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यूपी: 1170 करोड़ की कुर्क संपत्तियों पर निगाहें, न्याय निर्णायक प्राधिकरण में अंतिम जब्ती का अदालत करेगी फैसला

Thu, 05 Nov 2026 02:54 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 05 Nov 2026 02:54 PM IST
सार

रामपुर की जौहर ट्रस्ट से जुड़ी करीब 1170 करोड़ की कुर्क संपत्तियों पर निगाहें टिकी हैं। न्याय निर्णायक प्राधिकरण में पहली सुनवाई होगी। अंतिम जब्ती का फैसला विशेष अदालत करेगी।

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Johar University: What Happens to Azam Khan's ₹1,170 Crore Assets After ED Attachment
रामपुर जेल से बाहर आए आजम खां को ईडी ने किया गिरफ्तार - फोटो : आईएएनएस

विस्तार

रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी करीब 1170 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की के बाद अब सबकी निगाहें आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं। ईडी की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि इन संपत्तियों का भविष्य क्या होगा?

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क्या ये हमेशा के लिए सरकारी कब्जे में चली जाएंगी या आजम खां और ट्रस्ट को कानूनी लड़ाई के बाद राहत मिल सकती है? फिलहाल इसका जवाब आने में वक्त लगेगा। ईडी की ओर से की गई कुर्की अभी अस्थायी है। इसे अंतिम जब्ती में बदलने के लिए कई कानूनी पड़ाव पार करने होंगे।
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ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के तहत जौहर यूनिवर्सिटी परिसर की संपत्तियों को कुर्क किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

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एजेंसी ने निर्माण पर खर्च हुई 426.46 करोड़ रुपये की रकम को कथित अपराध से अर्जित धन से जुड़ा बताया है, जबकि संबंधित संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये आंका गया है। हालांकि, कुर्की के बाद इन संपत्तियों पर अंतिम फैसला जांच एजेंसी नहीं, बल्कि निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

न्याय निर्णायक प्राधिकरण में होगी पहली बड़ी सुनवाई
कानून के जानकारों के मुताबिक, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी को अस्थायी कुर्की के आदेश के बाद निर्धारित समय में न्याय निर्णायक प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दाखिल करनी होती है। प्राधिकरण संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगता है।

आजम खां, जौहर ट्रस्ट और संपत्तियों पर दावा रखने वाले अन्य पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। वे संपत्तियों के अधिग्रहण, निर्माण में लगे धन के स्रोत और मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज पेश कर सकते हैं। वहीं, ईडी अपने आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर कुर्की को सही ठहराने की कोशिश करेगी।

कुर्की की पुष्टि के बाद भी खत्म नहीं होगी लड़ाई
कानून के जानकारों के अनुसार, न्याय निर्णायक प्राधिकरण यदि ईडी की कार्रवाई से सहमत होता है तो अस्थायी कुर्की की पुष्टि कर सकता है। इसके बाद संपत्तियों के हस्तांतरण और बिक्री पर रोक प्रभावी रहेगी।

जरूरत पड़ने पर ईडी नियमानुसार संपत्तियों का कब्जा भी ले सकती है। हालांकि, कुर्की की पुष्टि का मतलब यह नहीं होगा कि संपत्ति तत्काल केंद्र सरकार की हो गई। इसके बाद भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर विशेष अदालत में मुकदमे की प्रक्रिया चलेगी।

अंतिम जब्ती का फैसला विशेष अदालत करेगी
पीएमएलए के तहत संपत्ति की अंतिम जब्ती का फैसला विशेष अदालत में मुकदमे के नतीजे के आधार पर होगा। यदि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप साबित होते हैं और संपत्ति अपराध से अर्जित धन से जुड़ी पाई जाती है तो उसे केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त किया जा सकता है।

इसके विपरीत, आरोप साबित नहीं होने की स्थिति में संपत्ति को मुक्त करने और वैध हकदार को लौटाने का रास्ता खुल सकता है। इस तरह 1170 करोड़ रुपये की संपत्तियों का भविष्य केवल ईडी की कार्रवाई से नहीं, बल्कि प्राधिकरण और अदालतों के फैसलों से तय होगा।

कानूनी चुनौती देने के भी विकल्प
आजम खां और जौहर ट्रस्ट के पास कुर्की की कार्रवाई को चुनौती देने के कानूनी विकल्प भी हैं। प्राधिकरण के आदेश के खिलाफ पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की जा सकती है। इसके बाद कानून के तहत उच्च न्यायालय में भी अपील का प्रावधान है। ऐसे में संपत्तियों को लेकर कानूनी लड़ाई लंबी खिंच सकती है।

पीएमएलए के तहत संपत्ति जब्ती का नोटिस आएगा, जिसके बाद ट्रस्ट की ओर से इसका जवाब दिया जाएगा। यह नोटिस प्राधिकरण के माध्यम से आएगा। यदि नोटिस के जवाब से प्राधिकरण संतुष्ट होगा तो कुर्क संपत्ति रिलीज कर दी जाएगी। 180 दिन के भीतर यह प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद कुर्क संपत्ति खुद ही रिलीज हो जाएगी। -सतनाम सिंह मट्टू, पूर्व अध्यक्ष बार एसोसिएशन

ईडी की ओर से जब्त की गई संपत्ति का मामला न्याय निर्णायक प्राधिकरण में चलेगा। यहां तय होगा कि ईडी की कार्रवाई सही है या गलत। यदि कार्रवाई सही पाई जाती है तो प्राधिकरण इसमें आदेश जारी करेगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। -सर्वजीत सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बार एसोसिएशन रामपुर

आजम के दो मामलों में सुनवाई टली
सपा नेता आजम खां के खिलाफ दर्ज भड़काऊ भाषण के मामले में बुधवार को कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। कोतवाली और खजुरिया थाने में दर्ज मामलों की सुनवाई टल गई। अब इन मामलों में 24 नवंबर को सुनवाई होगी।

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