वीपी कालोनी, फ्रेंडस कालोनी, बाबा दीप सिंह नगर, हाथीखाना, सिविल लाइंस, राधा रोड, पंजाबी कालोनी समेत सिख बाहुल्य क्षेत्रों में हर गली मोहल्ले में ढोल-नंगाड़ों की थाप पर पारंपरिक गीतों पर नृत्य कर लोहड़ी जलाई गई। आओ भंगड़ा पाएं इस बार, ट्विंकल, ट्विंकल लिटिल स्टार, फिर गई भंगड़े दी बारी, लोहड़ी मनोदी करो तैयारी, आग दे कोल सारे आओ, सुंदर, मुंदरिए जोर नाल गाओ, गई लोहड़ी वे, बना लो जोड़ी वे..जैसे पारंपरिक लोहड़ी के गीत गाए। बच्चे, बड़े और बुर्जुगों ने एक-दूसरे को गले-मिलकर लोहड़ी की बधाई दी। देर रात तक घरों और सार्वजनिक स्थानों पर लोहड़ी का जश्न चलता रहा।
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